NCERT Solutions for Class 10th: पाठ 2- इंडो-चाइना में राष्ट्रवादी आंदोलन

NCERT Solutions for Class 10th: पाठ 2-  इंडो-चाइना में राष्ट्रवादी आंदोलन (Indo-China me Rashtrawadi Aandolan) Itihas

पृष्ठ संख्या: 28

संक्षेप में लिखें

1. निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें -
(क) उपनिवेशकारों के ‘सभ्यता मिशन' का क्या अर्थ था।
(ख) हुइन फू सो। 

उत्तर

(क) ब्रिटेन और फ्रांस जैसे यूरोपीय उपनिवेशवादियों का मानना था कि यूरोप में सबसे विकसित सभ्यता कायम हो चुकी है। इसीलिए वे मानते थे कि उपनिवेशों में आधुनिक विचारों का प्रसार करना यूरोपियों का ही दायित्व है।
और इस दायित्व की पूर्ति करने के लिए अगर उन्हें स्थानीय संस्कृतियों, धर्मों व परंपराओं को भी नष्ट करना पड़े तो इसमें कोई बुराई नहीं है। उन्हें लगता था कि ये चीजें आधुनिक विकास को रोकती हैं।

(अनुच्छेद -1, पृष्ठ संख्या 34)

(ख) हुइन्ह फू सो होआ हाओ नामक एक राष्ट्रवादी आंदोलन के संस्थापक थे। वह जादू-टोना और गरीबों की मदद किया करते थे। व्यर्थ खर्चे के खिलाफ उनके उपदेशों का लोगों में काफी असर था। वह बालिका वधुओं की खरीद-फरोख्त, शराब व अफीम के प्रखर विरोधी थे। फ्रांसीसियों ने हुइन्ह फू सो के विचारों पर आधारित आंदोलन को कुचलने का कई तरह से प्रयास किया। उन्होंने फू सो को पागल घोषित कर दिया। फ्रांसीसी उन्हें पागल बोन्जे कह कर बुलाते थे। सरकार ने उन्हें पागलखाने में डाल दिया था। फ्रांसीसी सरकार ने उन्हें वियतनाम से निष्कासित करके लाओस भेज दिया। उनके बहुत सारे समर्थकों और अनुयायियों को यातना शिविर में डाल दिया गया।

(अनुच्छेद - 4 और 5, पृष्ठ संख्या 40)

2. निम्नलिखित की व्याख्या करें -
(क) वियतनाम के केवल एक तिहाई विद्यार्थी ही स्कूली पढ़ाई सफलतापूर्वक पूरी कर पाते थे। 
(ख) फ्रांसीसियों ने मेकाँग डेल्टा क्षेत्र में नहरें बनवाना और जमीनों को सुखाना शुरू किया। 
(ग) सरकार ने आदेश दिया कि साइगॉन नेटिव गर्ल्स स्कूल उस लड़की को वापस कक्षा में ले, जिसे स्कूल से निकाल दिया गया था।
(घ) हनोई के आधुनिक, नवनिर्मित इलाकों में चूहे बहुत थे।

उत्तर

(क) वियतनाम के केवल एक तिहाई विद्यार्थी ही स्कूली पढ़ाई सफलतापूर्वक पूरी कर पाते थे क्योंकि बहुत सारे बच्चों को तो आखिरी साल की परीक्षा में जानबूझ कर फेल कर दिया जाता था ताकि अच्छी नौकरियों के लिए योग्यता प्राप्त न कर सकें।

(अनुच्छेद -2, पृष्ठ संख्या 35)

(ख) फ्रांसीसियों ने वियतनाम के मेकोंग डेल्टा क्षेत्र में खेती बढ़ाने के लिए नहरें बनवाना और जमीनों को सुखाना शुरू किया। कई लोगों को ज़बरदस्ती इस काम पर लगाया गया। इस व्यवस्था से चावल के उत्पादन में असाधारण वृद्धि हुई और वियतनाम दूसरों देशों को चावल का निर्यात करने लगा। 1931 तक वियतनाम संसार में चावल का तीसरा बड़ा निर्यातक बन गया।

(अनुच्छेद -3, पृष्ठ संख्या 32)

(ग) साइगॉन नेटिव गर्ल्स स्कूल के प्रिंसिपल ने एक वियतनामी लड़की को निष्कासित कर दिया जब उसने फ्रांसीसी छात्रा के लिए सीट छोड़ने से इंकार कर दिया। जब दूसरे विद्यार्थियों ने प्रिंसिपल के फैसले का विरोध किया तो उन्हें भी स्कूल से निकाल दिया गया। इसके बाद तो यह विवाद और फैल गया। लोग खुलेआम जुलूस निकालने लगे। हालात बेकाबू होने लगे तो सरकार ने आदेश दिया कि लड़की को दोबारा स्कूल में वापस ले लिया जाए।

