Extra Questions for Class 9 स्पर्श Chapter 3 एवरेस्ट: मेरी शिखर यात्रा - बचेंद्री पाल Hindi

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Extra Questions for Class 9 स्पर्श Chapter 3 एवरेस्ट: मेरी शिखर यात्रा - बचेंद्री पाल Hindi

Chapter 3 एवरेस्ट : मेरी शिखर यात्रा Sparsh Extra Questions for Class 9 Hindi

 अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1: नमचे बाजार कहाँ का महत्त्वपूर्ण नगरीय क्षेत्र है? इसके आसपास क्या है?

उत्तर

नमचे बाजार शेरपालैंड का एक सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण क्षेत्र है। इसके आसपास शेरपा लोगों के गाँव हैं।


प्रश्न 2: फूल (प्लूम) बनने का क्या कारण था?

उत्तर

प्लूम पर्वत शिखर की ऊपरी सतह के आसपास 150 किलोमीटर या इससे भी अधिक गति से हवा चलने के कारण बनता था।


प्रश्न 3: लेखिका क्यों डर गई ?

उत्तर

लेखिका पर्वत शिखर पर 150 किलोमीटर या इससे भी अधिक की रफ़्तार से बहती बर्फीली आँधी तथा तूफ़ानों को देखकर अत्यंत डर गईं थी।


प्रश्न 4: एवरेस्ट अभियान कब और कहाँ से कहाँ तक के लिए चला?

उत्तर

एवरेस्ट अभियान 7 मार्च को दिल्ली से काठमांडू के लिए चला।


प्रश्न 5: एवरेस्ट की यात्रा पर गए यात्रियों को सबसे अधिक कष्ट कव तथा कहाँ झेलना पड़ता था ?

उत्तर

एवरेस्ट की यात्रा पर गए यात्रियों को सबसे अधिक कष्ट मौसम खराब होने पर दक्षिण-पूर्वी पहाड़ी पर तूफानों के रूप में झेलना पड़ता था।


प्रश्न 6: अग्रिम दल का नेतृत्व कौन कर रहे थे? वे कव तथा कहाँ वापस आए ?

उत्तर

अग्रिम दल का नेतृत्व प्रेमचंद कर रहे थे, वे 26 मार्च को पैरिच वापस आ गए।


प्रश्न 7: 'अनियमित' में प्रयुक्त उपसर्ग तथा प्रत्यय का नाम बताइए ।

उत्तर

'अनियमित' शब्द में 'इत' प्रत्यय तथा 'अ' उपसर्ग लगा हुआ है।


प्रश्न 8: तीसरे दिन यात्रियों का क्या कार्यक्रम था ?

उत्तर

यात्रा दल के लिए तीसरा दिन हिमपात से कैंप तक सामान ढोकर चढ़ाई का अभ्यास करने के लिए निश्चित था।


प्रश्न 9: लेखिका का कैंप तहस-नहस कैसे हो गया?

उत्तर

एक लंबे बर्फ के पिंड ने लहोत्से ग्लेशियर से टूटकर ढलान से नीचे आते हुए लेखिका के कैंप को तहस-नहस कर दिया ।


प्रश्न 10: लेखिका के यात्रा दल के नेता कौन थे ?

उत्तर

लेखिका के एवरेस्ट अभियान दल के नेता थे कर्नल खुल्लर |


प्रश्न 11: लेखिका के अगले दिन की महत्त्वपूर्ण चढ़ाई दल के सह सदस्य कौन थे ?

उत्तर

लेखिका के साथ अगले दिन की महत्त्वपूर्ण चढ़ाई दल के सह सदस्य थे- की, जय तथा मीनू।


प्रश्न 12: की, जय और मीनू कैंप तक देर से क्यों पहुँचे ?

उत्तर

क्योंकि वे भारी बोझ लेकर एवं बिना ऑक्सीजन के यात्रा कर रहे थे।


प्रश्न 13: नमचे वाजार का वर्णन कीजिए।

उत्तर

नमचे बाजार शेरपालैंड का एक सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण नगरीय क्षेत्र है। यह बाजार नेपालियों के मध्य सागरमाथा के नाम से प्रसिद्ध है। अधिकांश शेरपा इसी के आसपास रहते हैं।


प्रश्न 14: 'की' क्यों हक्का-बक्का रह गया?

