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MCQ and Summary for भारतमाता Class 10 Hindi Matric Godhuli

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MCQ and Summary for भारतमाता (Bharatmata) Class 10 Hindi Godhuli Part 2 Bihar Board

भारतमाता - सुमित्रानंदन पंत प्रश्नोत्तर

Multiple Choice Question Solutions (बहुविकल्पी प्रश्न)

1. 'भारतमाता' किस कवि की कविता हैं ?
(A) कुँवर नारायण
(B) प्रेमघन
(C) रामधारी सिंह 'दिनकर'
(D) सुमित्रानंदन पंत
उत्तर
(D) सुमित्रानंदन पंत

2. 'भारतमाता' किस प्रकार की कविता है ?
(A) रहस्यवादी
(B) यथार्थवादी
(C) प्रगतिवादी
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर
(B) यथार्थवादी

3. 'भारत माता' शीर्षक कविता किस संग्रह से ली गई है ?
(A) ग्राम्या
(B) चिदम्बरा
(C) लोकायतन
(D) गुंजन
उत्तर
(A) ग्राम्या

4. भारत माता कहाँ खड़ी है ?
(A) वृक्ष के नीचे
(B) गंगा के पास
(C) यमुना किनारे
(D) मुम्बई में
उत्तर
(A) वृक्ष के नीचे

5. भारत माता कविता में कवि ने किसे अशिक्षित, मूढ, असभ्य, निरस्त्र और निर्धन कहकर सम्बोधित किया है ?
(A) अंग्रेजों को
(B) गुलामों को
(C) भारतीयों को
(D) प्रवासियों को
उत्तर
(C) भारतीयों को

6. भारत के खेतों में क्या उगता है ?
(A) मिट्टी
(B) चाँदी
(C) सोना
(D) हीरा
उत्तर
(C) सोना

7. भारत माता के माथे पर जो रेखाएँ उभरी हैं, वे किस बात से उभरी है ?
(A) सुख से
(B) दु:ख से
(C) चिंता से
(D) बेवफाई से
उत्तर
(C) चिंता से


8. भारत माता पर किसने अधिकार जमा लिया है ?
(A) विदेशियों ने
(B) स्वदेशियों ने
(C) अपनों ने
(D) मेघों ने
उत्तर
(A) विदेशियों ने

9. गंगा-यमुना का जल भारत माता के क्या हैं?
(A) आँख
(B) आँसू
(C) शरीर
(D) मैल
उत्तर
(B) आँसू

10. भारत माता का आँचल कैसा है ?
(A) स्वच्छ
(B) कीचड़ से सना
(C) धूल-धूसरित
(D) रक्त रंजित
उत्तर
(C) धूल-धूसरित

11. भारतमाता का आँचल क्या है ?
(A) सूती वस्त्र
(B) उनी वस्त्र
(C) रेशमी वस्त्र
(D) श्याम-खेत
उत्तर
(D) श्याम-खेत

12. भारतमाता कहाँ निवास करती हैं ?
(A) शहरों में
(B) देवालयों में
(C) ईस्ट इंडिया के ऑफिस में
(D) गाँवों में
उत्तर
(D) गाँवों में

13. प्रस्तुत कविता जब लिखी गई उस समय भारत की आबादी कितनी थी।
(A) सवा करोड़
(B) तीस करोड़
(C) एक करोड़
(D) सभी सत्य है
उत्तर
(B) तीस करोड़

14. छायावाद के आधार स्तंभों में प्रमुख नाम है
(A) रामधारी सिंह दिनकर
(B) सुभद्रा कुमारी चौहान
(C) सुमित्रानंदन पंत
(D) रवीन्द्र नाथ टैगोर
उत्तर
(C) सुमित्रानंदन पंत

15. 'पंत' किस वाद के प्रवर्तक हैं ?
(A) छायावाद
(B) भक्तिवाद
(C) रौद्र रस
(D) वीभत्स रस
उत्तर
(A) छायावाद

16. भारत माता शीर्षक कविता में किसका मानवीकरण किया गया है?
(A) भारत का
(B) भारतीयता का
(C) भारतीयों का
(D) अंग्रेजों का
उत्तर
(A) भारत का

17. भारत माता कविता में भारत का कैसा चित्र प्रस्तत किया गया।
(A) आदर्श
(B) काल्पनिक
(C) यथातथ्य का
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर
(C) यथातथ्य का

18. जातीय अस्मिता की दृष्टि से इतिहास का प्रवाह कैसा है ?
(A) विच्छिन्न
(B) अविच्छिन्न
(C) विच्छिन्न और अविच्छिन्न दोनों
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर
(C) विच्छिन्न और अविच्छिन्न दोनों

