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MCQ and Summary for राम नाम बिन बिरथे जगि जनमा, जो नर दुख में दुख नहिं मानै (Ram Naam bin Birthe Jagi Janma, Jo Nar me Dukh me Dukh Nahi Maane) Class 10 Hindi Godhuli Part 2 Bihar Board

राम नाम बिन बिरथे जगि जनमा, जो नर दुख में दुख नहिं मानै - गुरु नानक MCQ and सारांश

Multiple Choice Question Solutions (बहुविकल्पी प्रश्न)

1. राम नाम बिनु बिरधे जगि जनमा' किस कवि की रचना है ?
(A) गुरु नानक
(B) गुरु अर्जुनेदव
(C) रसखान
(D) प्रेमधन
उत्तर
(A) गुरु नानक

2. गुरुनानक की रचना है
(A) अति सूधो सलेट को मारता है
(B) मो अँसुवा निहि लै बरसौ
(C) जो नर दुख में दुख नहिं माने
(D) स्वदेशी
उत्तर
(C) जो नर दुख में दुख नहिं माने

3. गुरु नानक के अनुसार किसके बिना जन्म व्यर्थ है?
(A) सम्पत्ति
(B) इष्ट मित्र
(C) पत्नी
(D) राम नाम
उत्तर
(D) राम नाम

4. ब्रह्म का निवास कहा होता है ?
(A) समुद्र में
(B) काम-क्रोधहीन व्यक्ति में
(C) स्वर्ग में
(D) आकाश में
उत्तर
(B) काम-क्रोधहीन व्यक्ति में

5. गरू कृपा की महत्ता का वर्णन किस कवि ने किया है ?
(A) घनानंद
(B) रसखान
(C) गुरु नानक
(D) सुमित्रानंदन पंत
उत्तर
(C) गुरु नानक

6. गुरु नानक किस भक्ति धारा के कवि हैं ?
(A) सगुण भक्ति धारा
(B) निर्गुण भक्ति धारा
(C) सिख भक्ति धारा
(D) किसी भी धारा के नहीं
उत्तर
(B) निर्गुण भक्ति धारा

7. तलवंडी कहाँ था?
(A) अविभाजित बंगाल
(B) अविभाजित पाकिस्तान
(C) वर्मा
(D) भूटान
उत्तर
(B) अविभाजित पाकिस्तान

8. नानक के पिता का नाम क्या था?
(A) रविचंद
(B) कालूचंद खत्री
(C) गुरदीप
(D) गुरदास
उत्तर
(B) कालूचंद खत्री

9. तलवंडी को सम्पति या कहते हैं?
(A) स्वर्ण मंदिर
(B) देवकुंड साहिब
(C) नानकाना साहिब
(D) पटना साहिब
उत्तर
(C) नानकाना साहिब

10. गुरु नानक का जन्म कब हुआ था ?
(A) 1469
(B) 1569
(C) 1669
(D) 1769
उत्तर
(A) 1469

11. गुरुनानक का जन्मस्थान कहाँ था ?
(A) तलवंडी
(B) बनतली
(C) लरकाना
(D) चंडीगढ़
उत्तर
(A) तलवंडी

12. नानक की रचनाओं का संग्रह किसने किया ?
(A) गोविन्द सिंह
(B) नामदेव
(C) अर्जुनदेव
(D) मलूक साहब
उत्तर
(C) अर्जुनदेव

13. नानक साहब 1539 ई० में किस धाम पर गए?
(A) मुंगेराश्रम
(B) बद्रीकाश्रम
(C) केदाराश्रम
(D) वाह गुरु
उत्तर
(D) वाह गुरु

14, नानक देव जी को माता जी का क्या नाम था?
(A) अर्पिता
(B) मुंदरी
(C) दीप्ति
(D) तृप्ता
उत्तर
(D) तृप्ता

15. अर्जुनदेव ने नानक जी के संग का नाम क्या दिया ?
(A) ग्रंथ
(B) गुरुग्रंथ साहिब
(C) पुराण
(D) वेद
उत्तर
(B) गुरुग्रंथ साहिब

16. अर्जुनदेव सिखों के गुरु थे ?
(A) प्रथम ,
(B) द्वितीय
(C) पाँचवें
(D) छठे ,
उत्तर
(C) पाँचवें