उत्तर

'की' लेखिका को बिना कोई सावधानी लिए कैंप क्षेत्र के बाहर देखकर हक्का-बक्का रह गया।


प्रश्न 15: जय लेखिका से कहाँ मिला?

उत्तर

जय लेखिका से जेनेवा स्पर की चोटी के ठीक नीचे मिला।


प्रश्न 16: हिमपुंज कैसे बनता है ?

उत्तर

हिमपुंज का निर्माण ग्लेशियर से टूटे हिमखंडों से होता है।


प्रश्न 17: लेखिका को जमी हुई बर्फ कैसी लगी?

उत्तर

लेखिका को जमी हुई बर्फ की सीधी व ढलाऊ चट्टानें ऐसी लगीं मानो शीशे की चादरें बिछी हों ।


प्रश्न 18: लेखिका को शिखर कैंप पहुँचने में कितना समय लगा ?

उत्तर

लेखिका और उनके सहयोगियों को कैंप चार से शिखर कैंप पहुँचने में दो घंटे लगे।


प्रश्न 19: अंगदोरजी क्यों आश्चर्यचकित और आनंदित हुए ?

उत्तर

अंगदोरजी लेखिका के आत्मविश्वास और हिम्मत को देखकर आश्चर्यचकित एवं आनंदित हो गए।


प्रश्न 20: ल्हाटू ने रस्सी क्यों पकड़ी हुई थी ?

उत्तर

ल्हाटू ने रस्सी अपनी सुरक्षा के बजाय लेखिका तथा अंगदोरजी के संतुलन के लिए पकड़ी हुई थी ।


प्रश्न 21: एवरेस्ट पर चार पर्वतारोहियों के सफलतापूर्वक चढ़ने की सूचना दल के नेता को किसने दी ?

उत्तर

ल्हाटू ने दल के नेता कर्नल खुल्लर को चार पर्वतारोहियों के सफलतापूर्वक चढ़ने की सूचना दी।


प्रश्न 22: एवरेस्ट के शिखर पर फोटो किसने लिए?

उत्तर

सोनम पुलजर ने।


प्रश्न 23: अंगदोरजी कौन थे ?

उत्तर

अंगदोरजी लेखिका के रज्जु नेता थे। उन्होंने ही लेखिका को बार-बार प्रोत्साहित किया और लक्ष्य तक पहुँचाया। 


लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1: एवरेस्ट अभियान दल के पूर्व एक अग्रिम दल क्यों गया था ?

उत्तर

एवरेस्ट अभियान दल के पूर्व एक अग्रिम दल इसलिए गया था क्योंकि 'बेस कैंप' तक पहुँचने के दुर्गम रास्ते पर हुए हिमपात से जमीं बर्फ को साफ किया जा सके।


प्रश्न 2: प्रेमचंद ने यात्री दल की पहली बड़ी बाधा किसे बताया है ?

उत्तर

प्रेमचंद ने यात्री दल की पहली सबसे बड़ी बाधा खुंभु हिमपात को बताया है।


प्रश्न 3: प्रेमचंद ने अपने किए गए कार्य के व्यर्थ होने का संदेह क्यों प्रकट किया?

उत्तर

क्योंकि ग्लेशियर बर्फ की नदी है और बर्फ लगातार गिर रही थी । हिमपात में अनिवार्य, अनियंत्रित और अनिश्चित बदलाव के कारण प्रेमचंद ने अपने किए गए कार्य के व्यर्थ होने का संदेह व्यक्त किया।


प्रश्न 4: यात्री दल का पहला कैंप कहाँ था, उसकी ऊँचाई कितनी थी? वहाँ तक पहुँचने का रास्ता किसने बनाया था ?

उत्तर

यात्री दल का पहला कैंप हिमपात के ठीक ऊपर था, इसकी ऊँचाई 6,000 मीटर थी। वहाँ तक पहुँचने का मार्ग अग्रिम दल के नेता प्रेमचंद ने अपने नेतृत्व में बनाया था।


प्रश्न 5: बेस कैंप से लेखिका ने किसे निहारा?