19. भारत माँ के श्रेष्ठ मुख की तुलना कवि ने किससे की है ?
(A) सूर्य
(B) कंचन
(C) पुष्प
(D) छायायुक्त चंद्र
उत्तर
(D) छायायुक्त चंद्र


भारतमाता- लेखक परिचय

सुमित्रानंदन पंत का जन्म सन् 1900 में अलमोड़ा जिले के रमणीय स्थल कौसानी (उत्तरांचल) में हुआ था । जन्म के छह घंटे बाद ही माता सरस्वती देवी का देहान्त हो गया । पिता गंगादत्त पंत कौसानी टी स्टेट में एकाउंटेंट थे । पंतजी की प्राथमिक शिक्षा गाँव में हुई और फिर बनारस से उन्होंने हाईस्कूल की शिक्षा पायी । वे कुछ दिनों तक कालाकांकर राज्य में भी रहे । उसके बाद आजीवन वे इलाहाबाद में रहे 1 29 दिसंबर 1977 ई० में उनका निधन हो गया।

पंतजी का आरंभिक काव्य प्रकृति प्रेम और शिशु सुलभ जिज्ञासा को लेकर प्रकट हुआ । उनकी आरंभिक रचनाएँ प्रकृति और सौंदर्य के प्रेमी कवि की संवेदनशील अभिव्यक्तियों से परिपूर्ण हैं।

पंतजी प्रवृत्ति से छायावादी हैं, परंतु उनके विचार उदार मानवतावादी हैं । उन्होंने प्रसाद और निराला के समान छंदों और शब्द योजना में नवीन प्रयोग किए । पंतजी की प्रतिभा कलात्मक सूझ से सम्पन्न है, अतः उनकी रचनाओं में एक विलक्षण मृदुता और सौष्ठव मिलता है । युगबोध के अनुसार अपनी काव्यभूमि का विस्तार करते रहना पंत की काव्य-चेतना की विशेषता है । वे प्रारंभ में प्रकृति सौंदर्य से अभिभूत हुए, फिर मानव सौंदर्य से । मानव सौंदर्य ने उन्हें समाजवाद की ओर आकृष्ट किया । समाजवाद से वे अरविन्द दर्शन की ओर प्रवृत्त हुए। वे मानवतावादी कवि थे, जो मानव इतिहास के नित्य विकास में विश्वास करते थे । वे अतिवादिता एवं संकीर्णता के घोर विरोधी रहे । उनका अंतिम काव्य ‘लोकायतन’ है जो उनके परिपक्व चिंतन को समेट देता है। उनकी प्रमुख काव्यकृतियाँ हैं – ‘उच्छ्वास’, ‘पल्लव’, ‘वीणा’, ‘ग्रंथि’, ‘गुंजन’, ‘युगांत’, ‘युगवाणी’, ‘ग्राम्या’, ‘स्वर्णधूलि’, ‘स्वर्णकिरण’, ‘युगपथ’, ‘चिदंबरा’ आदि । पंतजी ने नाटक, आलोचना, कहानी, उपन्यास आदि भी लिखा । ‘चिदंबरा’ पर उन्हें भारतीय ज्ञानपीठ’ भी मिला।

प्रकृति सौंदर्य की कविता के लिए विख्यात कवि की रचनाओं में यह कविता हिंदी की यथार्थवादी कविता के एक नये उन्मेष. की तरह है। प्रख्यात छायावादी कवि सुमित्रानंदन पंत की यह प्रसिद्ध कविता उनकी कविताओं के संग्रह ‘ग्राम्या’ से संकलित है । यह कविता आधुनिक हिंदी के उत्कृष्ट प्रगीतों में शामिल की जाती है । अतीत के गरिमा-गान द्वारा अब तक भारत का ऐसा चित्र खींचा गया था जो ऐतिहासिक चाहे जितना रहा हो, वर्तमान को देखते हुए वास्तविक प्रतीत नहीं होता था । धन-वैभव, शिक्षा-संस्कृति, जीवनशैली आदि तमाम दृष्टियों से पिछड़ा हुआ, धुंधला और मटमैला दिखाई पड़ता यह देश हमारा वही भारत है जो अतीत में कभी सभ्य, सुसंस्कृत, ज्ञानी और वैभवशाली रहा था। कवि यहाँ इसी भारत का यथातथ्य चित्र प्रस्तुत करता है।


भारतमाता का सारांश (Summary)

रस्तुत कविता ‘भारतमाता‘ पंत जी की कविताओं का संग्रह ‘ग्राम्या‘ से संकलित है। इसमें भारत के दुर्दशा का चित्रण किया गया है।


