NCERT Solutions for Class 11th: पाठ 10 - आत्मा का ताप

NCERT Solutions for Class 11th: पाठ 10 - आत्मा का ताप आरोह भाग-1 हिंदी (Aatma ka Taap)

अभ्यास

पृष्ठ संख्या: 125

पाठ के साथ

1. रज़ा ने अकोला में ड्राइंग अध्यापक की नौकरी की पेशकश क्यों नहीं स्वीकार की?

उत्तर

रज़ा ने अकोला में ड्राइंग अध्यापक की नौकरी की पेशकश नहीं स्वीकार की, क्योंकि उन्हें मुंबई में ही रहकर अध्ययन करने का निश्चय किया| उन्हें शहर तथा वहाँ का वतावरण और सभी मित्र बहत पसंद आए|

2. मुंबई में रहकर कला के लिए रज़ा ने क्या-क्या संघर्ष किए?

उत्तर

मुंबई में रहकर कला के लिए रज़ा को कड़ी मेहनत करनी पड़ी| रज़ा को जिस स्टूडियो में डिजाईनर की नौकरी मिली थी, वह फीरोजशाह मेहता रोड पर था| वहाँ वे सुबह दस बजे से शाम छह बजे तक काम करते थे| काम के बाद अध्ययन के लिए मोहन आर्ट क्लब जाते और रात में वे अपने किसी परिचित टैक्सी ड्राइवर के कमरे में रहते थे| वहाँ उन्हें फर्श पर सोना पड़ता था| वे रात के ग्यारह-बारह बजे तक जागकर स्केच बनाया करते थे| इतने कठिन परिश्रम के बाद 1948 में उन्हें बॉम्बे आर्ट ऑफ़ सोसाइटी का स्वर्ण पदक प्राप्त हुआ| 1943 में आर्ट्स सोसाइटी ऑफ़ इंडिया की प्रदर्शनी में उनकी चित्रों को प्रदर्शित किया गया| कला समीक्षक रुडॉल्फ़ वॉन लेडेन ने उनके चित्रों की प्रशंसा की| प्रदर्शनी में उनके दो चित्र बीस-बीस रूपये में बिक गए| यह उनके बहुत बड़ी उपलब्धि थी| वेनिस अकादमी के प्रोफेसर लैंगहैमर उनके चित्र के प्रशंसक बने तथा उनके द्वारा बनाई गई चित्रों को खरीदने लगे| इससे रजा के अध्ययन में जुट पाना संभव हो गया और वे जे.जे. स्कूल ऑफ़ आर्ट के नियमित छात्र बन गए|

3. भले ही 1947 और 1948 में महत्वपूर्ण घटनाएँ घटी हों, मेरे लिए वे कठिन बरस थे- रजा ने ऐसा क्यों कहा?

उत्तर

1947 में भारत आजाद हुआ और 1948 में महात्मा गाँधी की हत्या| लेकिन रजा के लिए ये दोनों वर्ष कठिन दौर थे क्योंकि व्यक्तिगत तौर पर उनके साथ घटनाएँ घटी थीं| 1947 में उनकी माता और फिर 1948 में उनके पिता का देहांत हो गया| पूरे परिवार की जिम्मेदारी का बोझ उनके कन्धों पर आ गया| इस प्रकार उन्हें अनेक क्रूर अनुभवों से गुजरना पड़ा|

4. रज़ा के पसंदीदा फ्रेंच कलाकार कौन थे?

उत्तर

रज़ा के पसंदीदा फ्रेंच कलाकार सेजां, वॉन, गॉग, गोगाँ पिकासो, मातीस, शागाल एवं ब्रॉक थे|

5. तुम्हारे चित्रों में रंग है, भावना है, लेकिन रचना नहीं है| चित्र इमारत की ही तरह बनाया जाता है- आधार, नींव, दीवारें, बीम, छत और तब जाकर वह टिकता है| यह बात

(क) किसने, किस संदर्भ में कही?

(ख) रज़ा पर इसका क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर

(क) यह बात फ्रेंच फोटोग्राफर हेनरी कार्तिए-ब्रेसाँ ने रजा के चित्रों को देखने के बाद कही|

(ख) उनकी इस टिप्पणी से रज़ा पर गहरा एवं सकारात्मक प्रभाव पड़ा| उन्हें यह महसूस हुआ कि उन्हें चित्रों की बुनियाद मजबूत बनानी पड़ेगी अर्थात उनका आधार मजबूत होना चाहिए| इससे उनकी कला में और भी अधिक निखार आ सकता है|

पाठ के आस-पास

1. रजा को जलील साहब जैसे लोगों का सहारा न मिला होता तो क्या तब भी वे एक जाने-माने चित्रकार होते? तर्क सहित लिखिए|