    उत्तर

    एवरेस्ट शिखर को लेखिका ने पहले दो बार देखा था, लेकिन एक दूरी से बेस कैंप पहुँचने पर दूसरे दिन उसने एवरेस्ट पर्वत तथा इसकी अन्य श्रेणियों को देखा। वह भौचक्की होकर खड़ी रह गई और एवरेस्ट होत्से और नुत्सेकी ऊँचाइयों से घिरी, बर्फीली, टेढ़ी-मेढ़ी नदी को निहारती रही।


    प्रश्न 6: लेखिका ने अगली चढ़ाई के लिए क्या तैयारी की ?

    उत्तर

    लेखिका ने अपनी अगले दिन की महत्त्वपूर्ण चढ़ाई के लिए खाना, कुकिंग कैस तथा कुछ ऑक्सीजन सिलिंडर आदि की व्यवस्था की।


    प्रश्न 7: अपना अभियान सफलतापूर्वक पूरा करने के पश्चात् लेखिका ने क्या किया ?

    उत्तर

    अपना अभियान पूरा करने के पश्चात् लेखिका अपने रज्जू नेता अंगदोरजी के प्रति आदर भाव से झुकी और उन्हें बिना ऑ क्सीजन के एवरेस्ट की दूसरी चढ़ाई पर बधाई भी दी।


    प्रश्न 8: अभियान पूर्ण होने पर अंगदोरजी की क्या प्रतिक्रिया थी?

    उत्तर

    अभियान पूर्ण होने पर अंगदोरजी ने लेखिका को गले से लगाया और फुसफुसाया, "दीदी तुमने अच्छी चढ़ाई की। मैं बहुत प्रसन्न हूँ।"


    प्रश्न 9: लेखिका उस हिमपुंज से कैसे बाहर आईं ?

    उत्तर

    लेखिका को हिम पुंज से बाहर निकालने में लोपसांग का महत्त्वपूर्ण योगदान था । उसने स्विस छुरी की मदद से तंबू का रास्ता साफ कर दिया, और अत्यंत तेजी से बड़े-बड़े हिमपिंडों को हटाया और लेखिका के चारों तरफ जमे कड़े बर्फ को खोदकर लेखिका को उस कब्र से बाहर निकाला।


    प्रश्न 10: डॉ० मीनू मेहता ने यात्रियों को क्या जानकारी दी ?

    उत्तर

    डॉ० मीनू मेहता ने अल्यूमिनियम की सीढ़ियों से अस्थायी पुलों का बनाना, लट्ठों और रस्सियों को बाँधना और हमारे अग्रिम दल के अभियांत्रिकी कार्यों के बारे में जानकारी दी।


    प्रश्न 11: ल्हाटू कौन था? उसकी भूमिका क्या थी?

      उत्तर

      ल्हाटू पर्वतारोही दल का महत्त्वपूर्ण सहायक था। वह नाइलॉन की रस्सी लेकर साथ-साथ चला। उसी ने रस्सी के सहारे चलने का प्रबंध किया । इसलिए लंबे समय तक बर्फ में रहने के कारण उसके पाँव ठंडे पड़ जाते थे। फिर भी वह ऑक्सीजन लगाकर यात्रा नहीं करता था। वह दिन ही दिन में यात्रा करके वापस आना ठीक समझता था। वह कर्मठ और विश्वस्त पर्वतारोही था।


      प्रश्न 12: लेखिका को सपाट और कठिन चढ़ाई आसान क्यों लगने लगी?

      उत्तर

      क्योंकि लेखिका ने अब तक की चढ़ाई चार लीटर ऑक्सीजन की अपेक्षा ढाई लीटर ऑक्सीजन प्रति मिनट लेकर की थी। ल्हाटू ने जब यह देखा तो उसने लेखिका के रेगुलेटर पर ऑक्सीजन की गति बढ़ा दी जिससे लेखिका को सपाट और कठिन चढ़ाई आसान लगने लगी।


      प्रश्न 13: लेखिका क्या देखकर भौंचक्की रह गई ?

