Chapter 5 उपभोक्ता अधिकार Question Answer Class 10 अर्थशास्त्र Hindi Medium

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Chapter 5 उपभोक्ता अधिकार Question Answer Class 10 अर्थशास्त्र Hindi Medium

उपभोक्ता अधिकार Important Questions

अत्ति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. उपभोक्ता जागरूकता से आप क्या समझते हैं?

उत्तर

उपभोक्ता को उसके अधिकारों एवं कर्तव्यों से अवगत कराना ही उपभोक्ता जागरूकता है।


प्रश्न 2. उपभोक्ता के शोषण का कोई एक उदाहरण दीजिए।

उत्तर

उपभोक्ता को मिलावटी वस्तु देना।


प्रश्न 5. सूचना का अधिकार से क्या तात्पर्य है?

उत्तर

सूचना का अधिकार वह कानून है जिसके तहत देश के नागरिकों को सरकारों के निर्णयों व कार्यकलापों की सूचना पाने का अधिकार है।


प्रश्न 6. उपभोक्ता संरक्षण से आप क्या समझते हैं?

उत्तर

उपभोक्ता को उत्पादक, विक्रेता तथा दुकानदार के शोषण से बचाना ही उपभोक्ता संरक्षण है।


प्रश्न 7. उपभोक्ता जागरूकता से आप क्या समझते हैं?

उत्तर

उपभोक्ता को उसके अधिकारों एवं कर्तव्यों से अवगत कराना ही उपभोक्ता जागरूकता है।


प्रश्न 8. किस अधिकार के तहत हम उपभोक्ता अदालत में अपनी हानि हेतु दावा कर सकते हैं?

उत्तर

क्षतिपूर्ति निवारण के अधिकार से हम उपभोक्ता अदालत में दावा करते हैं।


प्रश्न 9. किसी वस्तु की निर्माण एवं समाप्ति की तिथि जानना किस अधिकार के अन्तर्गत आता है?

उत्तर

किसी वस्तु की निर्माण एवं समाप्ति की तिथि जानना सूचना पाने के अधिकार के तहत आता है।


प्रश्न 10.  उपभोक्ता के कोई दो अधिकारों का नाम बताइए।

उत्तर

  • सूचना पाने का अधिकार 
  • सुरक्षा का अधिकार। 


प्रश्न 11. उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम, 1986 का दूसरा नाम क्या है?

उत्तर

उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम, 1986 का दूसरा नाम COPRA है।


प्रश्न 12. RTI का पूरा नाम लिखिए।

उत्तर

राइट टू इनफॉरमेशन।


प्रश्न 13. भारत में उपभोक्ता दिवस कब मनाया जाता है

उत्तर

भारत में उपभोक्ता दिवस 24 दिसम्बर को मनाया जाता है।


प्रश्न 14. भारत में उपभोक्ता को जागरूक बनाने हेतु चलाए जा रहे एक कार्यक्रम का नाम बताइये।

उत्तर

जागो ग्राहक जागो।


लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम के तहत स्थापित त्रिस्तरीय न्यायिक तन्त्र को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

उपभोक्ता सरक्षा अधिनियम के तहत उपभोक्ता विवादों के निपटारे के लिए जिला. राज्य और राष्ट्रीय स्तरों पर एक त्रिस्तरीय न्यायिक तन्त्र स्थापित किया गया है। जिला स्तर का न्यायालय 20 लाख तक के दावों से सम्बन्धित मुकदमों पर विचार करता है, राज्य स्तरीय अदालत 20 लाख से 1 करोड़ रुपये तक के मुकदमे देखती है तथा राष्ट्रीय स्तर की अदालत 1 करोड़ से ऊपर के मुकदमे देखती है। यदि कोई मुकदमा जिला स्तर से खारिज कर दिया जाता है तो उसकी अपील राज्य स्तर तथा उसके पश्चात् राष्ट्रीय स्तर पर अपील की जा सकती है।


प्रश्न 2. सूचना के अधिकार (RTI) से आप क्या समझते है ?

