पाठ 2 - लोकतंत्र क्या? लोकतंत्र क्यों? के नोट्स| Class 9th

पठन सामग्री और नोट्स (Notes)| पाठ 2 - लोकतंत्र क्या? लोकतंत्र क्यों? (Loktantra Kya? Loktantra Kyon?) Loktantrik Rajniti Class 9th

इस अध्याय में विषय

• लोकतंत्र क्या है?
• लोकतंत्र की विशेषताएँ
→ प्रमुख फैसले निर्वाचित नेताओं के हाथ
→ स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावी मुकाबला
→ एक व्यक्ति-एक वोट-एक मोल
→ कानून का राज और अधिकारों का आदर
• लोकतंत्र ही क्यों?
→ लोकतंत्र के खिलाफ तर्क
→ लोकतंत्र के पक्ष में तर्क

लोकतंत्र क्या है?

• एक सरल परिभाषा: लोकतंत्र शासन का एक ऐसा रूप है जिसमें शासकों का चुनाव लोग करते हैं।

लोकतंत्र की विशेषताएँ

• इसमें शासक लोगों द्वारा चुने जाते हैं।

• निःशुल्क और प्रतिस्पर्धी चुनाव आयोजित होते हैं।

• प्रत्येक व्यस्क, चाहे कोई भी धर्म, शिक्षा, जाति, रंग, धन हो का एक वोट, एक मूल्य होता है।

• चुने गये शासक संवैधानिक कानून और नागरिक अधिकारों द्वारा निर्धारित किए गए सीमाओं के भीतर निर्णय लेते हैं।

• कानून का शासन।

• नागरिकों का अधिकार संविधान के माध्यम से संरक्षित किया जाना चाहिए।

• एक स्वतंत्र न्यायपालिका होना चाहिए।

प्रमुख फैसले निर्वाचित नेताओं के हाथ

• पकिस्तान में जनरल परवेज मुशर्रफ ने अक्टूबर 1999 में सैनिक तख्तापलट की अगुवाई की। उन्होंने लोकतांत्रिक ढंग से चुनी हुई सरकार को उखाड़ फेंका और खुद को देश का ‘मुख्य कार्यकारी’ घोषित किया और बाद में उन्होंने खुद को राष्ट्रपति घोषित किया।
→ 2002 में धोखे से एक जनमत संग्रह कराके उन्होंने अपना कार्यकाल पाँच साल के लिए बढ़वा लिया।
→ अगस्त 2002 में उन्होंने लीगल फ्रेमवर्क आर्डर’ के जरिये पकिस्तान के संविधान को बदल डाला जिसके अनुसार राष्ट्रपति, राष्ट्रीय और प्रांतीय असेम्बलियों को भंग कर सकता है।

• इस प्रकार पकिस्तान में चुनाव भी हुए, चुने हुए प्रतिनिधियों को कुछ अधिकार भी मिले लेकिन सर्वोच्च सत्ता सेना के अधिकारियों और जनरल मुशर्रफ के पास है। इसलिए इसे लोकतंत्र शासन नहीं कहना चाहिए।

• लोकतंत्र में अंतिम निर्णय लेने की शक्ति लोगों द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों के पास ही होनी चाहिए।

स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावी मुकाबला


• चीन की संसद के लिए प्रति पाँच वर्ष बाद नियमित रूप से चुनाव होते हैं जिसे राष्ट्रीय जन संसद कहते हैं।
→ चुनाव लड़ने से पहले सभी उम्मीदवारों को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से मंजूरी लेनी पड़ती है।
→ सरकार हमेशा कम्युनिस्ट पार्टी की ही बनती है।

• मैक्सिको में हर छः वर्ष बाद राष्ट्रपति चुनने के लिए चुनाव कराए जाते हैं।

• लेकिन सन् 2000 तक हर चुनाव में पीआरआई (इंस्टीट्यूशनल रिवोल्यूशनरी पार्टी) नाम की एक पार्टी को ही जीत मिलती थी| विपक्षी दल चुनाव में हिस्सा लेते थे पर कभी भी उन्हें जीत हासिल नहीं होती थी। चुनाव में तरह-तरह के हथकंडे अपनाकर हर हाल में जीत हासिल करने के लिए पीआरआई कुख्यात थी।

• दोनों ही मामलों में लोकतंत्र नहीं कहा जाना चाहिए।

• लोकतंत्र निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनावों पर आधारित होना चाहिए ताकि सत्ता में बैठे लोगों के लिए जीत-हार के समान अवसर हों।

