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BSEB Solutions for नागरी लिपि (Nagiri Lipi) Class 10 Hindi Godhuli Part 2 Bihar Board

नागरी लिपि - गुणाकर मुले प्रश्नोत्तर

Very Short Questions Answers (अतिलघु उत्तरीय प्रश्न)

प्रश्न 1. भारत में पोधियाँ कुछ समय पहले तक किस लिपि में लिखी जाती थीं?
उत्तर

दक्षिण भारत में कुछ समय पहले तक पोथियाँ नागरी लिपि में लिखी जाती थीं।


प्रश्न 2. पुरन काल की लिपि क्या थी?
उत्तर

गुप्त काल की लिपि ब्राह्मी लिपि थी।


प्रश्न 3. बादशाह अकबर के सिक्कों पर कौन सी आकृति तथा कौन सा शब्द अंकित था ?
उत्तर

बादशाह अकबर के सिक्कों पर “राम-सीता” की आकृति और नागरी लिपि में रामसीय शब्द अंकित था।


प्रश्न 4. राष्ट्रकूट शासक मूलतः कहाँ के रहने वाले थे तथा इनकी मातृभाषा क्या थी?
उत्तर

राष्ट्रकूट शासक मूलतः कर्नाटक के रहनेवाले थे तथा इनकी मातृभाषा कन्नड़ थी।


प्रश्न 5. नागरी लिपि की सबसे बड़ी विशेषता क्या है ?
उत्तर

नागरी लिपि की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि जिस रूप में लिखी जाती है उसी रूप में बोली भी जाती है।


प्रश्न 6. किन-किन शासकों के लेख नंदिनागरी लिपि में हैं?
उत्तर

कोंकण के शिलाहार, मान्यखेट के राष्ट्रकूट, देवगिरि के यादव तथा विजयनगर के शासकों के लेख देवनागरी लिपि में हैं।


प्रश्न 7. उत्तर भारत की नागरी लिपि को हम किस लिपि के नाम से जानते हैं?
उत्तर
उत्तर भारत की नागरी लिपि को हम देवनागरी लिपि के नाम से जानते हैं।


प्रश्न 8. महावीराचार्य कौन थे?
उत्तर

महावीराचार्य अन्निछवर्ष के जमाने के गणितज्ञ थे जिन्होंने ‘गणितसार-संग्रह’ की रचना की।


प्रश्न 9. देवनागरी लिपि के अक्षरों में स्थिरता कैसे आयी है ?
उत्तर
करीब दो सदी पहली बार देवनागरी लिपि के टाइप बने और इसमें पुस्तकें छपने लगीं। इस प्रकार ही देवनागरी लिपि के अक्षरों में स्थिरता आयी है।


प्रश्न 10. देवनागरी लिपि में कौन-कौन-सी भाषाएं लिखी जाती हैं ?
उत्तर

देवनागरी लिपि में मुख्यतः नेपाली, मराठी, संस्कृत, प्राकृत, हिंदी भाषाएं लिखी जाती हैं।


प्रश्न 11. लेखक ने किन भारतीय लिपियों से देवनागरी का संबंध बताया है?
उत्तर

लेखक ने गुजराती, बंगला और ब्राह्मी लिपियों से देवनागरी का संबंध बताया है।


प्रश्न 12. नागरी लिपि के आरंभिक लेख कहाँ प्राप्त हुए हैं ? उनके विवरण दें।
उत्तर

विद्वानों के अनुसार नागरी लिपि के आरंभिक लेख विंध्य पर्वत के नीचे के दक्कन प्रदेश से प्राप्त हुए हैं।


प्रश्न 13. उत्तर भारत में किन शासकों के प्राचीन नागरी लेख प्राप्त होते हैं ?
उत्तर
विद्वानों का विचार है कि उत्तर भारत में मिहिर भोज, महेन्द्रपाल आदि गुर्जर प्रतिहार राजाओं के अभिलेख में पहले-पहल नागरी लिपि के मेख प्राप्त होते हैं।


प्रश्न 14. नागरी लिपि कब एक सार्वदेशिक लिपि थी?
उत्तर

ईसा की आठवीं-ग्यारहवीं सदियों में नागरी लिपि पूरे देश में व्याप्त थी। अतः उस समय यह एक सार्वदेशिक, लिपि थी।


Short Question Answers (लघु उत्तरीय प्रश्न)