उत्तर

सन 2005 के अक्टूबर में भारत सरकार में एक कानून लागु किया जी RTI या सूचना पाने का अधिकार के नाम से जाना जाता है | यह अधिकार नागरिकों को सरकारी विभागों के कार्यकलापों की सभी सूचनाएँ पाने का अधिकार सुनिश्चित करता है |


प्रश्न 3. प्रतिनिधित्व के अधिकार को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

एक उपभोक्ता के पास उत्पादकों एवं विक्रेताओं द्वारा शोषित अथवा ठगे जाने के मामले में अपने पक्ष में दावा स्वीकार कराने का अधिकार होता है। सरकार ने इस विशेष उद्देश्य के लिए अनेक उपभोक्ता अदालतें स्थापित की हैं।


प्रश्न 4. भारत में उपभोक्ताओं को सशक्त बनाने के लिए सरकार द्वारा कौन से कानूनी उपाय किए गए?

उत्तर

भारत में उपभोक्ताओं को मजबूत करने के लिए सरकार द्वारा निम्नलिखित कानूनी उपाय किए गए:

  • उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, जिसे लोकप्रिय रूप से कोपरा के नाम से जाना जाता है, 1986 में अधिनियमित किया गया था। इसे 1991 और 1993 में संशोधित किया गया था।
  • अक्टूबर 2005 में सूचना का अधिकार अधिनियम बनाया गया था। यह नागरिकों को सरकारी विभागों के कार्यों के बारे में सभी जानकारी प्राप्त करने में सक्षम बनाता है। नागरिकों को उनके द्वारा खरीदी गई वस्तुओं और सेवाओं का विवरण जानने का अधिकार है।


प्रश्न 5. भारत सरकार ने उपभोक्ताओं को सुरक्षा प्रदान करने के लिए कौन-कौन से कदम उठाई है ?

उत्तर

  • क़ानूनी कदम : उपभोक्ता सुरक्षा अधिनयम 1986 (COPRA) लाया गया है |
  • प्रशासनिक कदम : उपभोक्ताओं के शिकायत पर तुरंत कारवाई करना और उपभोक्ता न्यायालयों का गठन साथ-ही साथ उपभोक्ताओं के लिए अलग से मंत्रालय भी बनाया गया है|
  • तकनीकी कदम : भारत सरकार उपभक्ताओं को जागरूक करने के लिए विभिन माध्यम और तकनीकों द्वारा भिन्न-भिन्न कदम उठाती रहती है |


प्रश्न 6. ऐसे कुछ तरीके बताइए जिनसे दुकानदारों द्वारा उपभोक्ताओं को वस्तु खरीदते समय शोषण किया जाता है |

उत्तर

  1. घाटियां किस्म की वस्तुएँ देना |
  2. कम मापना या तौलना आदि |
  3. अधिकतम खुदरा मूल्य से भी अधिक मूल्य वसूलना |
  4. नकली वस्तुएँ देना |
  5. मिलावटी/दोषपूर्ण वस्तु देना |
  6. जमाखोरी
  7. झूठी या अधूरी सूचना देना |
  8. उपभोक्ताओं के साथ बुरा व्यवहार करना |


प्रश्न 7. उपभोक्ताओं के कोई चार अधिकार बताओ?

उत्तर

उपभोक्ताओं के चार निम्नलिखित अधिकार हैं:

  • सुरक्षा का अधिकार
  • सूचना पाने का अधिकार
  • चुनने का अधिकार
  • सुनवाई का अधिकार


प्रश्न 8. उपभोक्ता किस माध्यम से अपनी एकजुटता व्यक्त कर सकते हैं?

उत्तर

उपभोक्ता जागरूकता संगठन बनाकर उपभोक्ता अपनी एकजुटता व्यक्त कर सकते हैं जिसे सरकार द्वारा गठित विभिन्न समितियों में प्रतिनिधित्व मिल सकता है। सभी उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए उपभोक्ता की सक्रिय भागीदारी होनी चाहिए।


प्रश्न 9. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 के अधिनियमन के पीछे क्या तर्क है?