(अनुच्छेद -2, पृष्ठ संख्या 36)

(घ) हनोई के फ्रांसीसी आबादी वाले हिस्से में निकासी का बढ़िया इंतजाम था। शहर में लगे विशाल सीवर आधुनिकता का प्रतीक थे। यही सीवर चूहों के पनपने के लिए भी आदर्श साबित हुए। ये सीवर चूहों की निर्बाध आवाजाही के लिए भी उचित थे। इनमें चलते हुए चूहे पूरे शहर में बेखटके घूमते थे। और इन्हीं पाइपों के रास्ते चूहे फ्रांसीसियों के चाक-चौबंद घरों में घुसने लगे।

(अनुच्छेद -3, पृष्ठ संख्या 37 | अनुच्छेद -1, पृष्ठ संख्या 38)

3. टोंकिन फ्री स्कूल की स्थापना के पीछे कौन से विचार थे? वियतनाम में औपनिवेशिक विचारों के लिहाज से यह उदाहरण कितना सटीक है?

उत्तर

टोंकिन फ्री स्कूल की स्थापना के पीछे पश्चिमी संस्कृति को बढ़ावा देना और इसे औरों से बेहतर दिखाने के विचार थे। स्कूल की राय में, सिर्फ विज्ञान और पश्चिमी विचारों की शिक्षा प्राप्त कर लेना ही काफी नहीं था : आधुनिक बनने के लिए वियतनामियों को पश्चिम के लोगों जैसा ही दिखना भी पड़ेगा। इसीलिए यह स्कूल अपने छात्रों को पश्चिमी शैलियों को अपनाने के लिए उकसाता था। मसलन, बच्चों को छोटे-छोटे बाल रखने की सलाह दी जाती थी।
यह वियतनाम में औपनिवेशिक विचारों के लिहाज से यह उदाहरण सटीक है क्योंकि इसने पारंपरिक वियतनामी शिक्षा और जीवन शैली को खारिज कर दिया और पश्चिमी शैली की शैली को बढ़ावा दिया। किसी भी अन्य उपनिवेशवादियों की तरह, फ्रांसीसी अपने तथाकथित आधुनिक विचारों के प्रसार करने के लिए अगर उन्हें स्थानीय संस्कृतियों, धर्मों व परंपराओं को भी नष्ट करना पड़े तो इसमें कोई बुराई नहीं समझते थे।

(अनुच्छेद - 4, पृष्ठ संख्या 35)

4. वियतनाम के बारे में फान यू त्रिन्ह का उद्देश्य क्या था? फान बोई चाऊ और उनके विचारों में क्या भिन्नता थी?

उत्तर

फान यू त्रिन्ह विदेशी शासन को उखाड़ फेंकना चाहता था लेकिन साथ ही वह वियतनाम में फ्रेंच कानूनी और शैक्षिक संस्थानों की स्थापना के खिलाफ नहीं था। 
फान बोई चाऊ विदेशी दुश्मनों को वियतनाम से बाहर निकालने के लिए राजतंत्र का उपयोग करना चाहते थे, जबकि फान यू त्रिन्ह राजशाही के इस पर असहमत थे चूँकि वह आम अधिकारों को बढ़ावा देने के लिए राजशाही को उखाड़ फेंकने में विश्वास करते थे।

(अनुच्छेद - 4 और 5, पृष्ठ संख्या 41)

चर्चा करें

1. इस अध्याय में आपने जो पढ़ा है, उसके हवाले से वियतनाम की संस्कृति और जीवन पर चीन के प्रभावों की चर्चा करें।

उत्तर

वियतनाम चीन के शक्तिशाली साम्राज्य का हिस्सा था। जब वहाँ एक स्वतंत्र देश की स्थापना कर ली गई तो भी वहाँ के शासकों ने न केवल चीनी शासन व्यवस्था को बल्कि चीनी संस्कृति को भी अपनाए रखा।

• वियतनाम के अभिजात्य चीनी भाषा और कन्फ्यूशियसवाद में शिक्षा लेते थे। एक वियतनामी राष्ट्रवादी,  फान बोई चाऊ की सबसे प्रभावशाली पुस्तक, द हिस्ट्री ऑफ़ द लॉस ऑफ़ वियतनाम, चीनी सुधारक लियाँग की सलाह और प्रभाव में ही लिखी गई थी।

•  1911 में, चीन में राजशाही नष्ट हो गई और एक गणराज्य स्थापित किया गया था। इनसे प्रेरणा लेते हुए वियतनामी विद्यार्थियों ने भी वियतनाम मुक्ति एसोसिएशन की स्थापना कर डाली।

(अनुच्छेद -1, पृष्ठ संख्या 30 | अनुच्छेद -2, पृष्ठ संख्या 40 | अनुच्छेद - 4, पृष्ठ संख्या 4 | अनुच्छेद - 3, पृष्ठ संख्या 42)

2. वियतनाम में उपनिवेशवाद-विरोधी भावनाओं के विकास में धार्मिक संगठनों की भूमिका क्या थी?

