Notes of Kshitiz Part I Class 9th

NCERT Notes of Kshitiz Part I Class 9th (पठन सामग्री और सार)

Kshitiz Class 9th is the main textbook of Course A. The book contains total seventeen chapters of which first eight are stories and another nine are poems. The chapters will try to develop their linguistic realm and ideological prosperity in the students. The poems will strengthen their linguistic skills and sensitivity. At the same time, it also enhances the sense of beauty. If you're finding the language difficult to understand or less time to read then you can take help from the notes of Kshitiz Part I Class 9th prepared by StudyRankers. It will help you in understanding the chapter clearly and efficiently. You only need to select the chapter from the list and get started.

Notes of पाठ 1 दो बैलों की कथा
Notes of पाठ 2 ल्हासा की ओर
Notes of पाठ 3 उपभोक्तावाद की संस्कृति
Notes of पाठ 4 साँवले सपनों की याद
Notes of पाठ 5 नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कर दिया गया
Notes of पाठ 6 प्रेमचंद के फटे जूते
Notes of पाठ 7 मेरे बचपन के दिन
Notes of पाठ 8 एक कुत्ता और एक मैना
Notes of पाठ 9 साखियाँ एवं सबद
Notes of पाठ 10 वाख
Notes of पाठ 11 सवैये
Notes of पाठ 12 कैदी और कोकिला
Notes of पाठ 13 ग्राम श्री
Notes of पाठ 14 चंद्र गहना से लौटती बेर
Notes of पाठ 15 मेघ आए
Notes of पाठ 16 यमराज की दिशा
Notes of पाठ 17 बच्चे काम पर जा रहे हैं

Notes of Kshitiz Part I Class 9th


पाठ 1 - दो बैलों की कथा

इस कथा के माध्यम से प्रेमचंद ने कृषक समाज और पशुओं के भावात्मक संबंध को बताया है। चूँकि ये कहानी आजादी से पहले की है इसीलिए ये भी सन्देश देती है कि स्वतंत्रता आसानी से नहीं मिलती, उसके लिए बार-बार संघर्ष करना पड़ता है।

पाठ 2 - ल्हासा की ओर

यह अंश राहुल जी की प्रथम तिब्बत यात्रा से लिया गया है जो उन्होंने सन् 1929-30 में नेपाल के रास्ते की थी। उस समय भारतीयों को तिब्बत यात्रा की अनुमति नहीं थी, इसलिए उन्होंने यह यात्रा एक भिखमंग के छद्म वेश में की थी।

पाठ 3 - उपभोक्तावाद की संस्कृति

इस निबंध में लेखक बाजार की गिरफ्त में आ रहे समाज की वास्तविकता को प्रस्तुत करता है। लेखक का मानना है कि हम विज्ञापन की चमक-दमक के कारण वस्तुओं के पीछे भाग रहे हैं, हमारी निगाह गुणवत्ता पर नहीं है।

पाठ 4 - साँवले सपनों की याद

जून 1987 में प्रसिद्ध पक्षी विज्ञानी सालिम अली की मृत्यु के तुरंत बाद डायरी शैली में लिखा गया संस्मरण है। सालिम अली की मृत्यु से उत्पन्न दुख और अवसाद को लेखक ने साँवले सपनों की याद के रूप में व्यक्त किया है।

पाठ 5 - नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कर दिया गया

यह एक ऐतिहासिक सच्चाई है कि सन् 1857 की क्रांति के विद्रोही नेता धुंधूपंत नाना साहब की पुत्री बालिका मैना आज़ादी की नन्हीं सिपाही थी जिसे अंग्रेजों ने जलाकर मार डाला। बालिका मैना के बलिदान की कहानी को चपला देवी ने इस गद्य रचना में प्रस्तुत किया है।

पाठ 6 - प्रेमचंद के फटे जूते

प्रेमचंद के फटे जूते शीर्षक निबंध में परसाई जी ने प्रेमचंद के व्यक्तित्व की सादगी के साथ एक रचनाकार की अंतर्भेदी सामाजिक दृष्टि का विवेचन करते हुए आज की दिखावे की प्रवृत्ति एवं अवसरवादिता पर व्यंग्य किया है।

पाठ 7 - मेरे बचपन के दिन

मेरे बचपन के दिन में महादेवी जी ने अपने बचपन के उन दिनों को स्मृति के सहारे लिखा है जब वे विद्यालय में पढ़ रही थीं। इस अंश में लड़कियों के प्रति सामाजिक रवैये, विद्यालय की सहपाठिनों, छात्रावास के जीवन और स्वतंत्रता आंदोलन के प्रसंगों का बहुत ही सजीव वर्णन है।