उत्तर

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 (कोपरा) के अधिनियमन के पीछे तर्क उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना था क्योंकि शिकायत दर्ज करने के लिए कोई कानूनी औपचारिकता नहीं है। एक उपभोक्ता को कानूनी सहायता के लिए वकील या पेशेवर नियुक्त करने की आवश्यकता नहीं है। वह खुद उपभोक्ता अदालत में मामले की पैरवी कर सकता है। कोई व्यक्ति गारंटी या वारंटी कार्ड, कैश मेमो आदि जैसे सहायक दस्तावेजों के साथ सादे कागज पर उपभोक्ता अदालत में शिकायत कर सकता है।


प्रश्न 10.  सूचना पाने का अधिकार क्या है? इसके कोई दो लाभ समझाइए। 

उत्तर

उपभोक्ता का सूचना पाने का अधिकार सबसे महत्त्वपूर्ण अधिकार है। सूचना पाने के अधिकार के तहत उपभोक्ता जिन वस्तुओं एवं सेवाओं को खरीदता है उसके बारे में उसे सभी जानकारियाँ पाने का अधिकार है। वर्ष 2005 के अक्टूबर में भारत सरकार ने एक कानून लागू किया, जो सूचना पाने का अधिकार (RTI) के नाम से जाना जाता है। 

सूचना पाने के अधिकार के लाभ:

  • इससे उपभोक्ता वस्तु या सेवा के बारे में सभी जानकारी प्राप्त कर सकता है तथा कोई खराबी होने पर शिकायत कर सकता है व मुआवजे पाने या वस्तु बदलने की माँग कर सकता है। 
  • सूचना पाने के अधिकार का उपभोक्ता संरक्षण में महत्त्वपूर्ण योगदान है, इससे उपभोक्ता को शोषण से बचाने में मदद मिलती है। 


प्रश्न 11. उपभोक्ताओं के शोषण के लिए उत्तरदायी कारकों की व्याख्या कीजिए |

उत्तर

(i) दुकानदारों द्वारा सिमित सूचना देना |
(ii) निम्न साक्षरता का होना |
(iii) सिमित पूर्ति
(iv) सिमित प्रतियोगिता
(v) उपभोक्ताओं में जागरूकता का आभाव


प्रश्न 12. उपभोक्ता को उत्पादकों एवं विक्रेताओं के शोषण से बचाने हेतु कोई दो उपाय बताइए। 

उत्तर

  • उपभोक्ता को उसके अधिकारों के सम्बन्ध में जानकारी प्रदान करनी चाहिए ताकि वह अपने संरक्षण में इनका उपयोग कर सके। 
  • उपभोक्ता को संरक्षण सम्बन्धी सभी अधिनियमों एवं प्रक्रिया के सम्बन्ध में जानकारी देनी चाहिए। 


प्रश्न 13. उपभोक्ता के कोई दो प्रमुख अधिकारों को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

  • चुनने का अधिकार: किसी भी उपभोक्ता को, जो कि किसी सेवा को प्राप्त करता है, चाहे वह किसी भी आयु या लिंग का हो और किसी भी तरह की सेवा प्राप्त करता हो, उसको सेवा प्राप्त करते हुए हमेशा चुनने का अधिकार है। वह उपलब्ध विकल्पों में से वस्तु अथवा सेवा का चयन करने हेतु स्वतन्त्र है।
  • क्षतिपूर्ति निवारण का अधिकार: उपभोक्ताओं को अनुचित सौदेबाजी और शोषण के विरुद्ध क्षतिपूर्ति निवारण का अधिकार है। यदि एक उपभोक्ता को कोई क्षति पहुँचाई जाती है तो क्षति के आधार पर उसे क्षतिपूर्ति पाने का अधिकार होता है। इस हेतु उपभोक्ता अदालतों की स्थापना की गई है।


प्रश्न 14. कोपरा क्या है ? यह कैसे उपभोक्ताओं की मदद करता है ?

