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MCQ and Summary for शिक्षा और संस्कृति Class 10 Hindi Matric Godhuli

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MCQ and Summary for शिक्षा और संस्कृति (Shiksha aur Sanskriti) Class 10 Hindi Godhuli Part 2 Bihar Board

शिक्षा और संस्कृति - महात्मा गाँधी MCQ and सारांश

Multiple Choice Question Solutions (बहुविकल्पी प्रश्न)

1. 'शिक्षा और संस्कृति' पाठ के लेखक कौन हैं ?

(A) रवीन्द्रनाथ ठाकुर
(B) भीमराव अम्बेडकर
(C) मैक्समूलर,
(D) महात्मा गांधीजी
उत्तर
(D) महात्मा गांधीजी

2. 'शिक्षा और संस्कृति' शीर्षक पाठ गद्य की कौन-सा विद्या है ?
(A) निबंध
(B) गद्य काव्य
(C) रेखाचित्र
(D) साक्षात्कार
उत्तर
(A) निबंध

3. गांधीजी को 'महात्मा' किसने कहा ?
(A) जवाहरलाल नेहरू
(B) रवीन्द्रनाथ ठाकुर
(C) राजेन्द्र प्रसाद
(D) सरदार पटेल
उत्तर
(B) रवीन्द्रनाथ ठाकुर

4. गाँधीजी की दृष्टि में उदात्त और बढ़िया शिक्षा क्या है ?
(A) अहिंसक प्रतिरोध
(B) अक्षर-ज्ञान
(C) अनुवाद
(D) अंग्रेजी की शिक्षा
उत्तर
(B) अक्षर-ज्ञान

5. गाँधीजी शिक्षा का उद्देश्य क्या मानने धे?
(A) नौकरी पाना
(B) वैज्ञानिक बनना
(C) चरित्र-निर्माण
(D) यांत्रिक दक्षता
उत्तर
(C) चरित्र-निर्माण

6. टॉल्सटाय कौन थे ?
(A) रूसी लेखक
(B) चीनी लेखक
(C) अंग्रेजी लेखक
(D) फ्रेंच लेखक
उत्तर
(A) रूसी लेखक

7. गाँधी जी की हत्या किसने की?
(A) पागल ने
(B) जानवर ने
(C) विमान हादसे ने
(D) नाथूराम गोडसे ने
उत्तर
(D) नाथूराम गोडसे ने

8. महात्मा गाँधी कहाँ के आश्रम में रहते थे ?
(A) प. चम्पारण
(B) शांति निकेतन
(C) साबरमती
(D) अघोराश्रम
उत्तर
(C) साबरमती

9. पोरबंदर कहाँ स्थित है ?
(A) गुजरात में
(B) मध्य प्रदेश में
(C) बिहार में
(D) पंजाब में
उत्तर
(A) गुजरात में

10. गाँधी जी का जन्म कहाँ हुआ ?
(A) पोरबंदर
(B) मल्लिपट्टम्
(C) पोलियर
(D) अहमदाबाद
उत्तर
(A) पोरबंदर

11. गाँधीजी 1888 में पढ़ने के लिए कहाँ गए ?
(A) अमेरिका
(B) फ्रांस
(C) लंदन
(D) रूस
उत्तर
(C) लंदन

12. गाँधी जी का दक्षिण अफ्रीका प्रवास कब से कब तक था ?
(A) 1893 ई. से 1914 ई. तक
(B) 1892 ई. से 1913 ई. तक
(C) 1894 ई० से 1914 ई. तक
(D) 1893 ई. से 1913 ई. तक
उत्तर
(A) 1893 ई. से 1914 ई. तक

13. आध्यात्मिक शिक्षा से गाँधीजी का क्या अधिप्राय है ?
(A) पुस्तक की शिक्षा
(B) यंत्रों की शिक्षा
(C) बुद्धि की शिक्षा
(D) हृदय की शिक्षा
उत्तर
(D) हृदय की शिक्षा

14. महात्मा गाँधी के अनुसार उदात्त बबलिया शिक्षा क्या है?
(A) आध्यात्मिक शिक्षा
(B) यांत्रिक शिक्षा
(C) अहिंसक प्रतिरोध
(D) साक्षरता
उत्तर
(C) अहिंसक प्रतिरोध

शिक्षा और संस्कृति- लेखक परिचय

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 ई० में पोरबंदर, गुजरात में हुआ था । उनके पिता का नाम करमचंद गाँधी और माता का नाम पुतलीबाई थां। उनकी प्रारंभिक शिक्षा पोरबंदर और उसके आस-पास हुई । 4 दिसंबर 1888 ई० में वे वकालत की पढ़ाई के लिए । यूनिवर्सिटी कॉलेज, लंदन यूनिवर्सिटी, लंदन गए । 1883 ई०में कम उम्र में ही उनका विवाह कस्तूरबा से हुआ जो स्वाधीनता संग्राम में उनके साथ कदम-से-कदम मिलाकर चलीं । गाँधीजी के जीवन में दक्षिण अफ्रीका (1893-1914 ई०) के प्रवास का ऐतिहासिक महत्त्व है । वहीं उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ अहिंसा का पहला प्रयोग किया ।

1915 ई० में गाँधीजी भारत लौट आए और स्वाधीनता संग्राम में कूद पड़े। आजादी की लड़ाई में उन्होंने. सत्य के प्रयोग किए । अहिंसा और सत्याग्रह उनका सबसे बड़ा हथियार था। उन्होंने स्वराज की माँग की, अछूतोद्धार का काम किया, सर्वोदय का कार्यक्रम चलाया, स्वदेशी का नारा दिया, समाज में व्याप्त ऊँच-नीच, जाति-धर्म के विभेदक भाव को मिटाने की कोशिश की और अंततः अंग्रेजों की गुलामी से भारत को आजादी दिलाई।