उत्तर

वियतनाम में लोगों के जीवन में धर्म ने हमेशा एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाया। वियतनामियों के धार्मिक विश्वास बौद्ध धर्म, कन्फ्यूशियसवाद और स्थानीय रीति-रिवाजों पर आधारित थे। फ्रांसीसी मिशनरी वियतनाम में ईसाई धर्म के बीज बोने का प्रयास कर रहे थे। उन्हें लगता था कि पराभौतिक शक्तियों को पूजने की वियतनामियों की आदत को सुधारा जाना चाहिए।

• 1868 का स्कॉलर्स रिवोल्ट (विद्वानों का विद्रोह) फ्रांसीसी कब्जे और ईसाई धर्म के प्रसार के खिलाफ़ शुरुआती आंदोलनों में से था। इस आंदोलन की बागडोर शाही दरबार के अफ़सरों के हाथों में थी। ये अफ़सर कैथलिक धर्म और फ्रांसीसी सत्ता के प्रसार से नाराज़ थे। फ्रांसीसियों ने 1868 के आंदोलन को तो कुचल डाला लेकिन इस बगावत ने फ्रांसीसियों के खिलाफ़ अन्य देशभक्तों में उत्साह का संचार जरूर कर दिया।

• 1939 में शुरू हुए होआ हाओ आंदोलन को हरे-भरे मेकोंग डेल्टा इलाके में भारी लोकप्रियता मिली। यह आंदोलन उन्नीसवीं सदी के उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलनों में उपजे विचारों से प्रेरित था। फ्रांसीसी ने हुइन्ह फू सो द्वारा प्रेरित आंदोलन को उसे पागल घोषित कर दबाने की कोशिश की|  फ्रांसीसी सरकार ने उन्हें वियतनाम से निष्कासित करके लाओस भेज दिया। उनके बहुत सारे समर्थकों और अनुयायियों को यातना शिविर में डाल दिया गया।

राजनीतिक दल ऐसे आंदोलनों से जुड़े जनसमर्थन का फ़ायदा उठाने की कोशिश करते थे| इस प्रकार, ये धार्मिक आंदोलन वियतनाम में उपनिवेशवाद-विरोधी भावनाओं के विकास में सफल रहे।

(अनुच्छेद -2 और 3, पृष्ठ संख्या 39 | अनुच्छेद -1, 3, 4,5 और 6, पृष्ठ संख्या 40)

3. वियतनाम युद्ध में अमेरिकी हिस्सेदारी के कारणों की व्याख्या करें। अमेरिका के इस कृत्य से अमेरिका में जीवन पर क्या असर पड़े?

उत्तर

जब उत्तरी वियतनाम में हो ची मिन्ह के नेतृत्व वाली सरकार की सहायता से एन.एल.एफ. ने देश के एकीकरण के लिए आवाज उठाई तबअमेरिका इस गठबंधन की बढ़ती ताकत और उसके प्रस्तावों से भयभीत हो गया कि कहीं पूरे वियतनाम पर कम्युनिस्टों का कब्ज़ा न हो जाए, इस भय से अमेरिका ने अपनी फौजें और गोला-बारूद वियतनाम में तैनात करना शुरू कर दिया। अमेरिकी नीति निर्माता इस बात को लेकर भी चिंतित थे कि अगर हो ची मिन्ह की सरकार अपनी योजनाओं में कामयाब हो गई तो आसपास के दूसरे देशों में भी कम्युनिस्ट सरकारें स्थापित हो जाएँगी।
युद्ध में अमेरिकी भागीदारी का प्रभाव अमेरिका के भीतर महसूस किया गया और बहुत सारे लोग इस बात के लिए सरकार का विरोध कर रहे थे कि उसने देश की फ़ौजों को एक ऐसे युद्ध में झोंक दिया है जिसे किसी भी हालत में जीता नहीं जा सकता। जब युवाओं को भी सेना में भर्ती किया जाने लगा तो लोगों का गुस्सा और बढ़ गया। पर विश्वविद्यालयी स्नातकों को अनिवार्य सैनिक सेवा से मुक्त रखा गया था। इसका अर्थ है कि जिन्हें मोर्चे पर भेजा जा रहा था उनमें से बहुत सारे नौजवान समाज के अभिजात्य वर्ग के नहीं थे। मोर्चे पर भेजे जाने वालों में ज्यादातर अल्पसंख्यक और गरीब मेहनतकशों के बच्चे थे, जिसने अल्पसंख्यकों और मेहनतकश वर्ग के परिवारों के बीच और भी क्रोध पैदा किया।