प्रश्न 1. देवनागरी लिपि के अक्षरों में स्थिरता कैसे आयी है ?
उत्तर
2 सदी पूर्व जब इस लिपि के टाइप बने और पुस्तक छपने लगी तब इसके अक्षरों में स्थिरता आ गई।

प्रश्न 2. देवनागरी लिपि में कौन-कौन सी भाषाएँ लिखी जाती है?
उत्तर
देवनागरी लिपि में संस्कृत, हिन्दी, नेपाली, नेवारी, मराठी, गजान मैथिली, भोजपुरी, मधी आदि भाषाएँ लिखी जाती हैं।

प्रश्न 3. लेखक ने किन भारतीय लिपियों से देवनागरी का सम्बन्ध बताया है?
उत्तर
लेखक ने गुप्त कालीन ब्राह्मी लिपि तथा बाद के सिद्धम् लिपियों । देवनागरी लिपि का संबंध बताया है।

प्रश्न 4. नंदी नागरी किसे कहते हैं ? किस प्रसंग में लेखक ने उसका उल्लेख किया है?
उत्तर
नंदी नागरी देवनागरी को ही कहते हैं। महाराष्ट्र के राष्ट्रकूट राजाओं के समय नदिनगर (नांदेड) की लिपि होने के कारण यह नंदिनागरी कहलाने लगी।

प्रश्न 5. नागरी लिपि के आरंभिक लेख कहाँ प्राप्त हुए हैं ? उनके। विवरण दें।
उत्तर
नागरी लिपि के आरंभिक लेख दक्षिण भारत में राष्ट्रकूट वंश के राजा दंतिदुर्ग का सामंगड दान पत्र 754 ई० का है।

प्रश्न 6. ब्राह्मी और सिद्धम लिपि की तुलना में नागरी लिपि की मुख्य पहचान क्या है?
उत्तर
ब्राह्मी लिपि और सिद्धम् लिपि की तुलना में नागरी लिपि की मुख्य । पहचान है कि ब्राह्मी लिपि और सिद्धम् लिपि के अक्षरों के सिरों पर छोटी आडी लकीरें या ठोस तिकोन हैं लेकिन नागरी लिपि के अक्षरों पर लम्बी लकीरें अक्षरों । की चौड़ाई के अनुकूल ऊपर जाती है।

प्रश्न 7. उत्तर भारत में किन शासकों के प्राचीन नागरी लेख प्राप्त होते हैं?
उत्तर
उत्तर भारत में गुर्जर-प्रतिहार वंश के शासक कन्नौज में शासन करते । थे जिसमें मिहिर भोज, महेन्द्रपाल प्रसिद्ध राजा हुए। मिहिर भोजन (840-881 ई.) । तक शासन किया था। उसका ग्वालियर प्रशस्ति पत्र देवनागरी लिपि का लेख है।

प्रश्न 8. नागरी की उत्पत्ति के संबंध में लेखक का क्या कहना है ? पटना से नागरी का क्या संबंध लेखक ने बताया है ?
उत्तर
"नागरी" की उत्पत्ति के संबंध में लेखक का कहना है कि नगर से । ही नागरी शब्द बना है। पटना को कभी नगर कहा जाता था अतः पटना से ही इस लिपि की उत्पत्ति होने के कारण यह नागरी लिपि नाम धारण किया हो।

प्रश्न 9. नागरी लिपि कब एक सार्वदेशिक लिपि थी?
उत्तर
8वीं सदी से लेकर 11वीं सदी के बीच नागरी लिपि एक सार्वदेशिक लिपि थी।

प्रश्न 10. नागरी लिपि के साथ-साथ किसका जन्म होता है ? इस संबंध में लेखक क्या जानकारी देता है ?
उत्तर
नागरी लिपि के साथ-साथ भारतीय इतिहास एवं भारतीय संस्कृति के एक नए युग का जन्म होता है तथा नागरी के साथ-साथ अनेक प्रादेशिक भाषा भी जन्म देती हैं। इस सम्बन्ध में लेखक जानकारी देता है कि आठवीं-नौवीं सदा का आरंभिक हिन्दी साहित्य प्राप्त हुआ है तथा मराठी, गुजराती बंगाली भाषा के उपलब्ध लेख भी उसी काल के हैं।