गाँधीजी को रवींद्रनाथ टैगोर ने ‘महात्मा’ कहा । उन्हें ‘बापू’, ‘राष्ट्रपिता आदि कहकर कृतज्ञ राष्ट्र याद करता है । गाँधीजी ने ‘हिंद स्वराज’, ‘सत्य के साथ मेरे प्रयोग’ आदि पुस्तकें लिखीं। उन्होंने ‘हरिजन’, ‘यंग इंडिया’ आदि पत्रिकाएँ भी संपादित की । उनका पूरा जीवन राष्ट्र के प्रति समर्पित था । उन्होंने शिक्षा, संस्कृति, राजनीति तथा सामाजिक एवं आर्थिक पक्षों पर खूब लिखा और उनके प्रयोग के द्वारा भारतवर्ष को फिर से एक उन्नत एवं गौरवशाली राष्ट्र बनाने की कोशिश की । 30 जनवरी 1948 ई० में नई दिल्ली में एक सिरफिरे ने उनकी हत्या कर दी । गाँधीजी की स्मृति में पूरा राष्ट्र 2 अक्टूबर को उनकी जयंती मनाता है । अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके जन्म दिवस को ‘अहिंसा दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।

शिक्षा और संस्कृति जैसे विषय पर यहाँ ‘हरिजन’, ‘म इंडिया जैसे ऐतिहासिक पत्रों के अग्रलेखों से संकलित-संपादित राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के विचार प्रस्तुत हैं । इस पाठ में उनके क्रांतिकारी शिक्षा दर्शन के अनुरूप वास्तविक जीवन में उपयोगी, व्यावहारिक दृष्टिकोण और विचार हैं जिनके बल पर आत्मा, बुद्धि, मानस एवं शरीर के संतुलित परिष्कार के साथ मनुष्य
के नैतिक विकास के लिए जरूरी प्रेरणाएँ हैं । गाँधीजी की शिक्षा और संस्कृति की परिकल्पना. निरी सैद्धांतिक नहीं है, वह जटिल और पुस्तकीय भी नहीं है, बल्कि हमारे साधारण दैनंदिनं जीवन-व्यवहार से गहरे अर्थों में जुड़ी हुई है।


शिक्षा और संस्कृति- पाठ परिचय

प्रस्तुत पाठ में शिक्षा और संस्कृति पर महात्मा गाँधी के विचार प्रस्तुत किया गया है। लेखक ने नैतिक शिक्षा पर जोर दिया है।


शिक्षा और संस्कृति का सारांश (Summary)

प्रस्तुत पाठ ’शिक्षा और संस्कृति’ (Siksha aur Sanskriti) महात्मा गाँधी द्वारा लिखा गया है। इसमें लेखक ने सच्ची दिशा एवं भारतीय संस्कृति की विशेषताओं पर प्रकाश डाला है। लेखक वैसी शिक्षा को सच्ची शिक्षा मानता है जिसमें प्रेम से घृणा को, सत्य से असत्य को तथा कष्ट सहन से हिंसा को जीतने की शक्ति हो। लेखक की राय में सच्ची शिक्षा का अर्थ अपनी इन्द्रीयों का ठीक-ठीक उपयोग करना आनी चाहिए।
लेखक ऐसी शिक्षा प्रारंभ करने के हिमायती हैं जिसमें तालीम के साथ-साथ उत्पादन करने की क्षमता प्राप्त हो सके।
लेखक ने चरित्र निर्माण को शिक्षा का ध्येय माना है। उनका तर्क है कि इससे साहस, बल, सदाचार तथा आत्मोत्सर्ग की शक्ति का विकास करने में मदद मिलेगी। वह साक्षरता से ज्यादा महत्वपूर्ण है। लेखक का यह भी कहना है कि यदि व्यक्ति चरित्र निर्माण करने में सफल हो जाता है, तो समाज अपना दायित्व स्वयं संभाल लेगा।
संस्कृति संबंधी विषय में उनका तर्क था कि संसार की किसी भाषाओं में, जो ज्ञान का भंडार भरा है, उसे अपनी ही भाषा में प्राप्त करें।
लेखक का यह भी मानना है कि किसी दूसरी संस्कृति को जानने से पहले अपनी संस्कृति का ज्ञान होना आवश्यक है। तभी दूसरों की संस्कृति समझना उचित होगा, क्योंकि हमारी संस्कृति इतनी समृद्ध है कि दुनिया में कोई भी संस्कृति इतनी समृद्ध नहीं है।
देश के भावी संस्कृति के बारे में लेखक का कहना है कि यदि दूसरी संस्कृति का बहिष्कार किया जाता है तो अपनी संस्कृति जिंदा नहीं रह पाती। हमारी संस्कृति की विशेषता है कि हमारे पूर्वज एक-दूसरे के साथ बड़ी आजादी के साथ मिल गए। हमलोग उसी मिलावट की उपज हैं।
लेखक की सलाह है कि साहित्य में रुचि रखने वाले हमारे युवा स्त्री-पुरूष संसार की हर भाषाओं को सिखें तथा अपनी विद्वता का लाभ भारत और संसार को सुबाष चन्द्र बोस तथा रविन्द्र नाथ टैगोर की तरह दें। किंतु अपनी भाषा तथा धर्म का त्याग न करें। हमारी संस्कृति विविध संस्कृतियों के सामंजस्य की प्रतिक है। इसमें प्रत्येक संस्कृति के लिए उचित स्थान सुरक्षित है।

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