Extra Questions for Class 9 संचयन Chapter 1 गिल्लू - महादेवी वर्मा Hindi

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Extra Questions for Class 9 संचयन Chapter 1 गिल्लू - महादेवी वर्मा Hindi

Chapter 1 गिल्लू Sanchayan Extra Questions for Class 9 Hindi

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. गिल्लू के जीवन के अंतिम समय का वर्णन कीजिए।

उत्तर

गिल्लू के जीवन की अवधि दो वर्ष से अधिक नहीं होती। गिल्लू का भी अंत समय आ गया था। उस दिन उसने कुछ नहीं खाया और न ही वह बाहर गया। रात्रि के समय अंत की यातना में भी वह अपने झूले से उतरकर लेखिका के बिस्तर पर आया और अपने पंजों से उसकी उँगली पकड़कर हाथ से चिपक गया । तब वह मरणासन्न स्थिति में था। उसके पंजे ठंडे हो रहे थे। उसे गरमी देने की कोशिश की गई, पर प्रभात की प्रथम किरण के साथ ही उसने प्राण त्याग दिए। इसे हम एक सामान्य रूप में ही लेते हैं। जीवन का अंत सभी के लिए दुखदायी होता है।


प्रश्न 2. ‘पितर पक्ष में हमसे कुछ पाने के लिए काक बनकर अवतीर्ण होना पड़ता है।’ अपने विचार लिखिए।

उत्तर

हिन्दू धर्म की मान्यताओं व परम्पराओं के अनुसार क्वार के महीने में श्राद्ध पक्ष में अपने पूर्वजों व पितरों को भोजन खिलाने के प्रथा है। इस प्रथा के तहत ब्राह्मणों को भोजन खिलाया जाता है। परन्तु पहले कौओं को भोजन कराया जाता है, कौए के भोजन खाने से पितरों की आत्मा तृप्त मानी जाती है। इसलिए पितरों को कुछ पाने के लिए काक बनकर आना पड़ता है।

 

प्रश्न 3. 'गिल्लू' पाठ का प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

‘गिल्लू' एक संस्मरणात्मक गद्य रचना है, जो महादेवी वर्मा द्वारा रचित 'मेरा परिवार' से ली गई है। इस रचना के माध्यम से पशु-पक्षियों के प्रति प्रेम, उनके संरक्षण की भावना उत्पन्न करने के साथ-साथ उनकी गतिविधियों का सूक्ष्म अवलोकन व उनसे सद्व्यवहार करने की प्रेरणा मिलती है। लेखिका के इस संस्मरण से पशु-पक्षियों को स्वच्छन्द और मुक्त रख उनके स्वाभाविक विकास की भावना को भी प्रोत्साहन मिलता है।

 

प्रश्न 4. गिल्लू की किन चेष्टाओं से आभास मिलने लगा कि अब उसको समय समीप है?

उत्तर

सामान्यतः गिलहरी का जीवनकाल दो वर्ष का माना जाता है। जब गिल्लू की जीवन यात्रा का अंत आया तो उसने दिनभर कुछ भी नहीं खाया और वह बाहर भी घूमने नहीं गया। वह अपने झूले से नीचे उतरा और लेखिका के बिस्तर पर आकर उसकी उँगली पकड़कर चिपक गया। इन सभी चेष्टाओं से लेखिका को लगा कि उसका (गिल्लू का) अंत समीप है और सुबह की पहली किरण के साथ ही वह हमेशा के लिए सो गया।

 

प्रश्न 5. गिल्लू लेखिका को किस प्रकार चौंकाता था ?