      उत्तर

      लेखिका ने एवरेस्ट तथा इसकी अन्य पर्वत श्रेणियों को नजदीक से देखा- एवरेस्ट, लहोत्से और नुत्से की ऊँचाइयों से घिरी, टेढ़ी-मेढ़ी बर्फीली नदी तथा अचानक उपस्थित होने वाले खतरनाक हादसों के परिणाम सुनकर भौंचक्की रह गई।


      प्रश्न 14: लेखिका को अपने लक्ष्य तक पहुँचाने में अंगदोरजी का क्या योगदान रहा?

        उत्तर

        अंगदोरजी लेखिका के रज्जु-नेता थे । वे बिना ऑक्सीजन के ही चढ़ाई करते थे। उनकी हिम्मत व साहस को देखकर लेखिका उन्हें अपना आदर्श मानने लगीं। अंगदोरजी के द्वारा प्रोत्साहित करने के कारण ही लेखिका अपने लक्ष्य तक पहुँचीं। इसलिए शिखर की चोटी पर पहुँचकर लेखिका ने हाथ जोड़कर आदरभाव से उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।


        प्रश्न 15: अंगदोरजी के साथ लेखिका ने किस प्रकार चढ़ाई की?

          उत्तर

          लेखिका को अंगदोरजी के साथ साउथ कोल से ऊपर की चढ़ाई करने में बर्फीली हवाओं से सामना करना पड़ा, किंतु आरोही उपस्करों के कारण लेखिका स्वयं को काफी सुरक्षित व गरम महसूस कर रही थीं। उन दोनों ने बगैर रस्सी केही चढ़ाई की। अंगदोरजी एक निश्चित गति से बिना ऑक्सीजन के ऊपर चढ़ते थे। लेखिका को भी उनके साथ चढ़ने में कोई कठिनाई नहीं हुई।


          प्रश्न 16: लेखिका और उनका दल आशाजनक स्थिति में नहीं चल रहे थे। क्यों?

          उत्तर

          क्योंकि लेखिका के दल के कुछ सहयोगी मृत्यु को प्राप्त हो गए थे तथा पर्वत का रास्ता दुर्गम, बर्फीला तथा जलवायु प्रतिकूल थी अतः लेखिका को ऐसा लगा कि इन प्रतिकूल परिस्थितियों में शिखर तक कैसे पहुँचेंगे।


          निबंधात्मक प्रश्नोत्तर

          प्रश्न 1: एवरेस्ट की चोटी पर पहुँचकर लेखिका को कैसा लगा? उसने वहाँ क्या किया?

            उत्तर

            एवरेस्ट शंकु की चोटी पर इतनी जगह नहीं थी कि दो व्यक्ति साथ-साथ खड़े हो सकें। चारों ओर हज़ारों मीटर लंबी ढलान थी। लेखिका ने फावड़े से बर्फ़ की खुदाई करके स्वयं को सुरक्षित किया तथा घुटनों के बल बैठकर आनंद से अभिभूत होकर 'सागरमाथे' का चुंबन लिया। फिर उसने अपने थैले से दुर्गा माँ का चित्र तथा हनुमान चालीसा निकालकर उन्हें लाल कपड़े में लपेटकर पूजा-अर्चना के बाद उन्हें बर्फ में दबा दिया। आनंद के इस क्षण में उसने अपने माता-पिता को याद किया।


            प्रश्न 2: शिखर पर चढ़कर लेखिका ने क्या-क्या किया?

              उत्तर

              एवरेस्ट के शिखर पर पहुँचने पर लेखिका के सामने सुरक्षा का प्रश्न था, क्योंकि चारों तरफ़ हज़ारों मीटर लंबी सीधी ढलान थी। ऐसी जोखिमपूर्ण स्थिति में लेखिका ने पहले बर्फ़ की खुदाई करके स्वयं को स्थिर किया और फिर घुटनों के बल बैठकर सागर माथे को चूमा। इसके बाद अपने साथ लाए लाल कपड़े में दुर्गा माँ का चित्र तथा हनुमान चालीसा लपेटकर उसी बर्फ में दबा दिया और फिर छोटी-सी पूजा-अर्चना की। इसके बाद अपने रज्जु नेता अंगदोरजी के प्रति करबद्ध कृतज्ञता ज्ञापित की।


              प्रश्न 3: साउथ कोल कैंप पहुँचकर लेखिका ने अपने साथियों की मदद किस प्रकार की?