प्रश्न 11. गुर्जर प्रतिहार कौन थे?
उत्तर
गुर्जर प्रतिहार विदेशी थे। ये भारत आकार बस गये। 8वीं सदी के पूर्वाद्ध में अवंती प्रदेश में इन्होंने शासन कायम किया। बाद में कन्नौज पर भी इनका अधिकार हो गया। गुर्जर-प्रतिहार राजाओं में मिहिर भोज और महेन्द्रपाल आदि महान राजा में गिने जाते थे|

Long Question Answer (दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)


प्रश्न 1. नागरी को देवनागरी क्यों कहते हैं? लेखक इस संबंध में व्या क्या बताता है?
उत्तर
नागरी लिपि को देवनागरी कहलाने के पक्ष में सप्रमाण सबूत तो नहीं है परन्त नागरी शब्द नगर से ही सम्बन्ध रखता है । पटना जो  कभी नगर कहा जाता था वहाँ के राजा चन्द्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) का व्यक्तिगत नाम "देव' था। संभवतः पटना नगर देवनगर भी कहलाता होगा। उसी के आधार पर उत्तर भारत की लिपि को देवनागरी लिपि लोगों ने नाम रख दिया होगा।
लेखक ने इस सम्बन्ध में एक और बात बतायी है कि भारत के सभी शहर नगर कहलाते थे लेकिन काशी देवनगरी कहलाती थी अत: उसी का आधार लेकर उत्तर भारत की लिपि देवनागरी कहलाने लगी होगी।


प्रश्न 2. निबंध के आधार पर काल-क्रम से नागरी लेखों से संबंधित प्रमाण प्रस्तुत करें।
उत्तर
  • 8वीं सदी (754 ई.) का राष्ट्रकूट राजा दंति दुर्ग का सामांगड दानपत्र। 9वीं सदी (850 ई.) का जैन गणितज्ञ महावीराचार्य की रचना "गणितसार संग्रह तथा 840 से 881 ई. के बीच प्रतिहार शासक मिहिर भोज की ग्वालियर प्रशस्ति संस्कृत में लिखा गया था
  • 10वीं सदी-दसवीं सदी में लिखित "दोहाकोश"।
  • 11वीं सदी-शिलाहार शासक केशिदेव (प्रथम का शिलालेख (1012 ई.) उपलब्ध है तथा (1020 ई०) का दानपत्र जो परमार वंश के विश्रुत राजा भोज का है। (1028 ई.) का महमूद गजनवी द्वारा चलाया गया सिक्का पर नागरी लिपि में लिखा हुआ है|
  • 12वीं सदी-इस सदी के केरल शासकों के सिक्के पर नागरी लिपि में "वीर केरलस्य" लिखा मिला है तथा श्रीलंका के पराक्रमबाहु, विजय बाहु आदि शासकों के सिक्के पर नागरी लिपि ही अंकित है।
  • 13वीं सदी-इस सदी के देवगिरि के यादव राजाओं के ताम्रपात्र नागरी लिपि
  • 14वीं सदी एवं 15वीं सदी में विजय नगर के शासकों का लेख नागरी लिपि में भी प्राप्त हैं। इस दो सदियों में इस्लामिक शासक ने भी अपने सिक्के पर नागरी लिपि का उपयोग किया है।

गद्यांशों पर आधारित अर्थग्रहण-संबंधी प्रश्नोत्तर

1. हिंदी तथा इसकी विविध बोलियाँ देवनागरी लिपि में लिखी जाती हैं हमारे पड़ोसी देश नेपाल की नेपाली (खसकुरा) व नेवारी भाषाएँ भी इसी लिपि में लिखी जाती हैं। मराठी भाषा की लिपि देवनागरी है। मराठी में सिर्फ एक अतिरिक्त अक्षर है। हमने देखा है कि प्राचीन काल में संस्कृत व प्राकृत भाषाओं में यह ध्वनि थी और इसके लिए अनेक अभिलेखों में अक्षर मिलता है।

प्रश्न.
(क) पाठ तथा लेखक का नाम लिखिए।
(ख) हिंदी किस लिपि में लिखी जाती है ?
(ग) नेपाल में कौन-सी भाषाएँ देवनागरी में लिखी जाती हैं?
(घ) मराठी भाषा की लिपि क्या है ?
(ङ) प्राचीन काल में किन भाषाओं में देवनागरी की ध्वनि थी?