17. अर्जुनदेव ने कब नानक की रचनाओं का संग्रह किया ?
(A) 1504
(B) 1604
(C) 1704
(D) 1804
उत्तर
(B) 1604

18. नानक कैसे कवि थे ?
(A) संत
(B) असंत
(C) अशांत
(D) अज्ञात
उत्तर
(A) संत

19. गुरु नानक किस युग के कवि थे ?
(A) प्रथम युग के
(B) पुरा युग के
(C) प्राच् युग के
(D) मध्यम युग के
उत्तर
(A) प्रथम युग के

20. जो सुख दुःख को समान मान नानक की नजर में वही क्या है ?
(A) दानव
(B) मानव
(C) खग
(D) निशाचर
उत्तर
(B) मानव

21. किससे मुक्ति मिलती है ?
(A) प्रसाद से
(B) हरि प्रसाद से
(C) हरि तप से
(D) यज्ञ से
उत्तर
(B) हरि प्रसाद से

22. किस रस को नानक घोलकर पी लिया है ?
(A) सोम रस
(B) शक्ति रस
(C) हरिरस
(D) पादप रस
उत्तर
(C) हरिरस

23. गुरुग्रंथ साहिब किस सम्प्रदाय का पवित्र ग्रंथ था ?
(A) हिन्दुओं का
(B) वौद्धों का
(C) जैनियों का
(D) सिक्खों का
उत्तर
(D) सिक्खों का

24. रामनाम के बिना वाणी कैसी हो जाती है ?
(A) अमृत
(B) सुधा
(C) विष
(D) पानी
उत्तर
(C) विष

25. 'रहिरास' किसकी रचना है
(A) गुरु गोविन्द सिंह
(B) गुरु नानक
(C) नानक
(D) घनानंद
उत्तर
(B) गुरु नानक


राम नाम बिन बिरथे जगि जनमा, जो नर दुख में दुख नहिं मानै- लेखक परिचय

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 ई० में पोरबंदर, गुजरात में हुआ था । उनके पिता का नाम करमचंद गाँधी और माता का नाम पुतलीबाई थां । उनकी प्रारंभिक शिक्षा पोरबंदर और उसके आस-पास हुई । 4 दिसंबर 1888 ई० में वे वकालत की पढ़ाई के लिए । यूनिवर्सिटी कॉलेज, लंदन यूनिवर्सिटी, लंदन गए । 1883 ई०में कम उम्र में ही उनका विवाह कस्तूरबा से हुआ जो स्वाधीनता संग्राम में उनके साथ कदम-से-कदम मिलाकर चलीं । गाँधीजी के जीवन में दक्षिण अफ्रीका (1893-1914 ई०) के प्रवास का ऐतिहासिक महत्त्व है । वहीं उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ अहिंसा का पहला प्रयोग किया ।

1915 ई० में गाँधीजी भारत लौट आए और स्वाधीनता संग्राम में कूद पड़े। आजादी की लड़ाई में उन्होंने. सत्य के प्रयोग किए । अहिंसा और सत्याग्रह उनका सबसे बड़ा हथियार था। उन्होंने स्वराज की माँग की, अछूतोद्धार का काम किया, सर्वोदय का कार्यक्रम चलाया, स्वदेशी का नारा दिया, समाज में व्याप्त ऊँच-नीच, जाति-धर्म के विभेदक भाव को मिटाने की कोशिश की और अंततः अंग्रेजों की गुलामी से भारत को आजादी दिलाई।


राम नाम बिन बिरथे जगि जनमा, जो नर दुख में दुख नहिं मानै का सारांश (Summary)

इस पाठ में सच्चे हृदय से राम नाम अर्थात् ईश्वर का जप करने की सलाह दी गई है तो बाह्य आडंबर, पूजा-पाठ और कर्म-काण्ड की कड़ी आलोचना की गई है। सुख-दुख में हमेशा एकसमान रहने की सलाह दी गई है।

राम नाम बिनु बिरथे जगि जनमा
राम नाम बिनु बिरथे जगि जनमा।
बिखु खावै बिखु बोलै बिनु नावै निहफलु मटि भ्रमना ।।
पुसतक पाठ व्याकरण बखाणै संधिया करम निकाल करै।
बिनु गुरुसबद मुकति कहा प्राणी राम नाम बिनु अरुझि मरै।।