एक व्यक्ति-एक मोल-एक वोट

• किसी व्यक्ति को मतदान के समान अधिकार से वंचित करने के उदहारण अनेक हैं।
→ सऊदी अरब में औरतों को वोट देने का अधिकार नहीं है।
→ एस्टोनिया ने अपने यहाँ नागरिकता के नियम कुछ इस तरह बनाए हैं कि रूसी अल्पसंख्यक समाज के लोगों को मतदान का अधिकार हासिल करने में मुश्किल होती है।
→ फिजी की चुनाव प्रणाली में वहाँ के मूल वासियों के वोट का महत्व भारतीय मूल के फिजी नागरिक के वोट से ज्यादा है।
• लोकतंत्र में हर व्यस्क नागरिक का एक वोट होना चाहिए और हर वोट का एक समान मूल्य होना चाहिए।

कानून का राज और अधिकारों का आदर

• स्वतंत्रता के समय से जिम्बावे पर जानु-पीएफ दल का राज है।

• इसके नेता राबर्ट मुगाबे आजादी के बाद से ही शासन कर रहे हैं। राष्ट्रपति मुगाबे कम लोकप्रिय नहीं हैं पर वे चुनाव में गलत तरीके भी अपनाते हैं।

• चुनाव नियमित रूप से होते हैं और सदा जानु-पीएफ दल ही जीतता है।

• विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं को परेशान किया जाता है और उनकी सभाओं में गड़बड़ कराई जाती है।

• सरकार विरोधी प्रदर्शनों और आंदोलनों को गैर-कानूनी घोषित कर दिया गया है।

• टेलीविज़न और रेडियो पर सरकारी नियंत्रण है और उन पर सिर्फ शासक दल के विचार ही प्रसारित होते हैं।

• अखबार स्वतंत्र है पर सरकार की आलोचना करने वाले पत्रकारों को परेशान किया जाता है।

• सरकार ने कुछ ऐसे अदालती फैसलों की परवाह नहीं की जो उसके खिलाफ जाते थे और उसने जजों पर दबाव भी डाला।

• इस मामले में भी सरकार लोकतांत्रिक नहीं है क्योंकि यहाँ न ही नागरिकों के बुनियादी अधिकार, विपक्षी दल और न ही न्यायपालिका है।

• एक लोकतांत्रिक सरकार संवैधानिक कानूनों और नागरिक अधिकारों द्वारा खींची लक्ष्मण रेखाओं के भीतर ही काम करती है।

लोकतंत्र क्यों?

लोकतंत्र के खिलाफ तर्क

• लोकतंत्र में नेता बदलते रहते हैं जिससे अस्थिरता की स्थिति पैदा होती है।

• लोकतंत्र का मतलब सिर्फ राजनैतिक लड़ाई और सत्ता का खेल है। यहाँ नैतिकता की कोई जगह नहीं होती।

• लोकतांत्रिक व्यवस्था में इतने सारे लोगों से बहस और चर्चा करणी पड़ती है कि हर फैसले में देरी होती है।

• चुने हुए नेताओं को लोगों के हितों का पता ही नहीं होता| इसके चलते खराब फैसले होते हैं।

• लोकतंत्र में चुनावी लड़ाई महत्वपूर्ण और खर्चीली होती है, इसलिए इसमें भ्रष्टाचार होता है।

• सामान्य लोगों को पता नहीं होता कि उनके लिए क्या चीज अच्छी है और क्या चीज बुरी; इसलिए उन्हें किसी चीज का फैसला नहीं करना चाहिए।

लोकतंत्र के पक्ष में तर्क

• लोकतांत्रिक सरकार एक बेहतर सरकार है क्योंकि यह अधिक जवाबदेह सरकार है।

• लोकतंत्र निर्णय लेने की गुणवत्ता में सुधार करता है।

• मतभेद और संघर्ष से निपटने के लिए लोकतंत्र एक तरीका प्रदान करता है।

• लोकतंत्र नागरिकों की गरिमा को बढ़ाता है।

• लोकतंत्र हमें अपनी गलतियों को ठीक करने की अनुमति देता है।

लोकतंत्र का वृहतर अर्थ

• हमारे समय में लोकतंत्र का सबसे आम रूप है प्रतिनिधि वाला लोकतंत्र, जिसमें सभी लोगों की तरफ से बहुमत को फैसले लेने का अधिकार होता है।
→ बहुमत का शासन भी चुने हुए प्रतिनिधियों के माध्यम से होता है।

• लोकतांत्रिक फैसले का मतलब होता है उस फैसले से प्रभावित होने वाले सभी लोगों के साथ विचार विमर्श के बाद और उनकी स्वीकृति से फैसले लेना।

• लोकतंत्र एक ऐसा सिद्धांत है जिसका प्रयोग जीवन के किसी भी क्षेत्र में हो सकता है।
→ लोकतंत्र एक सरकार, परिवार या किसी अन्य संगठन में लागू हो सकता है।


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