NCERT Solutions for Class 11th: पाठ 7 - प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ

NCERT Solutions for Class 11th: पाठ 7 - प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ भारत भौतिक पर्यावरण (Prakritik Sankat tatha Aapdayein) Bharat Bhautik Paryavaran Geography (Bhugol)

पृष्ठ संख्या: 97

अभ्यास

1. बहुवैकल्पिक प्रश्न :

(i) इनमें से भारत के किस राज्य में बाढ़ अधिक आती है?
(क) बिहार
(ख) पश्चिम बंगाल
(ग) असम
(घ) उत्तर प्रदेश
► (ग) असम

(ii) उत्तरांचल के किस जिले में मालपा भूस्खलन आपदा घटित हुई थी?
(क) बागेश्वर
(ख) चंपावत
(ग) अल्मोड़ा
(घ) पिथोरागढ़
► (घ) पिथोरागढ़

(iii) इनमें से कौन-से राज्य में सर्दी के महीनों में बाढ़ आती है?
(क) असम
(ख) पश्चिम बंगाल
(ग) केरल
(घ) तमिलनाडु
► (घ) तमिलनाडु

(iv) इनमें से किस नदी में मंजौली नदीय द्वीप स्थित है?
(i) गंगा
(ii) ब्रह्मपुत्र
(iii) गोदावरी
(iv) सिन्धु
► (ii) ब्रह्मपुत्र

(v) बर्फानी तूफ़ान किस तरह की प्राकृतिक आपदा है?
(क) वायुमंडलीय
(ख) जलीय
(ग) भौमिकी
(घ) जीवमंडलीय
► (क) वायुमंडलीय

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 30 से कम शब्दों में दें|

(i) संकट किस दशा में आपदा बन जाता है?

उत्तर

संकट, आपदा बन जाता है जब यह सक्रिय हो जाता है| एक आपदा बड़े पैमाने पर संपत्ति और जीवन को नुकसान पहुंचाता है|

(ii) हिमालय और भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में अधिक भूकंप क्यों आते हैं?

उत्तर

इंडियन प्लेट प्रति वर्ष उत्तर व उत्तर-पूर्व दिशा में एक सेंटीमीटर खिसक रही है| परंतु उत्तर में स्थित यूरेशियन प्लेट इसके लिए अवरोध पैदा करती है| परिणामस्वरूप इन प्लेटों के किनारे लॉक हो जाते हैं और कई स्थानों पर लगातार ऊर्जा संग्रह होता रहता है| अधिक मात्रा में ऊर्जा संग्रह से तनाव बढ़ता रहता है और दोनों प्लेटों के बीच लॉक टूट जाता है और एकाएक ऊर्जा मोचन से हिमालय और भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में भूकंप आते हैं|

(iii) उष्ण कटिबन्धीय तूफान की उत्पत्ति के लिए कौन-सी परिस्थितियाँ अनुकूल हैं?

उत्तर

उष्ण कटिबन्धीय तूफान की उत्पत्ति के लिए निम्नलिखित परिस्थितियाँ अनुकूल हैं:

• लगातार और पर्याप्त मात्रा में उष्ण व आर्द्र वायु की सतत् उपलब्धता जिससे बहुत बड़ी मात्रा में गुप्त ऊष्मा निर्मुक्त हो|

• तीव्र कोरियोलिस बल जो केद्र के निम्न वायु दाब को भरने न दे|

• क्षोभमंडल में अस्थिरता, जिससे स्थानीय स्तर यर निम्न वायु दाब क्षेत्र बन जाते है| इन्हीं के चारों ओर चक्रवात भी विकसित हो सकते हैं|

• मजबूत उर्ध्वाधर वायु फान (Wedge) की अनुपस्थिति, जो नम और गुप्त ऊष्मा युवत्त बायु के उर्ध्वाधर बहाव को अवरुद्ध करे|

(iv) पूर्वी भारत की बाढ़, पश्चिमी भारत की बाढ़ से अलग कैसे होती है?

उत्तर

पश्चिमी भारत की तुलना में पूर्वी भारत में बाढ़ अधिक आती है क्योंकि पश्चिमी भारत की तुलना में पूर्वी भारत में वर्षा अधिक होती है| इसके अलावा, पश्चिमी भारत की तुलना में पूर्वी भारत की बाढ़ अधिक विनाशकारी होती है|

(v) पश्चिमी और मध्य भारत में सूखे ज्यादा क्यों पड़ते हैं?

उत्तर

मध्य और पश्चिमी भारत में कम वर्षा होती है, क्योंकि मानसून की तीव्रता इन क्षेत्रों तक आते-आते कमजोर हो जाती है| यही कारण है कि पश्चिमी और मध्य भारत में सूखे ज्यादा पड़ते हैं|

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 125 शब्दों में दें|

(i) भारत में भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों की पहचान करें और इस आपदा के निवारण के कुछ उपाय बताएँ|

उत्तर

भारत में भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र हैं:

• अस्थिर हिमालय की युवा पर्वत श्रृंखलाएँ तथा अंडमान और निकोबार|

• पश्चिमी घाट और नीलगिरी में अधिक वर्षा वाले क्षेत्र|

• उत्तर-पूर्वी क्षेत्र|

• पार हिमालय के कम वृष्टि वाले क्षेत्र लद्दाख और हिमाचल प्रदेश में स्पिति|

• अरावली पहाड़ियों में कम वर्षा वाला क्षेत्र|

• पश्चिमी व पूर्वी घाट के व दक्कन पठार के वृष्टि छाया क्षेत्र|

• इसके अलावा झारखंड, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, मध्य पदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, गोवा और केरल में खादानों और भूमि धँसने से भूस्खलन होता रहता है|