उत्तर

(क)पाठ का नाम-नागरा लिापा
लेखक का नाम गुणाकर मुले।

(ख) हिंदी देवनागरी लिपि में लिखी जाती है।

(ग) नेपाल में नेपाली (खुसकुरा) एवं नेपाली भाषाएँ देवनागरी लिपि में लिखी जाती हैं।

(घ) मराठी भाषा की लिपि देवनागरी है।

(ङ) प्राचीन काल में संस्कृत एवं प्राकृत भाषाओं में देवनागरी की ध्वनि थी।


2. ईसा की चौदहवीं-पंद्रहवीं सदी के विजयनगर के शासकों ने अपने लेखों की लिपि को नंदिनागरी कहा है। विजयनगर के राजाओं के लेख कन्नड़-तेलगु और नागरी लिपि में मिलते हैं। जानकारी मिलती है कि विजयनगर के राजाओं के शासनकाल में ही पहले-पहल वेदों को लिपिबद्ध किया गया था। यह वैदिक साहित्य निश्चय ही नागरी लिपि में लिखा गया होगा। विद्वानों का यह भी मत है कि वाकाटकों और राष्ट्रकूटों के समय के महाराष्ट्र के प्रसिद्ध नंदिनगर (आधुनिक नांदेड़) की लिपि होने के कारण इसका नाम नदिनागरी पड़ा।

प्रश्न.
(क) पाठ तथा लेखक का नाम लिखिए।
(ख) विजयनगर के शासकों ने अपने लेखों की लिपि को क्या कहा है?
(ग) विजयनगर के लेख किस लिपि में मिलते हैं ?
(घ) किसके शासन काल में पहले-पहल वेदों को लिपिबद्ध किया गया?
(ङ) नागरी लिपि का नंदिनागरी नामू क्यों पड़ा?

उत्तर

(क) पाठ का नाम नागरी लिपि
लेखक का नाम गुणाकर मुले।

(ख)विजय नगर के शासकों ने अपने लेखों की लिपि को नदिनागरी कहा है।

(ग) विजय नगर के लेख नागरी लिपि में मिलते हैं।

(घ) विजय नगर के राजाओं के शासनकाल में पहले-पहल वेदों को लिपिबद्ध किया गया था।

(ङ) विद्वानों का मत है कि वाकाटकों और राष्ट्रकूटों के समय के महाराष्ट्र के प्रसिद्ध नंदिनगरे (आधुनिक नांदेड) की लिपि होने के कारण इसका नाम नंदिनागरी पड़ा।


3. अनेक विद्वानों का मत है कि दक्षिण भात में नागरी लिपि का प्राचीनतम लेख राष्ट्रकूट राजा तिदुर्ग का सामागंड दानपत्र (754 ई०) है। दंतिदुर्ग ने ही राष्ट्रकूट शासन की नींव डाली थी। ये राष्ट्रकूट शासक मूलतः कर्णाटक के रहनेवाले थे और इनकी मातृभाषा कन्नड़ थी; परंतु ये खानदेश-विदर्भ में बस गए थे। दंतिदुर्ग के बाद उसका चाचा कृष्ण (प्रथम) राष्ट्रकूटों की गद्दी पर बैठा। इसी कृष्ण के शासनकाल में एलोरा (प्राचीन एलापुर, वेरूल) में अनुपम कैलाश मंदिर पहाड़ को काटकर बनाया गया था।
कृष्ण के कुछ लेख भी मिले हैं। नौवीं सदी में अमोघवर्ष एक प्रख्यात राष्ट्रकूट राजा हुआ। इसी अमोघवर्ष ने राष्ट्रकूट की नई राजधानी मान्यखेट (मालखेड) की नींव डाली। अमोघवर्ष के शासनकाल में ही जैन गणितज्ञ महावीराचार्य (850 ई.) ने ‘गणितसार-संग्रह’ की रचना की थी।

प्रश्न.
(क) पाठ तथा लेखक का नाम लिखिए।
(ख) अनेक विद्वान नागरी लिपि का प्राचीनतम लेख किसे मानते हैं और वह किस काल का है ?
(ग) राष्ट्रकूट शासन की नींव किसने डाली थी?
(घ) राष्ट्रकूट शासक मूलत: कहाँ के रहनेवाले थे ?
(ङ) राष्ट्रकूट शासकों की मातृभाषा क्या थी ?
(च) दंतिदुर्ग के बाद राष्ट्रकूटों की गद्दी पर कौन बैठा?
(छ) किसके शासनकाल में एलोरा में कैलाश मन्दिर बनाया गया ?
(ज) जैन गणितज्ञ महावीराचार्य ने किसके शासन काल में और कौन-से ग्रंथ की रचना की?