अर्थ – गुरु नानक कहते हैं कि जो राम के नाम का स्मरण नहीं करता है, उसका संसार में आना और मानव शरीर पाना व्यर्थ चला जाता है। बिना कुछ बोले बिष का पान करता है तथा मयारूपी मृगतृष्णा में भटकता हुआ मर जाता है अर्थात् राम का गुणगान न करके मायाजाल में फँसा रहता है। शास्त्र-पुराण की चर्चा करता है, सुबह, शाम एवं दोपहर तीनों समय संध्या बंदना करता है। नानक लोगों से कहता है कि गुरु (भगवान) का भजन किए बिना व्यक्ति को संसार से मुक्ति नहीं मिल सकती तथा सांसारिक मायाजाल में उलझकर रह जाना पड़ता है।


डंड कमंडल सिखा सूत धोती तीरथ गबनु अति भ्रमनु करै।
राम नाम बिनु सांति न आवै जपि हरि-हरि नाम सु पारि परै।।
जटा मुकुट तन भसम लगाई वसन छोड़ि तन मगन भया।।
गुरु परसादि राखिले जन कोउ हरिरस नामक झोलि पीया।

अर्थ – ऐसे प्राणी बाहरी दिखावा के लिए डंडा, कमंडल, शिखा, जनेऊ तथा गेरुआ वस्त्र धारण कर तीर्थ यात्रा करते रहते हैं, लकिन राम नाम का भजन किए बिना जीवन में शांति नहीं मिलती है। भगवान का नाम ले लेकर पैर पुजाते हैं। वे अपने को संत कहलाने के लिए जटा को मुकुट बनाकर, शरीर में राख लगाकर, वस्त्रों को त्यागकर नग्न हो जाते हैं। संसार में जितने जीव-जन्तु हैं, उन जीवों में जन्म लेते रहते हैं। इसलिए लेखक कहते हैं कि भगवान की कृपा को ध्यान में रखकर नानक ने राम का घोल पी लिया, ताकि असार संसार से मुक्ति मिल जाए।


जो नर दुख में दुख नहीं मानै
जो नर दुख में दुख नहीं मानै।
सुख सनेह अरु भय नहिं जाके, कंचन माटी जानै।।
नहिं निंदा नहिं अस्तुति जाके, लोभ मोह अभिमाना।
हरष सोक तें रहै नियारो, नाहि मान अपमाना।।
आसा मनसा सकल त्यागि कै जग तें रहै निरासा।

अर्थ – गुरु नानक कहते हैं कि जो मनुष्य दुख को दुख नहीं मानता है, जिसे सुख-सुविधा के प्रति कोई आसक्ति नहीं है और न ही किसी प्रकार का भय है, जो सोना को मिट्टी जैसा मानता है। जो किसी की निंदा से न तो घबड़ाता है और न ही प्रशंसा सुनकर गौरवान्वित होता है। जो लाभ, मोह एवं अभिमान से परे है। जो हर्ष एवं विषाद दोनों में एक-सा रहता है, जिसके लिए मान-अपमान दोनों बराबर हैं। जो आशा-तृष्णा से मुक्त होकर सांसारिक विषय-वासनाओं से अनासक्त रहता है।


काम क्रोध जेहि परसे नाहिन तेहि घट ब्रह्म निवासा।।
गुरु कृपा जेहि नर पै कीन्हीं तिन्ह यह जुगति पिछानी।
नानक लीन भयो गोबिन्द सो ज्यों पानी संग पानी।।

अर्थ – जिसने काम-क्रोध को वश में कर लिया है, वैसे मनुष्य के हृदय में ब्रह्म का निवास होता है। अर्थात् जो मनुष्य राग-द्वेष, मान-अपमान, सुख-दुख, निंदा-स्तुति हर स्थिति में एक समान रहता है, वैसे मनुष्य के हृदय में ब्रह्म निवास करते हैं।
गुरु नानक का कहना है कि जिस मनुष्य पर ईश्वर की कृपा होती है, वह सांसारिक विषय-वासनाओं से स्वतः मुक्ति पा जाता है। इसीलिए नानक ईश्वर के चिंतन में लीन होकर उस प्रभु के साथ एकाकार हो गये। यानी आत्मा परमात्मा से मिल गई, जैसे पानी के साथ पानी मिलकर एकाकार हो जाता है।

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