उत्तर

लेखिका के बाहर जाने पर गिल्लू भी खिड़की की खुली जाली की राह से बाहर चला जाता और दिन भर गिलहरियों के झुंड का नेता बनकर हर डाल पर उछलता कूदता रहता और चार बजे वह खिड़की के भीतर आकर अपने झूले में झूलने लगता। लेखिका को चौंकाने की इच्छा उसमें न जाने कब और कैसे उत्पन्न हो गई थी। कभी वह फूलदान के फूलों में छिप जाता, कभी परदे की चुन्नट में और कभी सोन जूही की पत्तियों में।


प्रश्न 6. ‘गिल्लू’ पाठ के आधार पर बताइए कि कौए को एक साथ समादरित और अनादरित प्राणी क्यों कहा गया है?

उत्तर

कौए को समादरित और अनादरित प्राणी इसलिए कहा गया है, क्योंकि यह एक विचित्र प्राणी है। कभी इसका आदर किया जाता है, तो कभी इसका निरादर किया जाता है। श्राद्ध पक्ष में लोग कौए को आदर सहित बुलाते हैं। पितृपक्ष में हमसे कुछ पाने के लिए हमारे पूर्वजों को कौआ बनकर ही प्रकट होना पड़ता है-ऐसी मान्यता है। यह अतिथि के आने का भी संदेश देता है। इन बातों के कारण यह समादरित है लेकिन यही कौआ जब अपनी कर्कश आवाज में काँव-काँव करता है एवं गंदगी ख़ाता है, तो यह अनादरित हो जाता है।

 

प्रश्न 7. लेखिका महादेवी वर्मा गिल्लू को अत्यधिक स्नेह करने के बावजूद लिफाफे में बंद क्यों कर देती थी?

उत्तर

गिल्लू का महादेवी वर्मा से बहुत लगाव था वह लेखिका को ध्यान आकर्षित करने के लिए तरह-तरह की शरारते तब तक किया करता जब तक लेखिका उसे पकड़ने के लिए न उठती। इसलिए कभी-कभी लेखिका गिल्लू की शरारतों से परेशान हो उसे एक लम्बे लिफाफे में इस तरह रख देतीं कि सिर के अतिरिक्त उसका शेष शरीर लिफाफे के अंदर रहे। गिल्लू इसी स्थिति में मेज पर दीवार के सहारे घंटो खड़ा रहकर लेखिका के कार्यो को देखता। काजू या बिस्कुट देने पर उसी स्थिति में लिफाफे के बाहर वाले पंजो से पकड़कर उन्हे कुतर-कुतर कर खाता।


प्रश्न 8. “घायलों की सहायता के लिए धैर्य की आवश्यकता होती है”-गिल्लू के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए कि किसी घायल के प्रति आपके व्यवहार में क्या विशेषता होगी।

उत्तर

लेखिका को गिल्लू निश्चेष्ट अवस्था में गमले की संधि में मिला था। उसके शरीर पर कौओं की चोंच के जख्म थे। लेखिका ने उसे उठाया और धैर्यपूर्वक उसके घावों को साफ किया और मरहम लगाया। उन्होंने रूई की बत्ती बनाकर उसे दूध भी पिलाने की कोशिश की, उन्होंने बड़े धैर्य के साथ के साथ रात-दिन उसकी सेवा की। उनकी इसी धैर्य पूर्ण सेवा के कारण गिल्लू एकदम स्वस्थ हो गया।


निबंधात्मक प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. अस्वस्थ लेखिका को ध्यान गिल्लू किस तरह रखता? इस कार्य से गिल्लू की कौन सी विशेषता का पता चलता हैं?

उत्तर

लेखिका को एक मोटर दुर्घटना में आहत होकर कुछ दिन अस्पताल में रहना पड़ा था। लेखिका की अनुपस्थिति में गिल्लू का किसी काम में भी मन नहीं लगता था। यहाँ तक कि उसने अपना मनपसंद भोजन काजू खाना भी कम कर दिया था। वह हमेशा लेखिका का इंतजार करता रहता और किसी के भी आने की आहट सुनकर लेखिका के अस्पताल से लौट आने की उसकी उम्मीदें बढ़ जातीं। लेखिका के घर वापस आने के बाद गिल्लू तकिए पर सिरहाने बैठकर अपने नन्हें-नन्हें पंजों से लेखिका का सिर एवं बाल धीरे-धीरे सहलाता रहता था। लेखिका को उसकी उपस्थिति एक परिचारिका की उपस्थिति महसूस होती। इन्हीं कारणों से लेखिका ने गिल्लू के लिए परिचारिका शब्द का प्रयोग किया है।