उत्तर

(क) पाठ का नाम नागरी लिपि
लेखक का नाम गुणाकर मुले।

(ख) अनेक विद्वान का मत है कि दक्षिण भारत में नागरी लिपि का प्राचीनतम लेख राष्ट्रकूट राजा दंतिदुर्ग का सामागंड दानपत्र 745 ई. है।

(ग) राष्ट्रकूट शासन की नींव दंतिदुर्ग ने डाली थी।

(घ) राष्ट्रकूट शासक मूलतः कर्णाटक के रहनेवाले थे।

(ङ) राष्ट्रकूट शासकों की मातृभाषा कन्नड़ थी।

(च) दंतिदुर्ग के बाद राष्ट्रकूटों की-गद्दी पर उसका चाचा कृष्ण (प्रथम) बैठा।

(छ) कृष्ण (प्रथम) के शासनकाल में एलोरा में अनुपम कैलाश मंदिर पहाड़ को काटकर बनाया गया था।

(ज) जैन गणितज्ञ महावीराचार्य ने अमोघवर्ष के शासन काल में ‘गणितसार-संग्रह’ नामक ग्रंथ की रचना की।


4. महमूद गजनवी के बाद के मुहम्मद गोरी, अलाउद्दीन खिलजी, शेरशाह आदि शासकों ने भी अपने सिक्कों पर नागरी शब्द खुदवाए हैं। बादशाह अकबर ने ऐसा सिक्का चलाया था जिस पर राम-सीता की आकृति है और नागरी लिपि में ‘रामसीय’ शब्द अंकित है।
उत्तर भारत में मेवाड़ के गुहिल, सांभर-अजमेर के चौहान, कन्नौज के गाहड़वाल, काठियाबाड़-गुजरात के सोलंकी, आबू के परमार, जेजाकभुक्ति (बुंदेलखण्ड) के चंदेल तथा त्रिपुरा के कलचुरि शासकों के लेख नागरी लिपि में ही हैं। उत्तर भारत की इस नागरी लिपि को हम देवनागरी के नाम से जानते हैं।

प्रश्न.
(क) महमूद गजनवी के बाद किन-किन शासकों ने अपने सिक्कों पर नागरी शब्द खुदवाएं थे ?
(ख) सम्राट अकबर ने अपने सिक्के पर कौन-सी आकृति अंकित की थी और उस पर नागरी लिपि में कौन-सा शब्द अंकित है
(ग) उत्तर भारत में किन-किन शासकों के लेख नागरी लिपि में हैं ?
(घ) उत्तर भारत की नागरी लिपि को हम किस लिपि के नाम से जानते हैं?

उत्तर

(क) महमूद गजनवी के बाद मुहम्मद गोरी, अलाउद्दीन खिलजी, शेरशाह आदि शासकों ने अपने सिक्कों पर नागरी शब्द अंकित करवाये थे।

(ख) सम्राट अकबर ने अपने सिक्कों पर राम-सीता की आकृति अंकित की थी और उस पर नागरी लिपि में ‘रामसीय’ शब्द अंकित है।

(ग) उत्तर भारत में मेवाड़ के गुहिल, सांभर-अजमेर के चौहान कन्नौज के गाहड़वाल, काठियावाड़-गुजरात के सोलंकी, आबू के परमार, बुंदेलखंड के चंदेल तथा त्रिपुरा के कलचुरि शासकों के लेख नागरी लिपि में है।

(घ) उत्तर भारत की नागरी लिपि को हम देवनागरी लिपि के नाम से जानते हैं।


5. गुप्तकाल की ब्राह्मी लिपि तथा बाद की सिद्धम लिपि के अक्षरों के सिरों पर छोटी आड़ी लकीरें या ठोस तिकोन हैं। लेकिन नागरी लिपि की मुख्य पहचान यह है कि इसके अक्षरों के शिरों पर पूरी लकीरें बन जाती हैं और ये शिरोरेखाएं उतनी ही लम्बी रहती हैं जितनी कि अक्षरों की – चौड़ाई होती हैं। हाँ, कुछ लेखों के अक्षरों के शिरों पर अब भी कहीं-कहीं तिकोन दिखाई देते हैं। दूसरी स्पष्ट विशेषता यह है कि प्राचीन नागरी के अक्षर आधुनिक नागरी से मिलते-जुलते हैं और इन्हें आसानी से थोड़े-से अभ्यास से पढ़ा जा सकता है।