उत्तर

कोपरा (COPRA) का पूरा नाम उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम 1986 है, जो विभिन्न प्रकार से उपभोक्ताओं के शोषण से सुरक्षा प्रदान करता है |

  1. दुकानदारों की मनचाही कीमत वसूलने, घटिया वस्तु देने कम तोलने, मिलावट को रोकने तथा नकली वस्तुओं से उपभोक्ताओं को बचाने के लिए यह अधिनियम बनाया गया है |
  2. इस कानून के अंतर्गत कोई भी ठगी का शिकार उपभोक्ता, उपभोक्ता न्यायालय में आवेदन देकर न्याय प्राप्त कर सकता है |
  3. यह अधिनयम व्यावसायिक कंपनियों और सरकार पर दबाव डालने में सफल हुआ है |



दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. बाजार में उपभोक्ताओं के शोषण हेतु जिम्मेदार कारकों को स्पष्ट करते हुए बताइए कि उन्हें इस शोषण से कैसे बचाया जा सकता है? 

उत्तर

उपभोक्ता के शोषण हेतु जिम्मेदार कारक:

  • उपभोक्ताओं की अज्ञानता, अशिक्षा, अल्प जानकारी तथा लापरवाही उपभोक्ताओं के शोषण का सबसे महत्त्वपूर्ण कारक है। 
  • अधिकांश उपभोक्ताओं को आज भी अनेक अधिकारों एवं अधिनियमों की जानकारी नहीं है जिस कारण उनका शोषण होता है। 
  • उपभोक्ता अपने अधिकारों से अवगत नहीं हैं जिस कारण उनका शोषण होता है। 
  • उपभोक्ता संरक्षण से सम्बन्धित नियम एवं विनियमों का भी सही क्रियान्वयन नहीं किया जाता है तथा प्रायः इनकी प्रक्रिया लम्बी होती है अतः उपभोक्ता अपील करने में रुचि नहीं रखते हैं। 
  • निर्धन एवं ग्रामीण उपभोक्ता अदालती कार्यवाही से घबराते हैं अतः वे अपील नहीं करते हैं। 

उपभोक्ताओं को शोषण से बचाने हेतु उपाय:

  • उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों के बारे में जानकारी देनी चाहिए। 
  • उपभोक्ता संगठनों द्वारा लोगों को अधिक जागरूक बनाया जाना चाहिए। 
  • उपभोक्ताओं को उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम तथा अन्य अधिनियमों की जानकारी दी जानी चाहिए। 
  • उपभोक्ता को विज्ञापनों के माध्यम से उपभोक्ता अदालतों एवं शिकायत करने की प्रक्रिया से अवगत करवाना चाहिए। 
  • उपभोक्ता अधिनियमों का सही क्रियान्वयन किया जाना चाहिए।


प्रश्न 2. बाज़ार में नियमों और विनियमों की आवश्यकता क्यों है? कुछ उदाहरण देकर समझाइए।

उत्तर

बाजार में निम्नलिखित कारणों से नियमों और विनियमों की आवश्यकता होती है:

  • दुकानदारों और व्यापारियों द्वारा उपभोक्ताओं का विभिन्न तरीकों से शोषण किया जाता है जैसे कम वजन या माप, अधिक कीमत, मिलावटी और दोषपूर्ण सामान।
  • किसी वस्तु या सेवा के संबंध में शिकायत की स्थिति में दुकानदार या व्यापारी किसी भी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करता है। विक्रेता सभी जिम्मेदारी खरीदार पर स्थानांतरित करने का प्रयास करता है जैसे कि बिक्री पूरी होने के बाद विक्रेता की कोई जिम्मेदारी नहीं है।
  • कभी-कभी उत्पादक कम और शक्तिशाली होते हैं जबकि उपभोक्ता कम मात्रा में खरीदारी करते हैं और बिखर जाते हैं। बड़ी दौलत वाली बड़ी कंपनियां कई तरह से बाजार में हेरफेर करती हैं।
  • कई बार उपभोक्ताओं को आकर्षित करने के लिए मीडिया और अन्य स्रोतों के माध्यम से झूठी सूचना प्रसारित की जाती है। उदाहरण के लिए, एक कंपनी ने वर्षों तक दुनिया भर में शिशुओं के लिए पाउडर दूध को सबसे वैज्ञानिक उत्पाद के रूप में बेचा और दावा किया कि यह मां के दूध से बेहतर है। कंपनी को यह स्वीकार करने के लिए मजबूर होने में वर्षों का संघर्ष लगा कि वह झूठे दावे कर रही है। इसी तरह सिगरेट बनाने वाली कंपनियों के साथ यह स्वीकार करने के लिए एक लंबी लड़ाई लड़ी गई कि उनके उत्पाद से कैंसर हो सकता है। इसलिए उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमों और विनियमों की आवश्यकता है।


