पाठ 4 - भूमंडलीकृत विश्व का बनना इतिहास के नोट्स| Class 10th

पठन सामग्री और नोट्स (Notes)| पाठ 4 - भूमंडलीकृत विश्व का बनना (Bhumandalikrit vishv ka banana) Itihas Class 10th

परिचय

• वैश्वीकरण एक आर्थिक प्रणाली है जो दुनिया भर में माल, प्रौद्योगिकी, विचारों और लोगों के मुक्त आवाजाही से जुड़ी हुई है।

अनुभाग 1 : आधुनिक युग से पहले

रेशम मार्ग (सिल्क रूट)

• रेशम मार्ग कई सारे हैं जो जमीन और समुद्र के रास्ते से एशिया के विशाल क्षेत्रों को आपस जोड़ने का काम करते हैं और एशिया को यूरोप एवं उत्तरी अफ्रीका के साथ जोड़ता है।

• इसी रास्ते से प्रसिद्ध चीनी पॉटरी जाती थी।

भोजन की यात्रा: स्पघेत्ती और आलू

• माना जाता है की नूडल्स चीन से पश्चिम में पहुँचा और वही स्पघेत्ती का जन्म हुआ।

• क्रिस्टोफर कोलंबस द्वारा अमेरिका की खोज के बाद ही आलू, सोया, मूंगफली, मक्का, टमाटर, मिर्च, मीठे आलू जैसे खाद्य पदार्थ यूरोप और एशिया में पहुँचा था।

विजय, बीमारी और व्यापार

• पेरू और मेक्सिको की खानों से निकलने वाली कीमती धातुओं ने यूरोप एवं एशिया के बीच व्यापार को गति प्रदान किया।

• अमेरिका पर विजय पाने के लिए स्पेनिश सेनाओं ने हथियार के रूप में चेचक के कीटाणुओं का इस्तेमाल किया था।

• अठारहवीं शताब्दी का काफी समय बीत जाने के बाद तक भारत और चीन दुनिया के सबसे अमीर देशों में से गिना जाता था।

• भारत और चीन अठारहवीं शताब्दी के काफी समय बाद तक दुनिया के सबसे अमीर देशों में से गिना जाता था।

• उन्नीसवीं सदी तक यूरोप में गरीबी और भुखमरी का ही साम्राज्य था।

अनुभाग 2 : उन्नीसवीं सदी (1815-1914)

• अठारहवीं शताब्दी के बाद में ब्रिटेन की आबादी में तेज़ी से बढ़ने लगी जिससे खाद्यान्न की मांग में वृद्धि हुई।

• ब्रिटेन में कम कीमतों पर खाद्य पदार्थों का आयत किया जा सकता था।

• ब्रिटेन में आयात की गई खाद्य पदार्थों की कीमत देश में पैदा होने वाली खाद्य पदार्थों की कीमत से कम था।

• खाद्य पदार्थों को एक जगह से दूसरे जगह ले जाने के लिए रेल और पानी के जहाजों का प्रयोग किया जाता था।

• भोजन तो सिर्फ एक उदाहरण मात्रा है। कुछ ऐसी ही कहानी कपास, रबर, कोयला जैसे उत्पादों का हुआ।

तकनीक की भूमिका

• रेलवे, भाप के जहाज और टेलीग्राफ महत्वपूर्ण आविष्कार थे जिन्होंने उन्नीसवीं सदी के परिवर्तनों में अहम भूमिका निभाई।

• प्रशीतित तकनीक के आने के बाद जानवरों के मांस को प्रशीतित में डालकर फिर जमे हुए के रूप में जहाजों से यूरोप भेजा जाने लगा।

उन्नीसवीं सदी के आखिर में उपनिवेशवाद

• उपनिवेश के रूप में एशिया और अफ्रीका की यूरोपीय विजय।

• बेल्जियम और जर्मनी नई औपनिवेशिक ताकत के रूप में उभरे।

• अमेरिका 1890 के आखरी वर्षों में एक उपनिवेशिक ताकत बन गया जिसने पहले स्पेन द्वारा कब्जे में रह चुके कुछ उपनिवेशों को अपने कब्जे में ले लिया था।

रिंडरपेस्ट या मवेशी प्लेग

• 1880 के दशक में अफ्रीका के मवेशीयों में प्लेग की तरह तेजी से फैलने पशु रोग था।

• अब औपनिवेशिक सरकारें अपनी शक्तियों को मजबूत करती हैं और अफ्रीकी लोगों को श्रम बाजार में आने के लिए मजबूर करती है।

भारत से अनुबंधित श्रमिकों का जाना

• गिरमिटिया श्रमिक एक नियोक्ता के काम के लिए अनुबंध के तहत एक बंधुआ मजदूर था।

• उन्नीसवीं सदी में भारत और चीन के लाखों मजदूरों को दुनिया के विभिन्न देशों में वृक्षारोपण, खदानों और सड़क और रेलवे निर्माण परियोजनाओं में काम करने के लिए ले जाया जाता था।

• एजेंटों द्वारा काम और स्थान के बारे में झूठी जानकारियॉं देकर अनुबंध कराया जाता था।

• बागानों में पहुंचने पर मजदूरों ने रहने और काम करने की परिस्थितियों को बहुत कठोर पाया।

