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NCERT Solutions for Class 11th: पाठ 16 - जैव-विविधता एवं संरक्षण भूगोल के मूल सिद्धांत (Jaiv Vividhta avm Sanrakshan) Bhautik Bhugol ke Mool Siddhant

अभ्यास

पृष्ठ संख्या: 149

1. बहुवैकल्पिक प्रश्न :

(i) जैव-विविधता का संरक्षण निम्न में किसके लिए महत्वपूर्ण है
(क) जंतु
(ख) पौधे
(ग) पौधे और प्राणी
(घ) सभी जीवधारी
► (घ) सभी जीवधारी

(ii) निम्नलिखित में से असुरक्षित प्रजातियाँ कौन सी है
(क) जो दूसरों को असुरक्षा दें
(ख) बाघ व शेर
(ग) जिनकी संख्या अत्यधिक हों
(घ) जिन प्रजातियों के लुप्त होने का खतरा है|
► (घ) जिन प्रजातियों के लुप्त होने का खतरा है|

(iii) नेशनल पार्क (National parks) और पशुविहार (Sanctuaries) निम्न में से किस उद्देश्य के लिए बनाए गए हैं:
(क) मनोरंजन
(ख) पालतू जीवों के लिए
(ग) शिकार के लिए
(घ) संरक्षण के लिए
► (घ) संरक्षण के लिए

(iv) जैव-विविधता समृद्ध क्षेत्र हैं :
(क) उष्णकटिबंधीय क्षेत्र
(ख) शीतोष्ण कटिबंधीय क्षेत्र
(ग) ध्रुवीय क्षेत्र
(घ) महासागरीय क्षेत्र
► (क) उष्णकटिबंधीय क्षेत्र

(v) निम्न में से किस देश में पृथ्वी सम्मेलन (Earth summit) हुआ था :
(क) यू.के. (U.K.)
(ख) ब्राजील
(ग) मैक्सिको
(घ) चीन
► (ख) ब्राजील

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए:

(i) जैव-विविधता क्या हैं?

उत्तर

किसी निशिचत भौगोलिक क्षेत्र में पाए जने वले जीवों की संख्या और उनकी विविधता को जैव-विविधता कहते हैं| इसका संबंध पौधों के प्रकार, प्राणियों तथा सूक्ष्म जीवाणुओं से है|

(ii) जैव-विविधता के विभिन्न स्तर क्या हैं?

उत्तर

जैव-विविधता के तीन विभिन्न स्तर हैं :
(क) आनुवांशिक जैव-विविधता- किसी प्रजाति में जीन की विविधता ही आनुवांशिक जैव-विविधता है|
(ख) प्रजातीय जैव-विविधता- यह प्रजातियों की अनेकरूपता को बताती है|
(ग) पारितंत्रीय विविधता- प्रत्येक प्रकार के पारितंत्रों में होने वाले आवास स्थानों की भिन्नता ही पारितंत्रीय विविधता कहलाती है|

(iii) हॉट-स्पॉट (Hot spots) से आप क्या समझते हैं?

उत्तर

जिन क्षेत्रों में प्रजातीय विविधता अधिक होती है, उन्हें विविधता के हॉट-स्पॉट (Hot spots) कहते हैं|

(iv) मानव जाति के लिए जंतुओं के महत्व का वर्णन संक्षेप में करें|

उत्तर

जीव व प्रजातियों ऊर्जा ग्रहण कर उसका संग्रहण करती हैं, कार्बनिक पदार्थ उत्पन्न एवं विघटित करती हैं और पारितंत्र में जल व पोषक तत्त्वों के चक्र को बनाए रखने में सहायक होती है| इसके अतिरिक्त प्रजातियाँ वायुमंडलीय गैस को स्थिर करती है और जलवायु को नियंत्रित करने में सहायक होती हैँ|

(v) विदेशज प्रजातियों (Exotic species) से आप क्या समझते हैं?