(अनुच्छेद -3, पृष्ठ संख्या 44 | अनुच्छेद -1, पृष्ठ संख्या 45 | अनुच्छेद -3 और 5, पृष्ठ संख्या 46)

4. अमेरिका के ख़िलाफ़ वियतनामी युद्ध का निम्नलिखित के दृष्टिकोण से मूल्यांकन कीजिए -
(क) हो ची मिन्ह भूलभुलैया मार्ग पर माल ढोने वाला कुली।
(ख) एक महिला सिपाही।

उत्तर

(क) हो ची मिन्ह भूलभुलैया मार्ग सड़कों और फुटपाथों का एक बड़ा विशाल नेटवर्क था। माल ढोने वाले कुली औरत-मर्द लगभग 25 किलो सामान पीठ पर या लगभग 70 किलो सामान साइकिलों पर लेकर निकल जाते थे| उन्हें डर नहीं था कि वे गहरे घाटियों में गिर सकते हैं। वे विमान बंदूकों द्वारा चलने वाली गोलियों से भी नहीं डरे। उन्होंने आपूर्ति लाइन को बनाए रखने के लिए अपने सभी डर को एक तरफ रखा| इस तथ्य से पता चलता है कि माल ढोने वाले कुली वीर और देशभक्त थे।

(अनुच्छेद -2, पृष्ठ संख्या 4)

(ख) वियतनामी महिलाओं ने अमेरिका-वियतनाम युद्ध में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महिलाओं ने ना केवल योद्धा बल्कि कामगारों की भूमिका भी निभाई| उन्होंने छह हवाई पट्टियाँ बनाईं, दसियों हज़ार बमों को बरबाद किया, हजारों किलोग्राम माल ढोया, हथियार व गोला-बारूद की सप्लाई जारी रखी और पंद्रह जहाजों को मार गिराया था। वियतनाम की सेना, मिलीशिया (नागरिक सेना), स्थानीय दस्तों और पेशेवर टोलियों में 15 लाख औरतें काम करती थीं। उन्होंने घायलों की मरहम-पट्टी करने, भूमिगत कमरे व सुरंगें बनाने में भी हिस्सा लिया|

(अनुच्छेद -3 और 4, पृष्ठ संख्या 50)

5. वियतनाम में साम्राज्यवाद विरोधी संघर्ष में महिलाओं की क्या भूमिका थी? इसकी तुलना भारतीय राष्ट्रवादी संघर्ष में महिलाओं की भूमिका से कीजिए।

उत्तर

वियतनाम में साम्राज्य विरोधी साम्राज्य में महिलाओं की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण थी। सबसे पहले, उन्होंने सामाजिक परम्पराओं के खिलाफ विद्रोह किया जिससे वियतनामी समाज में नई महिला का उदय हुआ। चाहे बूढ़ी हो या जवान, महिलाओं ने निःस्वार्थ रूप से काम किया और देश को बचाने के लिए लड़ीं। वे साम्राज्यवादी शक्तियों के खिलाफ प्रतिरोध आंदोलन में शामिल हुईं। उन्होंने घायलों की मरहम-पट्टी करने और भूमिगत कमरे और सुरंगों का निर्माण करने में मदद की। उन्होंने हो ची मिन्ह भूलभुलैया मार्ग पर माल ढोने वाले कुली के रूप में कार्य किया।

भारत में महिलाओं ने राष्ट्रवादी संघर्ष में बड़े पैमाने पर भाग लिया। उन्होंने विरोध प्रदर्शनों में भाग लिया और विदेशी कपड़ों व शराब की दुकानों की पिकेटिंग की। बहुत सारी महिलाएँ जेल भी गई। उन्होंने देश की सेवा को महिलाओं के पवित्र कर्तव्य के रूप में  देखना शुरू किया। हालांकि, उनकी भूमिका बहुत गतिशील नहीं थी और महत्वपूर्ण पद नहीं मिले।

(अनुच्छेद -3, पृष्ठ संख्या 49 | अनुच्छेद -3 और 4, पृष्ठ संख्या 50)
(अध्याय - 3 - अनुच्छेद -3, पृष्ठ संख्या 66 | अनुच्छेद -1, पृष्ठ संख्या 67)

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