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BSEB Solutions for हिरोशिमा (Hiroshima) Class 10 Hindi Godhuli Part 2 Bihar Board

हिरोशिमा - स० ही० वात्स्यायन अज्ञेय प्रश्नोत्तर

Very Short Questions Answers (अतिलघु उत्तरीय प्रश्न)

प्रश्न 1. हिन्दी काव्य में ‘अज्ञेय’ ने क्या किया?
उत्तर

हिन्दी-काव्य में ‘अज्ञेय’ ने छायावाद की धारा को प्रगतिवाद में समाहित किया और प्रयोगवाद की शुरुआत की।


प्रश्न 2. ‘तार सप्तक’ क्या है ?
उत्तर

तार सप्तक’ सात प्रयोगधर्मी कवियों के काव्य का संकलन है।


प्रश्न 3. ‘काल-सूर्य’ का अर्थ क्या है ?
उत्तर
काल-सूर्य का अर्थ है मृत्यु का सूरज।


प्रश्न 4. ‘अज्ञेय’ किस-किस साहित्य-पुरस्कार से सम्मानित हुए ?
उत्तर
‘अज्ञेय’ को साहित्य अकादमी के अतिरिक्त ज्ञानपीठ सुगा (युगोस्लाविया) का अंतर्राष्ट्रीय स्वर्णमाल और अनेकों पुरस्कार से सम्मानित किया गया।


प्रश्न 5. ‘अज्ञेय’ ने किस साप्ताहिक पत्र का संपादन कर हिन्दी पत्रकारिता का हिमालय खड़ा किया?
उत्तर
‘अज्ञेय’ ने साप्ताहिक ‘दिनमान’ का संपादन कर हिन्दी पत्रकारिता का हिमालय खड़ा किया।


प्रश्न 6. “हिरोशिमा’ कविता किस छंद में लिखी गई है ?
उत्तर

‘हिरोशिमा’ कविता मुक्त छंद में लिखी गई है।


Short Question Answers (लघु उत्तरीय प्रश्न)

प्रश्न 1. कविता के प्रथम अनुच्छेद में निकलने वाला सूरज क्या है ? वह कैसे निकलता है ?
उत्तर

कविता के प्रथम अनुच्छेद में निकलने वाला सूरज आण्विक हथियार है। जब वह निकलता है तो प्रलयंकारी दृश्य उपस्थित कर देता है। मनुष्य, जीव-जन्तु, पत्थर आदि सब कुछ भाप बनकर उड़ जाते हैं।

प्रश्न 2. छायाएँ दिशाहीन सब ओर क्यों पड़ती हैं ? स्पष्ट करें।
उत्तर

दोपहर में जब सूर्य पूर्व में होता है तो छायाएँ पश्चिम और अर्थात् विपरीत दिशा (दिशाहीन) की ओर पड़ती है।

प्रश्न 3. प्रज्वलित क्षण की दोपहरी से कवि का आशय क्या है?
उत्तर

जब किसी क्षेत्र पर परमाणु बम गिराया जाता है तो सब कुछ जलने लगता है। मानो प्रलयंकारी सूर्य दोपहर के समय प्रज्वलित जैसा होकर सबको सोख रहा है अर्थात् सब जल जाते हैं।

प्रश्न 4. मनुष्य की छायाएँ कहाँ और क्यों पड़ी हुई हैं ?
उत्तर

मनुष्य की छायाएँ हिरोशिमा क्षेत्र में पड़ी हैं। अर्थात् मानव की छाया (प्रतीक) चिह्न अभी भी देखा जा सकता है कि किस प्रकार की बर्बादी (त्रासदी) वहाँ मचाया गया। मानव तो भाप बनकर उड़ गये लेकिन उनकी छाया ( प्रतीक) अभी भी मौजूद है। एक साक्षी के रूप में।

प्रश्न 5. हिरोशिमा में मनुष्य की साखी के रूप में क्या है ?
उत्तर

हिरोशिमा में परमाणु बम गिराया सब कुछ भाप बनकर उड़ गया। मनुष्य उड़ गये । चारों ओर बर्बादी ही बर्बादी हुई। हिरोशिमा में उस नरसंहार की छाया अभी भी हिरोशिमा में देखी जा सकती है। अर्थात् वहाँ का दृश्य स्पष्ट बयान करता है मानव त्रासदी का। हिरोशिमा का वह दृश्य मनुष्य की साखी रूप में है।

Long Question Answer (दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)