                उत्तर

                लेखिका तो साउथ कोल कैंप पहुँच गईं, परंतु उनके साथी की, जय और मीनू उनसे काफी पीछे थे। वे धीरे-धीरे आ रहे थे, क्योंकि वे भारी बोझ लेकर और बिना ऑक्सीजन के चल रहे थे। लेखिका बर्फीली हवाओं का सामना करते हुए एक थरमस में जूस और दूसरे थरमस में चाय लेकर नीचे की ओर उतरीं। पहले मीनू और फिर जय मिला, उन्होंने कृतज्ञतापूर्वक चाय वगैरह पी और लेखिका को आगे जाने से रोका, किंतु वे नहीं रुकीं और 'की' तक चाय व जूस पहुँचाने के लिए आगे बढ़ गईं। जब वे 'की' से मिलीं, तो उसका किट ले जाना चाहती थीं, परंतु 'की' ने ऐसा नहीं करने दिया। 'की' लेखिका के इस साहसिक कदम से हक्का-बक्का रह गया।



                प्रश्न 4: ‘“बिना उठे ही मैंने अपने थैले से दुर्गा माँ का चित्र और हनुमान चालीसा निकाला। मैंने इनको अपने साथ लाए लाल कपड़े में लपेटा, छोटी-सी पूजा-अर्चना की और इनको बर्फ में दबा दिया। आनंद के इस क्षण में मुझे अपने माता-पिता का ध्यान आया। " - आशय स्पष्ट कीजिए ।

                  उत्तर

                  लेखिका को अपने रज्जु - नेता अंगदोरजी पर पूर्ण विश्वास था साथ ही वह आरोहण की क्षमता तथा कर्मठता के विषय में भी आश्वस्त थी । अंगदोरजी के द्वारा प्रोत्साहित करने के कारण ही लेखिका अपने लक्ष्य तक पहुँचीं। उसी समय अपने घुटनों के बल बैठकर आनंद से अभिभूत होकर 'सागरमाथे' का चुंबन लिया। उनकी इस अनूठी उपलब्धि पर कर्नर खुल्लर ने कहा कि "मैं तुम्हारे माता-पिता को बधाई देना चाहूँगा। देश को तुम पर गर्व है।"


                  प्रश्न 5: अब तुम ऐसे संसार में वापस जाओगी, जो तुम्हारे अपने पीछे छोड़े हुए संसार से एकदम भिन्न होगा ! – आशय स्पष्ट कीजिए।

                    उत्तर

                    यह कथन कर्नल खुल्लर ने लेखिका को शिखर की चोटी पर पहुँचने की उपलब्धि प्राप्त करने पर कहा । उनके कथन का यह आशय था कि अब एवरेस्ट की चोटी पर पहुँचकर लेखिका ने महान सफलता अर्जित की है। उनके इस साहसिक अभियान से पहले कोई उन्हें जानता भी नहीं था, किंतु अब वे प्रथम भारतीय महिला पर्वतारोही के रूप में प्रसिद्ध हो चुकी हैं। इस उपलब्धि के बाद वे लोगों के सम्मान व आदर की पात्र होंगी।


                    प्रश्न 6: कैंप-तीन में कितने लोग थे? वहाँ रात में क्या दुर्घटना घटी ?

                      उत्तर

                      15-16 मई, 1984 को बुद्ध पूर्णिमा के दिन कैंप-तीन में लेखिका के साथ 10 और व्यक्ति थे। लोपसांग और तशारिंग उसके तंबू में थे। जब लेखिका गहरी नींद में सोई थीं, तभी रात में 12:30 बजे के लगभग एक ज़ोरदार धमाका हुआ। कोई ठंडी व भारी चीज़ उसके शरीर को कुचलती हुई चल रही थी। दरअसल ल्होत्से ग्लेशियर से बर्फ़ का विशालकाय पुंज टूटकर गिर पड़ा था, जिसने कैंप को तहस-नहस कर दिया, किंतु किसी की मृत्यु नहीं हुई।

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