प्रश्न 3. "सूचना पाने का अधिकार एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण अधिकार है।" इस कथन को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

उपभोक्ता को अनेक अधिकार दिए गए हैं जिनमें से सूचना पाने का अधिकार सबसे महत्त्वपूर्ण अधिकार है। जब हम कोई वस्तु खरीदते हैं तो उस वस्तु के डिब्बे पर हमें कई प्रकार की जानकारियाँ दी होती हैं, जैसे-कम्पनी का नाम व पता, अधिकतम खुदरा मूल्यं, उत्पादन की तिथि, समाप्ति की तिथि, वस्तु की कीमत, बैच संख्या, वस्तु के अवयव आदि। यह सब उस डिब्बे पर इसलिए लिखा होता है क्योंकि हमें सूचना पाने का अधिकार होता है। सूचना पाने के अधिकार के तहत उपभोक्ता जिन वस्तुओं और सेवाओं को खरीदता है उसके बारे में उसे सूचना पाने का अधिकार है। तब उपभोक्ता वस्तु की किसी भी प्रकार की खराबी होने पर शिकायत कर सकता है तथा मुआवजा पाने या वस्तु बदलने की माँग कर सकता है। उदाहरण के लिए यदि कोई व्यक्ति अपनी वस्तु को अधिकतम खुदरा मूल्य से अधिक कीमत पर बेच रहा है अथवा यदि कोई व्यक्ति अंतिम तिथि समाप्त होने के पश्चात् भी दवाई बेचता है तो उसके खिलाफ कार्यवाही की जा सकती है।

वर्तमान में सरकार द्वारा प्रदत्त विविध सेवाओं को उपयोगी बनाने के लिए सूचना पाने के अधिकार को बढ़ा दिया गया है। सन् 2005 में भारत सरकार ने एक कानून लागू किया जो RTI (राइट टू इनफॉरमेशन) या सूचना पाने के अधिकार के नाम से जाना जाता है। इसके अन्तर्गत हम अपने हित से सम्बन्धित कोई भी सूचना प्राप्त कर सकते हैं। सूचना पाने के अधिकार का उपभोक्ता संरक्षण में महत्त्वपूर्ण योगदान है, इससे उपभोक्ता को शोषण से बचाने में मदद मिलती है।


प्रश्न 4. भारत में उपभोक्ता आंदोलन को किन कारकों ने जन्म दिया? इसके विकास का पता लगाएं?

उत्तर

  • भारत में उपभोक्ता आंदोलन को जन्म देने वाले कारक कई गुना हैं। यह अनुचित और अनैतिक व्यापार प्रथाओं के खिलाफ उपभोक्ता हितों की रक्षा और बढ़ावा देने की आवश्यकता के साथ एक “सामाजिक शक्ति” के रूप में शुरू हुआ। 1960 के दशक में अत्यधिक भोजन की कमी, जमाखोरी, कालाबाजारी और भोजन में मिलावट के कारण उपभोक्ता आंदोलन एक संगठित क्षेत्र बन गया। 1970 के दशक तक, उपभोक्ता संगठन ज्यादातर लेख लिखने और प्रदर्शनियों के आयोजन में व्यस्त थे।
  • हाल ही में, उपभोक्ता समूहों की संख्या में वृद्धि हुई है, जिन्होंने राशन की दुकान में गड़बड़ी और सार्वजनिक परिवहन वाहनों की भीड़भाड़ के प्रति चिंता दिखाई है। 1986 में, भारत सरकार ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, जिसे कोपरा के नाम से भी जाना जाता है, अधिनियमित किया। यह भारत में उपभोक्ता आंदोलन में एक बड़ा कदम था।
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