प्रश्न 1. 'हिरोशिमा' शीर्षक कविता का सारांश लिखें।
उत्तर

हिरोशिमा जापान का शहर है। जापान को उगते हुए सूरज का देश - कहा जाता है। एक दिन प्रलयंकारी सूर्य के समान हिरोशिमा शहर के चौक पर परमाणु बम का विस्फोट हुआ जो दिशाहीन मानव के मस्तिष्क की उपज थी। काल के प्रलयंकारी तांडव से जापान की रुक गईं। मानो उगते हुए सूर्य के रथ के पहिये का अरे (कील) टूट गया हो और रथ के हरेक पाट-पुर्जे दिशाओं में बिखर गये हों। वही स्थिति जापान की हुई।
क्षण भर में उदय सूर्य का देश कहलाने वाला अस्त हो गया। एक क्षण में सब कुछ जल गया। मानो प्रलयंकारी सूर्य अपने दोपहरी रूप में सबकुछ सोख लिया है। कितने मनुष्य भाप बनकर उड़ गये, कितने की लाशें धरती पर बिछ गई, पत्थरों पर सड़कों पर सब जगह लाश ही लाश।
जिस मानव ने उगते हुए सूर्य का देश जापान को बनाया, वही मानव, मानव को भाप बनाकर सोख लिया। जापान का यह विध्वंसकारी घटना दिशाहीन मानव के कुकृत्य का साक्षी (गवाह) है।


काव्यांशों पर आधारित प्रश्नोत्तर

1. एक दिन सहसा
सूरज निकला
अरे क्षितिज पर नहीं,
नगर के चौक
धूप बरसी
पर अन्तरिक्ष से नहीं,
फटी मिट्टी से।
छायाएँ मानव-जन की
दिशाहीन
सब ओर पड़ीं-वह सूरज
नहीं उगा था पूरब में, वह
बरसा सहसा
बीचों-बीच नगर के
काल-सूर्य के रथ के
पहियों के ज्यों अरे टूट कर
बिखर गये हों
दसों दिशा में।

प्रश्न.
(क) कवि तथा कविता का नाम लिखिए।
(ख) पद्यांश का प्रसंग लिखें।
(ग) पद्यांश का सरलार्थ लिखें।
(घ) भाव-सौंदर्य स्पष्ट करें।
(ङ) काव्य-सौंदर्य स्पष्ट करें।

उत्तर

(क) कविता–हिरोशिमा।
कवि-सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’।

(ख) प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश में प्रयोगवादी विचारधारा के प्रमुख कवि अज्ञेय ने आधुनिक सभ्यता का दुर्दात मानवीय विभीषिका का चित्रण किया है। जापान के प्रमुख शहर हिरोशिमा पर मानव जाति ने आण्विक तत्त्वों का क्रूरता के साथ दुरुपयोग करने से जो भीषणतम परिणाम सामने आया उसी का एक साक्ष्य है। इस साक्ष्य के माध्यम से कवि एक अनिवार्य चेतावनी दे रहे हैं।

(ग) सरलार्थ-प्रस्तुत पद्यांश में जापान के प्रमुख शहर हिरोशिमा पर अमरीका द्वारा क्रूरता से जब आण्विक आयुध का प्रयोग किया गया तो हिरोशिमा तो क्या संपूर्ण विश्व की सभ्यता कराह उठी। उस भीषणतम आण्विक शक्ति के प्रयोग के बाद जो हिरोशिमा की स्थिति हुई उसी स्थिति का वर्णन कवि साक्ष्य के धरातल पर करते हैं। कवि कहते हैं कि अचानक एक प्रचण्ड ज्वाला से प्रज्वलित धरातल को फोड़ता हुआ आण्विक बम रूपी सूरज निकला। हिरोशिमा नामक शहर के खबूसरत चौक चौराहे पर प्रचण्ड ताप लिये हुए धूप निकली।
यह धूप अंतरिक्ष के स्थल से नहीं निकलकर धरती की छाती को फोड़कर निकली और अपनी प्रचण्डता को बिखरती हुई पूरे हिरोशिमा को जलाने लगी। बम विस्फोट से चारों ओर इतनी ज्वाला फैली कि समस्त जन-जीवन क्रूरता के गाल में समाहृत हो गया। प्रकृति प्रदत्त सूरज जब पूरब से उगता है तब एक निश्चित दिशा में निश्चित छाया बनती है लेकिन इस आण्विक बम रूपी सूर्य के उगने से समस्त जीवों की छायाएँ जहाँ-तहाँ पड़ी हुई मिलीं। जैसे लगा कि पूर्व दिशा का एक सूरज नहीं उगा है चारों ओर सूर्य ही सूर्य उगा हुआ है। कवि साक्ष्य के आधार पर कहते हैं कि जैसे लगता है महाकाल-रूपी सूर्य के रथ के पहिये टूटकर दसों दिशाओं के साथ शहर के केन्द्र में बिखर गये हैं। अर्थात् चारों ओर हाहाकार और कोहराम की ध्वनि गुजित हो रही है। आधुनिक सभ्यता की दुर्दात मानवीय विभीषिका चित्र दिखाई पड़ रहे थे। विनाश का भीषणतम लीला का रूप मुंह बाये खड़ा था।

(घ) भाव-सौंदर्य – प्रस्तुत पद्यांश का भाव पूर्ण रूप से चित्रात्मक शैली में उद्धत है। प्रयोगवादी वातावरण स्पष्ट रूप से मिल रहे हैं। हिरोशिमा पर बम विस्फोट के बाद उभरे हुए नतीजे वर्षों तक मानव के, संवेदनाओं को झकझोर रहे हैं और जैसे उनसे प्रश्न पूछ रहे हैं कि क्या तुम्हारी सभ्यता की यही पहचान है?