प्रश्न.
(क) पाठ और लेखक के नाम लिखें।
(ख) ब्राह्मी लिपि और सिद्धम लिपि की शिरसंस्थाएँ कै
(ग) नागरी लिपि की मुख्य पहचान क्या है ?
(घ) प्राचीन नागरी लिपि और आधुनिक नागरी लिपि में क्या साम्य है?

उत्तर

(क) पाठ- नागरी लिपिालेखक- गुणाकर मुले।

(ख) गुप्तकाल की ब्राह्मी लिपि तथा बाद की सिद्धम लिपि के अक्षरों के सिरों पर छोटी, आडी लकीरें या ठोस तिकोन हैं।

(ग) नागरी लिपि की मुख्य पहचान यह है कि इसके अक्षरों के सिरों पर पूरी लकीरें होती हैं और ये उतनी ही रहती हैं जितनी कि अक्षरों की चौड़ाई।

(घ) प्राचीन नागरी लिपि और आधुनिक नागरी लिपि के अक्षर बहुत-कुछ मिलते हैं जिन्हें थोड़े-से अभ्यास से पढ़ा जा सकता है।


6. इतना निश्चित है कि यह नागरी शब्द किसी नगर अर्थात् बड़े शहर से संबंधित है। ‘पादताडितकम्’ नामक नाटक से जानकारी मिलती है कि पाटलिपुत्र (पटना) को नगर कहते थे। हम यह भी जानते हैं कि स्थापत्य की उत्तर भारत की एक विशेष शैली को ‘नागर शैली’ कहते हैं। अतः ‘नागर’ या ‘नागरी’ शब्द उत्तर भारत के किसी बड़े नगर से संबंध रखता है।
असंभव नहीं कि यह बड़ा नगर प्राचीन पटना ही हो। चन्द्रगुप्त (द्वितीय) “विक्रमादित्य’, का व्यक्तिगत नाम ‘देव’ था, इसलिए गुप्तों की राजधानी पटना को ‘देवनगर’ भी कह जाता होगा। देवनागरी’ की लिपि होने से उत्तर भारत की प्रमुख लिपि को बाद में देवनागरी नाम दिया गया होगा। लेकिन यह सिर्फ एक मत हुआ। हम सप्रमाण नहीं बता सकते कि यह देवनागरी नाम कैसे अस्तित्व में आया।

प्रश्न.
(क) पाठ और लेख का नामोल्लेख करें।
(ख) नागरी शब्द किससे संबंधित है ?
(ग) ‘देवनागरी’ नाम के संबंध में लेखक का क्या अनुमान है ?

उत्तर

(क) पाठ- नागरी लिपिालेखक- गुणाकर मुले।

(ख) नागरी शब्द किसी नगर से संबंधित है।

(ग) लेखक का अनुमान है कि यह ‘नगर’ पटना ही होगा। उसके अनुमान का आधार यह है कि चन्द्रगुप्त (द्वितीय) “विक्रमादित्य’ का व्यक्तिगत नाम ‘देव’ था। इसलिए गुप्तों की राजधानी को ‘देवनगर’ कहा जाता होगा। ‘देवनगर’ की लिपि होने के कारण इसका नाम ‘देवनागरी’ पड़ा। किन्तु लेखक का यह सुनिश्चित मत नहीं है।


7. नागरी लिपि के साथ-साथ अनेक प्रादेशिक भाषाएँ भी जन्म लेती हैं। आठवीं-नौवीं सदी से आरंभिक हिन्दी का साहित्य मिलने लग जाता है। हिन्दी के आदिकवि सरहपाद (आठवीं) के ‘दोहाकोश’ की तिब्बत से जो हस्तलिपि मिली है वह दसवीं-ग्यारहवीं सदी की लिपि में लिखी गई है। नेपाल से और भारत के जैन-भंडारों से भी इस काल की बहुत सारी हस्तलिपियाँ मिली हैं। इसी काल में भारतीय आर्यभाषा परिवार की आधुनिक भाषाएँ-मराठी, बंगला आदि जन्म ले रही थीं। इस समय से इन भाषाओं के लेख मिलने लगते हैं।

प्रश्न.
(क) पाठ और लेखक के नाम लिखें।
(ख) हिन्दी का आरम्भिक साहित्य कब से मिलता है?
(ग) हिन्दी के आदिकवि कौन थे और उनकी कौन-सी पुस्तक किस लिपि में उपलब्ध है?
(घ) आधुनिक भारतीय भाषाओं में किनका जन्म इस काल में हुआ?