भारतमाता ग्रामवासिनी
खेतों में फैला है श्यामल
धूल-भरा मैला-सा आँचल
गंगा-यमुना में आँसू-जल
मिट्टी की प्रतिमा
उदासिनी।
कवि पंत जी भारतीय ग्रामीणों की दुर्दशा का चित्र प्रस्तुत करते हुए कहते हैं कि भारत की आत्मा गाँवों में निवास करती है। जहाँ खेत सदा हरे-भरे रहते हैं किंतु यहाँ के निवासी शोषण की चक्की में पिसकर मजबूर दिखाई देते हैं। गंगा-यमुना के जल उनकी व्यथा के प्रतिक हैं। सीधे-साधे किसान अपनी दयनीय दशा के कारण अपने दुर्भाग्य पर आँसु बहा रहे हैं और उदास हैं।

 
दैन्य जड़ित अपलक नत चितवन,
अधरों में चिर नीरव रोदन,
युग-युग के तम से विषण्ण मन
वह अपने घर में
प्रवासिनी।
पंतजी भारतमाता के उन कर्मठ सपूत किसानों की दयनीय दशा एवं दुःखपूर्ण जीवन की करूण-कहानी प्रस्तुत करते हुए कहते हैं कि जमींदारों एवं सूदखोर साहूकारों के शोषण ने इन्हें अति गरीब, चेतनाशून्य बना दिया है। अपने मजबूरी के कारण अपने ऊपर हो रहे अन्याय को सिर झुकाए अपलक देखने को मजबूर हैं। वे अपनी अंदर की पीड़ा अन्दर-ही-अन्दर सहने को मजबूर हैं। सदियों की त्रासदी ने उनके जीवन को निराश बना दिया है। वे अपने घर में अपने अधिकारों से वंचित है।

 
तीस कोटि संतान नग्न तन,
अर्ध क्षुधित, शोषित, निरस्त्रजन,
मूढ़, असभ्य, अशिक्षित, निर्धन,
नत मस्तक
तरु-तल निवासिनी।
अंग्रेजी शासन की क्रुरता के कारण भारतमाता की तीस करोड़ संतान अर्द्धनग्न तथा अर्द्धपेट खाकर जीवन व्यतित करने को विवश हैं। इनमें प्रतिकार और विरोध करने की शक्ति नहीं है। वे मूर्ख, असभ्य, अशिक्षित, गरीब, पेड़ के नीचे गर्मी, वर्षा तथा जाड़ा का कष्ट सहन करते हैं।

 
स्वर्ण शस्य पर-पद-तल लंठित,
धरती-सा सहिष्णु मन कुंठित,
क्रंदन कंपित अधर मौन स्मित,
राहु ग्रसित
शरदेन्दु हासिनी।
कवि पंत जी कहते हैं कि जिनकी पकी फसल सोने के समान दिखाई पड़ती है, पराधीनता के कारण वे शोषण के शिकार हैं। वे उनके हर अपमान, शोषण, अत्याचार आदि को सहन करते हुए धरती के समान सहनशील बने हुए हैं। अर्थात् वे अपने जुल्मों का विरोध न करके चुपचाप सहन कर लेते हैं। वे क्रुर शासन से इतने भयभीत हैं कि खुलकर रो भी नहीं सकते। देशवासियों की ऐसी दुर्दशा और विवशता देखकर कवि दुःख से भर जाता है कि जिस देश के वीरों की गाथा संसार में शरदपूर्णिमा की चाँदनी के समान चमकती थी, आपसी शत्रुता के कारण आज ग्रहण लगा अंधकारमय है।

 
चिंतित भृकुटि क्षितिज तिमिरांकित,
नमित नयन नभ वाष्पाच्छादित,
आनन श्री छाया-शशि उपमित,
ज्ञान-मूढ़
गीता प्रकाशिनी।
कवि पंतजी कहते हैं कि अंग्रेजों के अत्याचार एवं शोषण से लोग उदास, निराश और हताश हैं, यानी वातावरण में घोर निराशा छायी हुई है। देशवासियों की ऐसी मन की स्थिति पर कवि आश्चर्य प्रकट करते हुए कहते हैं कि जिसके मुख की शोभा की उपमा चन्द्रमा से दी जाती थी, या फिर जहाँ गीता जैसे प्ररणादायी ग्रंथ की रचना हुई थी, उस देश के लोग अज्ञानता और मूर्खता के कारण गुलाम हैं।

 
सफल आज उसका तप संयम
पिला अहिंसा स्तन्य सुधोपम,
हरती जन-मन-भय, भव-तम-भ्रम,
जग-जननी
जीवन-विकासिनी।
कवि सफलता पर आशा प्रकट करते हुए कहते हैं कि अहिंसा जैसे महान मंत्र का संदेश देकर लेगों के मन का भय, अज्ञान एवं भ्रम का हरण कर भारतमाता की स्वतंत्रता की प्राप्ति का संदेश दिया।

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