इस आपदा के निवारण के निम्नलिखित उपाय हैं :

• अधिक भूस्खलन संभावी क्षेत्रों में सड़क और बड़े बाँध बनाने जैसे निर्माण कार्य तथा विकास कार्य पर प्रतिबंध होना चाहिए|

• इन क्षेत्रों में कृषि नदी घाटी तथा कम ढाल वाले क्षेत्रों तक सीमित होनी चाहिए तथा बडी विकास परियोजनाओं पर नियंत्रण डोना चाहिए|

• सकारात्मक कार्य जैसे- बृहत स्तर पर वनीकरण को बढ़ावा और जल बहाव क्रो कम करने के लिए बाँध का निर्माण भूस्खलन के उपायों के पूरक हैं|

• स्थानांतरी कृषि वाले उतर-पूर्वी क्षेत्रों में सीढ़ीनुमा खेत बनाकर कृषि की जानी चाहिए|

(ii) सुभेद्यता क्या है? सूखे के आधार पर भारत को प्राकृतिक आपदा भेद्यता क्षेत्रों में विभाजित करें और इसके निवारण के उपाय बताएँ|

उत्तर

सुभेद्यता का अर्थ है आपदा पीड़ित के लिए संकट उत्पन्न होना|

सूखे के आधार पर भारत को प्राकृतिक आपदा भेद्यता क्षेत्रों को निम्नलखित वर्गों में विभाजित किया गया है :

अत्यधिक सूखा प्रभावित क्षेत्र : राजस्थान में ज्यादातर भाग, विशेषकर अरावली के पश्चिम में स्थित मरुस्थली और गुजरात का कच्छ क्षेत्र अत्यधिक सूखा प्रभावित है| इसमें राजस्थान के जैसलमेर और बाड़मेर जिले भी शामिल है, जहाँ 90 मिलीलीटर से कम औसत बार्षिक वर्षा होती है|

अधिक सूखा प्रभावित क्षेत्र : इसमें राजस्थान के पूर्वी भाग, मध्य प्रदेश के ज्यादातर भाग, महाराष्ट्र के पूर्वी भाग, आंध्र प्रदेश के अंदरूनी भाग, कर्नाटक का पठार, तमिलनाडु के उत्तरी भाग, झारखंड का दक्षिणी भाग और ओडिशा के आंतरिक भाग शामिल हैं|

मध्यम सूखा प्रभावित क्षेत्र : इस वर्ग में राजस्थान के उत्तरी भाग, हरियाणा, उत्तर प्रदेश के दक्षिणी जिले, गुजरात के बचे हुए जिले, कोंकण को छोड़कर महाराष्ट्र, झारखंड, तमिलनाडू में कोयंबटूर पठार और आंतरिक कर्नाटक शामिल हैं| भारत के बचे हुए भाग बहुत कम या न के बराबर सूखे से प्रभावित हैं|

इसके निवारण के निम्नलिखित उपाय हैं :

• भूमिगत जल के भंडारण का पता लगाना|

• जल आधिक्य क्षेत्रों से अल्पजल क्षेत्रों में पानी पहुंचाना|

• नदियों को जोड़ना और बाँध व जलाशयों का निर्माण इत्यादि|

• नदियों जोड़ने के लिए द्रोणियों की पहचान तथा भूमिगत जल भंडारण की संभावना का पता लगाने के लिए सुदूर संवेदन और उपग्रहों से प्राप्त चित्रों का प्रयोग करना चाहिए|

• सूखा प्रतिरोधी फसलों के बारे में प्रचार-पसार सूखे से लड़ने के लिए एक दीर्घकालिक उपाय है|

• वर्षा जल संलवन (Rain water harvesting) सूखे का प्रभाव कम करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है|

(iii) किस स्थिति में विकास कार्य आपदा का कारण बन सकता है?

उत्तर

ऐसी अनेक स्थितियाँ हैं, जिससे विकास कार्य आपदा का कारण बन सकता है:

• भोपाल गैस त्रासदी, चेरनोबिल नाभिकीय आपदा, युद्ध, सी एफ सी (क्लोरोफलोरो कार्बन) गैसें वायुमंडल में छोड़ना तथा ग्रीन हाउस गैसें, ध्वनि, वायु, जल तथा मिट्टी संबंधी पर्यावरण प्रदूषण आदि आपदाएँ इसके उदाहरण हैं|

• कुछ मानवीय गतिविधियों परोक्ष रूप से भी आपदाओं को बढ़ावा देती हैं| वनों को काटने की वजह से भू-स्खलन और बाढ़, भंगुर जमीन पर निर्माण कार्य और अवैज्ञानिक भूमि उपयोग कुछ उदाहरण हैं जिनकी वजह से आपदा परोक्ष रूप में प्रभावित होती है|

पिछले कुछ सालों से मानवकृत आपदाओं की संख्या और परिमाण, दोनों में ही वृद्धि हुई है और कई स्तर पर ऐसी घटनाओं से बचने के भरसक प्रयत्न किए जा रहे हैं|

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