पाठ 8 - एक कुत्ता और एक मैना

एक कुत्ता और एक मैना निबंध में पशु-पक्षियों के प्रति मानवीय प्रेम प्रदर्शित है| इसमें रवींद्रनाथ की कविताओं और उनसे जुड़ी स्मृतियों के सहारे गुरुदेव की संवेदनशीलता, आंतरिक विराटता और सहजता के चित्र
तो उकेरे ही गए हैं, पशु-पक्षियों के संवेदनशील जीवन का भी बहुत सूक्ष्म निरीक्षण | है। यह निबंध सभी जीवों से प्रेम की प्रेरणा देता है।

पाठ 9 - साखियाँ एवं सबद

यहाँ संकलित साखियों में प्रेम का महत्व, संत के लक्षण, ज्ञान की महिमा, बाह्याडंबरों का विरोध आदि भावों का उल्लेख हुआ है। पहले सबद  में बाह्याडंबरों का विरोध एवं अपने भीतर ही ईश्वर की व्याप्ति का संकेत है तो दूसरे सबद में ज्ञान की आँधी के रूपक के सहारे ज्ञान के महत्व का वर्णन है।

पाठ 10 - वाख

पहले वाख में ललद्यद ने ईश्वर-प्राप्ति के लिए किए जाने वाले | अपने प्रयासों की व्यर्थता की चर्चा की है। दूसरे में बाह्याडंबरों का विरोध करते हुए यह कहा गया है कि अंत:करण से समभावी होने पर ही मनुष्य की चेतना व्यापक हो सकती है। तीसरे वाख में कवयित्री के आत्मालोचन की अभिव्यक्ति है। वे अनुभव करती हैं कि भवसागर से पार जाने के लिए सद्कर्म ही सहायक होते हैं।

पाठ 11 - सवैये

पहले और दूसरे सवैये में कृष्ण और कृष्ण-भूमि के प्रति कवि का अनन्य समर्पण भाव व्यक्त हुआ है। तीसरे छंद में कृष्ण के रूप-सौंदर्य के प्रति गोपियों की उस मुग्धता का चित्रण है जिसमें वे स्वयं कृष्ण का रूप धारण कर लेना चाहती हैं। चौथे छंद में कृष्ण की मुरली की धुन और उनकी मुसकान के अचूक प्रभाव तथा गोपियों की विवशता का वर्णन है|

पाठ 12 - कैदी और कोकिला

यह कविता भारतीय स्वाधीनता सेनानियों के साथ जेल में किए गए दुर्व्यवहारों और यातनाओं का मार्मिक साक्ष्य प्रस्तुत करती है। कवि जेल में एकाकी और उदास है। कोकिल से अपने मन का दुख, असंतोष और ब्रितानी शासन के प्रति अपने आक्रोश को व्यक्त करते हुए वह कहता है कि यह समय मधुर गीत गाने का नहीं बल्कि मुक्ति का गीत सुनाने का है।

पाठ 13 - ग्राम श्री

ग्राम श्री कविता में पंत ने गाँव की प्राकृतिक सुषमा और समृद्धि का मनोहारी वर्णन किया है। खेतों में दूर तक फैली लहलहाती फसलें, फल-फूलों से लदी पेड़ों की डालियाँ और गंगा की सुंदर रेती कवि को रोमांचित करती है।

पाठ 14 - चंद्र गहना से लौटती बेर

प्रस्तुत कविता में कवि का प्रकृति के प्रति गहन अनुराग व्यक्त हुआ है। वह चंद्र गहना नामक स्थान से लौट रहा है। लौटते हुए उसके किसान मन को खेत-खलिहान एवं उनका प्राकृतिक परिवेश सहज आकर्षित कर लेता है।  इसी बात को वह कविता को द्वारा दर्शा रहे हैं| 

पाठ 15 - मेघ आए

कविता में कवि ने मेघों के आने की तुलना सजकर आए प्रवासी अतिथि (दामाद) से की है। ग्रामीण संस्कृति में दामाद के आने पर उल्लास का जो वातावरण बनता है, मेघों के आने का सजीव वर्णन करते हुए कवि ने उसी उल्लास को दिखाया है।

पाठ 16 - यमराज की दिशा

कविता में कवि सभ्यता के विकास की खतरनाक दिशा की ओर इशारा करते हुए कहना चाहता है कि जीवन-विरोधी ताकतें चारों तरफ़ फैलती जा रही हैं। 

पाठ 17 बच्चे काम पर जा रहे हैं

प्रस्तुत कविता में बच्चों से बचपन छीन लिए जाने की पीड़ा व्यक्त हुई है। कवि ने उस सामाजिक-आर्थिक विडंबना की ओर इशारा किया है जिसमें कुछ बच्चे खेल, शिक्षा और | जीवन की उमंग से वंचित हैं।



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