(ङ) काव्य-सौंदर्य-
(i) कविता की भाषा पूर्णतः खड़ी बोली है।
(ii) यहाँ तद्भव के साथ तत्सम शब्दों का प्रयोग अर्थ की गंभीरता में सहायक है।
(iii) सम्पूर्ण कविता मुक्तक छंद में लिखी गयी है।
(iv) अलंकार योजना की दृष्टि से उपमा, अनुप्रास, दृष्टांत की छटा प्रशंसनीय है।
(v) इसमें वस्तु, भाव, भाषा, शिल्प आदि के धरातल पर प्रयोगों और नवाचरों की बहुलता है।
(vi) कविता में प्रयोगवाद की झलक मिल रही है।
(vii) ओजगुण में लिखी कविता भाव को सार्थक बना रही है।


2. कुछ क्षण का वह उदय-अस्त !
केवल एक प्रज्वलित क्षण की
दृश्य सोख लेने वाली दोपहरी।
फिर?
छायाएँ मानव जन की
नहीं मिटीं लम्बी हो-हो कर;
मानव ही सब भाप हो गये।
छायाएँ तो अभी लिखी हैं
झुलसे हुए पत्थरों पर
उजड़ी सड़कों की गच पर।
मानव का रचा हुआ सूरज
मानव को भाप बना कर सोख गया।
पत्थर पर लिखी हुई यह
जली हुई छाया
मानव की साखी है।

प्रश्न.
(क) कवि तथा कविता का नाम लिखें।
(ख) पद्यांश का प्रसंग लिखें।
(ग) पद्यांश का सरलार्थ लिखें।
(घ) भाव-सौंदर्य स्पष्ट करें।
(ङ). काव्य-सौंदर्य स्पष्ट करें।

उत्तर

(क) कविता-हिरोशिमा।
कवि- सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’।

(ख) प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश में कवि अज्ञेय हिरोशिमा पर हुए बम विस्फोट के कठोरतम परिणाम का साक्ष्य प्रकट करते हैं। साक्ष्य इतना अमानवीय है कि आज भी इसके समस्त मानस पटल पर किसी-न-किसी रूप में उभरते रहते हैं।

(ग) सरलार्थ- इतिहास प्रसिद्ध हिरोशिमा की घटना आज भी राजनीति से उपजते संकट की आशंकाओं से जुड़ी हुई है। कवि कहते हैं कि यह घटना कुछ क्षण के उदयास्त में इस तरह का दोपहरी वातावरण निर्माण हुआ जिसमें केवल धूप की प्रचण्डता ही थी। वह प्रचण्डता उदय-अस्त के वातावरण को मिटाकर केवल ज्वलनशीलता रूपी दोपहर सामने उभरकर आया।
अनेक लोग जलकर राख हो गये। जो जहाँ था इस आण्विक बम प्रयोग से वहीं मरकर सट गया। जिसके दाग और निशान वर्षों तक अंकित रहे। मानवीय छायाएँ इतनी लम्बी और गहरी हुई कि अभी भी यह अंकित है। जैसे लगा कि सभी मानव भाप बनकर ब्रह्माण्ड में व्याप्त हो गये हैं। ज्वाला इतनी भीषण थी कि पत्थर भी झुलस गए। सड़कें क्षत-विक्षत हो गईं। मानव के द्वारा निर्मित बम रूपी सूरज खुद मानव को ही भाप बनाकर सोख गया। अर्थात् मानव के द्वारा रचित यह आण्विक बम मानव को ही विनाश कर बैठा। आज भी जहाँ-तहाँ मरे हुए मानव की छाया जो अंकित है वह आधुनिक सभ्यता की दुर्दात मानवीय विभीषिका की कहानी का गवाह है।

(घ) भाव-सौंदर्य प्रस्तुत अंश में अतीत की भीषणतम मानवीय दुर्घटना का साक्ष्य प्रकट किया गया है। साथ ही आण्विक आयुधों की होड़ में फंसी आज की वैश्विक राजनीति से उपजते
संकट की आशंकाओं से जुड़ी हुई है।

(ङ) काव्य-सौंदर्य-
(i) कविता खड़ी बोली में है।
(ii) सम्पूर्ण कविता में प्रयोगवाद की झलक मिलती है। स्वतंत्र छंद में लिखी कविता मुक्तक की पहचान करा रही है।
(ii) साहित्यिक गुण की दृष्टि से ओज गुण के अंश देखने को मिल रहे हैं।
(iv) इसमें वस्तु, भाव, भाषा, शिल्प आदि के धरातल पर प्रयोगों और नवाचरों की बहुलता है। अलंकार की योजनाओं से उपमा पुनरुक्ति प्रकाश एवं अनुप्रास की छटा प्रशंसनीय है।

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