प्रश्न 2. 'पशु भी मानव की तरह अपना स्नेह व्यक्त करते हैं।' - पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

मानव की तरह पशु भी अपने स्नेह का इजहार करते हैं, उनका तरीका अलग हो सकता है। गिल्लू भी महादेवी की तरह अपने प्रेम को व्यक्त करता है।

  • लेखिका की थाली में खाने की हिम्मत जुटाना।
  • लेखिका की बीमारी के दुख में गिल्लू ने अपना प्रिय खाद्य काजू बहुत कम खाया।
  • अस्वस्थता में लेखिका के सिर व बालों को सहलाना।


प्रश्न 3. ‘मनुष्य का प्रेम संसार पशु-पक्षियों तक भी फैला हुआ है। ' - इस कथन के परिप्रेक्ष्य में महादेवी के पशु-पक्षी प्रेम पर टिप्पणी कीजिए।

उत्तर

मनुष्य का हृदय विशाल होता है। वह संवेदनशील प्राणी है। इसी संवेदनशीलता के कारण ही वह मानव से इतर प्राणियों से भी भावात्मक लगाव रखता है। पशु-पक्षियों के साथ मनुष्य का लगाव सृष्टि के प्रारंभ से है। महादेवी वर्मा का पशु प्रेम भी उसी कड़ी का हिस्सा है। उसके घर में मोर, गाय, गिलहरी आदि अनेक प्राणी रहते हैं। उन्होंने पशुओं के संबंध में संस्मरण भी लिखे हैं, जिनमें 'गिल्लू' नामक गिलहरी का संस्मरण अद्भुत है। आम व्यक्ति गिलहरी से दूर रहते हैं, परंतु महादेवी ने घायल गिलहरी का उपचार किया, उसे दूध पिलाया तथा आजीवन अपने पास रखा। महादेवी उससे बेहद स्नेह करती थीं। उसे थाली के पास बैठकर भोजन करना सिखाया। उसकी भावनाओं को समझकर उसे बाहर जाने के लिए मुक्त किया। जब उसका अंत समय आया तो उसे बचाने का भरसक प्रयास किया। देहांत के बाद उसकी समाधि बनाई। इन सब कार्यों से पता चलता है कि मनुष्य पशुओं को भी अपने प्रेम का हिस्सा बनाता है।


प्रश्न 4. गिल्लू लेखिका से बहुत प्रेम करता था। स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

गिल्लू वास्तव में एक अत्यधिक संवेदनशील प्राणी था और उसे महादेवी से गहरा लगाव था। पाठ के अंतर्गत इसके कई प्रमाण विद्यमान हैं।

  1. जब भी लेखिका अपना कमरा खोलकर अंदर घुसती थीं, तो गिल्लू उनके शरीर पर ऊपर से नीचे झूलने लगता था, लेकिन यदि कोई अन्य व्यक्ति अंदर आता तो वह ऐसा नहीं करता था।
  2. गर्मियों के दिनों में वह लेखिका के पास रहने के लालच में उनके पास रखी सुराही के साथ चिपका रहता था।
  3. गिल्लू ने लेखिका के अस्वस्थ रहने के दौरान एक परिचारिका की तरह उपचार में अपनी ओर से यथासंभव भूमिका निभाई।
  4. लेखिका की अस्वस्थ स्थिति में अस्पताल में रहने के दौरान गिल्लू ने अपना मनपसंद भोजन काजू खाना कम कर दिया।
  5. अपने अंतिम समय में गिल्लू ने लेखिका की उंगली पकड़ ली।
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