उत्तर

वे प्रजातियाँ, जो स्थानीय आवास की मूल जैव प्रजाति नहीं है, लेकिन उस तंत्र में स्थापित की गई हैं, उन्हें विदेशज प्रजातियाँ (Exotic species) कहा जाता है|

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए:

(i) प्रकृति को बनाए रखने में जैव-विविधता की भूमिका का वर्णन करें|

उत्तर

जैव-विविधता ने मानब संस्कृति के विकास में बहुत योगदान दिया है और इसी प्रकार, मानव समुदायों ने भी आनुवांशिक, प्रजातीय व पारिस्थितिक स्तरों पर प्राकृतिक विविधता को बनाए रखने में बड़ा योगदान दिया है|

जैव-विविधता की भूमिका निम्नलिखित है:

• जैव-विविधता की परिस्थितिकीय भूमिका- जीव व प्रजातियों ऊर्जा ग्रहण कर उसका संग्रहण करती हैं, कार्बनिक पदार्थ उत्पन्न एवं विघटित करती हैं और पारितंत्र में जल व पोषक तत्त्वों के चक्र को बनाए रखने में सहायक होती है| इसके अतिरिक्त प्रजातियाँ वायुमंडलीय गैस को स्थिर करती है और जलवायु को नियंत्रित करने में सहायक होती हैँ| ये पारितंत्र क्रियाएँ मानव जीवन के लिए महत्वपूर्ण क्रियाएँ हैं|

• जैव-विविधता की आर्थिक भूमिका- जैव-विविधता को संसाधनों के उन भंडारों के रूप में भी समझा जा सकता है जिनकी उपयोगिता भोज्य पदार्थ, औषधियों और सौदर्य प्रसाधन आदि बनाने में है|

• जैव-विविधता की वैज्ञानिक भूमिका- जीवन कैसे चलता है और पारितंत्र, जिसमें हम भी एक प्रजाति हैं, उसे बनाए रखने में प्रत्येक प्रजाति की क्या भूमिका है, इन्हें हम जैव-विविधता से समझ सकते हैं|

(ii) जैव-विविधता के ह्रास के लिए उत्तरदायी प्रमुख कारकों का वर्णन करें| इसे रोकने के उपाय भी बताएँ|

उत्तर

जैव-विविधता के ह्रास के लिए उत्तरदायी प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं:

• जनसंख्या वृद्धि के कारण प्राकृतिक संसाधनों का उपभोग अधिक होने लगा है जिसके कारण संसार के विभिन्न भागों में प्रजातियों तथा उनके आवास स्थानों में तेजी से कमी हुई है|

• संसाधनों का दोहन तथा वनोन्मूलन अत्यधिक हुआ है|

• प्राकृतिक आवासों का विनाश|

• प्राकृतिक आपदाएँ, जैसे- भूकंप, बाढ़, ज्वालामुखी उद्गार, दावानल, सूखा आदि|

• कीटनाशक और अन्य प्रदूषक जैसे हाइड्रोकार्बन और विषैली भारी धातुएँ|

जैव-विविधता ह्रास को रोकने के निम्नलिखित उपाय हैं:

• संकटापन्न प्रजातियों के संरक्षण के लिए प्रयास करने चाहिए|

• प्रजातियों को लुप्त होने से बचाने के लिए उचित योजनाएँ व प्रबंधन अपेक्षित हैं|

• खाद्यान्नों की किस्में, चारे संबंधी पौधों की किस्में, इमारती लकड़ी के पेड़, पशुधन, जंतु व उनकी वन्य प्रजातियों की किस्मों को संरक्षित करना चाहिए|

• प्रत्येक देश को वन्य जीवों के आवास को चिन्हित कर उनकी सुरक्षा को सुनिश्चित करना चाहिए|

• प्रजातियों के पलने-बढ़ने तथा विकसित होने के स्थान सुरक्षित व सरंक्षित हों|

• वन्य जीवों व पौधों का अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, नियमों के अनुरूप हो|

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