उत्तर

रजा की संघर्ष की घड़ियों में जलील साहब ने उनकी बहुत सहायता की थी, लेकिन कहना उचित नहीं होगा कि यदि उनका सहारा नहीं मिलता, तब भी रजा एक जाने-माने चित्रकार न बन पाते| ऐसा इसलिए है क्योंकि कला किसी के सहारे की मोहताज नहीं होती है| यह सच है कि कभी-कभी आर्थिक तंगी के कारण प्रतिभा को आगे बढ़ने का अवसर नहीं मिलता| शायद रजा अकोला में ड्राइंग के अध्यापक बन कर ही रह जाते| फिर भी यदि उन्हें जलील साहब जैसे लोगों का सहारा न मिला होता, तब भी वे एक जाने-माने चित्रकार होते|

2. चित्रकला व्यवसाय नहीं, अंतरात्मा की पुकार है- इस कथन के आलोक में कला के वर्तमान और भविष्य पर विचार कीजिए|

उत्तर

ये बातें लेखक एस.एच.रजा ने वर्तमान में हो रहे चित्रकला के व्यवसायीकरण को ध्यान में रखते हुए कही हैं| उन्होंने ये बातें ख़ास तौर पर युवा कलाकारों को संबोधित किया है| वे अपना सर्वस्व देकर चित्रकला के लिए समर्पित होते हैं जबकि बाजार में उनके चित्रों की नीलामी की जाती है| चित्रकला किसी भी कलाकार की अंतरात्मा की आवाज होती है, इसे व्यवसाय प्रधान नहीं बनाना चाहिए| चित्रकला का भविष्य उज्जवल है, लेकिन यह कह पाना कठिन है कि इसके व्यवसायीकरण पर रोक लगाया जा सकेगा|

3. हमें लगता था कि हम पहाड़ हिला सकते हैं- आप किन क्षणों में ऐसा सोचते हैं?

उत्तर

जब भी हम अपने जीवन में किसी नए काम की शुरुआत करते हैं तो उसे हम बड़े ही लगन और उत्साह के साथ करते हैं| हमारी एक अलग पहचान बनती है और लोकप्रिय होने के साथ आत्मबल दोगुना होता जाता है| तभी हमें ऐसा लगता है कि हम पहाड़ हिला सकते हैं|

भाषा की बात

1. जब तक मैं मुंबई पहुँचा, तब तक जे.जे. स्कूल में दाखिला बंद हो चुका था- इस वाक्य को हम दूसरे तरीके से भी कह सकते हैं| मेरे बंबई पहुँचने से पहले जे.जे, स्कूल में दाखिला बंद हो चुका था| नीचे दिए गए वाक्यों को दूसरे तरीके से लिखिए-

(क) जब तक मैं प्लेटफ़ॉर्म पहुँचती तब तक गाड़ी जा चुकी थी|

(ख) जब तक डॉक्टर हवेली पहुँचता तब तक सेठ जी की मृत्यु हो चुकी थी|

(ग) जब तक रोहित दरवाजा बंद करता तब तक उसके साथी होली का रंग लेकर अंदर आ चुके थे|

(घ) जब तक रुचि कैनवास हटाती तब तक बारिश शुरू हो चुकी थी|

उत्तर

(क) मेरे प्लेटफॉर्म पहुँचने से पहले ही गाड़ी जा चुकी थी|

(ख) डॉक्टर के हवेली पहुँचने से पहले ही सेठ जी की मृत्यु हो चुकी थी|

(ग) रोहित के दरवाजा छंद करने रने पहले उसके साथी होली का रंग लेकर अंदर आ चुके थे|

(घ) रुचि के कैनवास हटाने से पहले ही बारिश शुरू हो चुकी थी|

2. आत्मा का ताप पाठ में कई शब्द ऐसे आए हैं जिनमें ऑ का इस्तेमाल हुआ है, (ऑफ़ ब्लॉक नॉर्मल)| नीचे दिए गए शब्दों में यदि ऑ का इस्तेमाल लिया जाए तो शब्द के अर्थ में क्या परिवर्तन आएगा? दोनों शब्दों का वाक्य-प्रयोग करते हुए अर्थ के अंतर को स्पष्ट कीजिए|

हाल, काफी, बाल

उत्तर

• हाल (दशा, स्थिति) आज मरीज किस हाल में है?

हॉल (बडा कमरा) छत के ऊपर एक हॉल बनाया जा सकता है|

• काफी (पर्याप्त) मेरे लिए इतनी सब्जी काफी है|

कॉफी (एक पेय पदार्थ) सदियों में कॉफी पीने से स्फूर्ति आती है|

• बाल (सिर के बाल यानि केश) मेरे बाल बहुत लंबे हो गए हैं|

बॉल (गेंद) क्रिकेट का बॉल बहुत महँगा हो गया है|

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