• 1921 में इसे समाप्त कर दिया गया था।

विदेश में भारतीय उद्यमी

• भारतीय उद्यमियों, कुछ बैंकरों जैसे नट्टुकोट्टई और चेट्टियार ने मध्य और दक्षिण-पूर्व एशिया में निर्यातोमुखी खेती के लिए कर्ज़ देते थे।
→ भारतीय व्यापारीयों ने यूरोपियों का अफ्रीका तक पीछा किया।

• इंग्लैंड में औद्योगिक क्रांति ने इंग्लैंड और भारत के बीच द्विपक्षीय व्यापार में असंतुलन पैदा कर दिया।

• भारतीय हस्तकला और कृषि का विदेशी बाजार खत्म हो गया और ब्रिटेन ने व्यापार अधिशेष का फायदा उठाया।
→ निर्यात बढ़ा और आयात पर निर्भरता कम हो गई।

अनुभाग 3 : महायुद्धों के बीच अर्थव्यवस्था

• प्रथम विश्व युद्ध प्रथम आधुनिक औद्योगिक युद्ध भी था।

• युद्ध के दौरान युद्ध में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं के उत्पादन के लिए उद्योगों का पुनर्गठन किया गया था।

• इस युद्ध ने अमेरिका को कर्जदार की बजाय कर्जदाता देश बना दिया।

युद्धोत्तर सुधार

• युद्ध समाप्त होने के बाद उत्पादन गिरने लगा और बेरोजगारी में बढ़ोतरी हुई।

बड़े पैमाने पर उत्पादन और उपभोग

• युद्ध के बाद अमेरिका में सुधार के गति तेज़ रही थी।

• हेनरी फोर्ड द्वारा अपनाई गई 'असेंबली लाइन' पद्धति जल्दी ही पूरे अमेरिका में फैल गई और 1920 के दशक तक यूरोप में भी नकल की जाने लगी।

• वृहत उत्पादन पद्धति ने इंजीनियरिंग आधारित चीज़ों की लागत और कीमत में कमी ला दी।

• 1920 के दशक में आवास और निर्माण क्षेत्र में काफी उछाल था लेकिन यह स्थति ज्यादा दिनों तक कायम नहीं रहा और 1929 तक में महामंदी में फँस गया।

• 1929 में अर्थव्यवस्था काफी कमजोर थी, बैंकों की विफलता और कर्ज़ संकट ने अन्य देशों को प्रभावित किया।

• 1929-32 के बीच लगभग 110,000 कंपनियां चौपट हो गईं और 1933 तक 4000 से ज्यादा बैंक बंद हो चुके थे।

भारत और महामंदी

• भारत भी महामंदी से प्रभावित हुआ था।

• भारतीय आयात और निर्यात में भारी गिरावट आई और कीमतें भी नीचे आ गई।

• बंगाल के जूट उत्पादकों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ।

• गाँवों से कस्बों और शहरों में पलायन बड़े पैमाने पर हुआ।

अनुभाग 4: विश्व अर्थव्यवस्था का पुनर्निर्माण: युद्धोत्तर काल

• प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति के केवल दो दशक बाद द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हुआ और एक बार फिर से यह विनाश का कारण बना।

• अमेरिका और सोवियत संघ महाशक्तियों के रूप में उभरा।

युद्धोत्तर बंदोबस्त और ब्रेटन-वुड्स संस्थान

• आर्थिक स्थिरता और पूर्ण रोज़गार सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका में स्थति न्यू हैम्पशर के ब्रेटन वुड्स नामक स्थान पर आयोजित संयुक्त राष्ट्र के मौद्रिक और वित्तीय सम्मेलन में एक रूपरेखा पर सहमति बनी थी।

• इसी ने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक की स्थापना की।

• अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) अपने सदस्य देशों के बीच व्यापार के फायदे और नुकसान की देखरेख करता है।

• अंतर्राष्ट्रीय पुनर्निर्माण और विकास बैंक (विश्व बैंक) को युद्ध के बाद के पुनर्निर्माण के लिए स्थापित किया गया था।

• आईएमएफ और विश्व बैंक ने 1947 में वित्तीय परिचालन शुरू किया।

• ब्रेटन वुड्स व्यवस्था एक निश्चित विनिमय दरों पर आधारित होती थी।

• राष्ट्रीय मुद्राओं को एक निश्चित दर पर अमेरिकी डॉलर में ऑंका गया था।

• इन संस्थानों में बड़े पैमाने पर निर्णय लेने का अधिकार पश्चिमी औद्योगिक शक्तियों के पास था।

अनौपनिवेशीकरण और स्वतंत्रता

• संयुक्त राष्ट्र और NAM द्वारा समर्थित एशिया और अफ्रीका के ज्यादातर उपनिवेश स्वतंत्र और स्वाधीन राष्ट्र चुके थे।

• विकासशील देशों द्वारा एक नए अंतरराष्ट्रीय आर्थिक प्रणाली (NIEO) की मांग की गई और 77 या G-77 के रूप में संगठित हो गए। जो इन देशों को उनके राष्ट्रीय संसाधनों, कच्चे माल और उनके बाजारों में निर्मित वस्तुओं को उचित बाजार प्रदान करता था।

• बहुराष्ट्रीय कंपनियों की स्थापना 1950 और 1960 के दशक में की गई थी और इनका संचालन कई देशों में होता था।


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