उत्तर

(क) पाठ-नागरी लिपिा लेखक-गुणाकर मुले।

(ख) हिन्दी का आरम्भिक साहित्य आठवीं-नौवीं सदी से मिलता है।

(ग) हिन्दी के आदिकवि आठवीं सदी के सरहपाद थे। उनकी पुस्तक ‘दोहाकोश’ है जो दसवीं-ग्यारहवीं सदी की लिपि में लिखी गई है।

(घ) आधुनिक भारतीय भाषाओं में मराठी, बंगला आदि का जन्म भी आठवीं-नौवीं सदी में होने लगा था।


8. ग्यारहवीं सदी से नागरी लिपि में प्राचीन मराठी भाषा के लेख मिलने लग जाते हैं। अक्ष (कुलाबां जिला) से शिलाहार शासक केशिदेव (प्रथम) का एक शिलालेख (1012 ई०) मिला है, जो संस्कृत, मराठी भाषाओं में है और इसकी लिपि नागरी है। परन्तु दिवे आगर (रत्नागिरि जिला) ताम्रपट पूर्णतः मराठी में है। इसे मराठी का आद्यलेख माना जाता है। नागरी लिपि में लिखा गया यह ताम्रपट 1060 ई. का है।

प्रश्न.
(क) पाठ और लेखक के नाम लिखें।
(ख) नागरी लिपि के लेख कबसे मिलने लगते हैं?
(ग) गद्यांश का सारांश प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर

(क) पाठ-नागरी लिपि। लेखक-गुणाकर मुले।

(ख) नागरी लिपि के लेख ग्यारहवीं सदी से मिलने लगते हैं।

(ग) ग्यारहवीं सदी से नागरी लिपि में मराठी भाषा के लेख मिलने लगते हैं। शिलाहार शासक केशिदेव (प्रथम) का एक शिलालेख 1012 ई का मिला है जो है तो संस्कृत मराठी में लेकिन इसकी लिपि नागरी है। दिवे-आगर में प्राप्त ताम्रपट पूर्णतः मराठी में है। इसे मराठा का आधलेख माना जाता है। यह ताम्रपट 1060 ई. का है।


9. उत्तर भारत में पहले-पहल गुर्जर-प्रतीहार राजाओं के लेखों में नागरी लिपि देखने को मिलती है। अनेक विद्वानों का मत है कि ये गुर्जर-प्रतीहार बाहर से भारत आए थे। ईसा की आठवीं सदी के पूर्वार्द्ध में अवंती प्रदेश में इन्होंने अपना शासन खड़ा किया और बाद में कन्नौज पर भी अधिकार कर लिया था। मिहिर भोज, महेन्द्रपाल आदि प्रख्यात प्रतीहार हुए। मिहिर भोज (840-81 ई.) की ग्वालियर प्रशस्ति नागरी लिपि (संस्कृत भाषा) में है।

प्रश्न.
(क) पाठ और लेखक के नाम लिखें।
(ख) उत्तर भारत में सर्वप्रथम नागरी के लेख किनके शासन-काल में मिलते हैं ?
(ग) किस गुर्जर-प्रतीहार की प्रशस्ति नागरी लिपि में है ?

उत्तर

(क) पाठ-नागरी लिपि। लेखक-गुणाकर मुले।

(ख) उत्तर भारत में पहले-पहले गुर्जर-प्रतीहार राजाओं के लेखों में नागरी लिपि देखने को मिलती है। ईसा की आठवीं सदी के पूर्वार्द्ध में अवंती में और तत्पश्चात् कन्नौज पर भी अधिकार कर लिया था।

(ग) गुर्जर-प्रतीहार राजा मिहिर भोज (840-81 ई०) ग्वालियर प्रशस्ति नागरी लिपि में है।

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