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MCQ and Summary for विष के दाँत (Vish ke Daant) Class 10 Hindi Godhuli Part 2 Bihar Board

विष के दाँत - नलिन विलोचन शर्मा MCQ and सारांश 

Multiple Choice Question Solutions (बहुविकल्पी प्रश्न)

1. विष के दाँत कहानी के रचयिता कौन हैं?
(A) अमरकांत
(B) विनोद कुमार शुक्ल
(C) नलिन विलोचन शर्मा
(D) यतीन्द्र मिश्रा
उत्तर
(C) नलिन विलोचन शर्मा ,

2. खोखा का दूसरा नाम क्या था ?
(A) मदन
(B) गिरधर
(C) काशू
(D) आलो
उत्तर
(C) काशू

3. 'मदन' किसका पुत्र था ?
(A) सेन साहब
(B) गिरधर
(C) शोफर
(D) सिंह साहब
उत्तर
(B) गिरधर

4. विष के दाँत कैसी कहानी है ?
(A) सामाजिक
(B) ऐतिहासिक
(C) धार्मिक
(D) मनोवैज्ञानिक
उत्तर
(D) मनोवैज्ञानिक

5. 'विष के दाँत' समाज के किस वर्ग का मानसिकता उजागर करती है ?
(A) उच्च वर्ग
(B) निम्न वर्ग
(C) मध्य वर्ग
(D) निम्न-मध्य वर्ग
उत्तर
(D) निम्न-मध्य वर्ग

6. नलिन जी का जन्म कब हुआ था ?
(A) 18 फरवरी, 1916
(B) 18 मार्च, 1916
(C) 18 अप्रैल, 1916
(D) 18 मई, 1916
उत्तर
(A) 18 फरवरी, 1916

7. नलिन जी की भाषा कैसी है ?
(A) गठीली
(B) संकेतात्मक
(C) गठीली एवं संकेतात्मक
(D) सभी गलत है
उत्तर
(C) गठीली एवं संकेतात्मक

8. नलिन विलोचन शर्मा क्या हैं ?
(A) आलोचक
(B) कहानीकार
(C) भाषाविद्
(D) इनमें सभी
उत्तर
(D) इनमें सभी

9. नलिन विलोचन हैं
(A) नवीनता के आग्रही
(B) प्रयोगवाद के अग्रदूत
(C) श्रेष्ठ आलोचक
(D) इनमें सभी
उत्तर
(A) नवीनता के आग्रही

10. पटना के बदरघाट (भद्रघाट) मुहल्ले का संबंध निम्नलिखित में किसने जन्म स्थान से है ?
(A) दिनकर
(B) नलिन जी
(C) प्रभाकर माचवे
(D) प्रेमचंद
उत्तर
(B) नलिन जी

11. किसके अनुसार सेनों ने सिद्धान्तों को भी बदल दिया था. ?
(A) बेटियों के अनुसार
(B) खोखा के अनुसार
(C) मदन के अनुसार
(D) गिरधर के अनुसार
उत्तर
(B) खोखा के अनुसार

12. "ऐसे ही लड़के आगे चलकर गुण्डे, चोर, डाकू बनते हैं !" यह पंक्ति कहानी के किस पात्र ने कही है ?
(A) सेन साहब की धर्मपत्नी
(B) गिरधर
(C) सेन साहब
(D) शोफर
उत्तर
(C) सेन साहब


13. नलिन विलोचन शर्मा पटना विश्व विधालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष कब बने ?

(A) सन 1958 में 
(B) सन 1963 में 
(C) सन 1957 में 
(D) सन 1959 में 

उत्तर
(D) सन 1959 में 


14. आलोचकों के अनुसार प्रयोगवाद का वास्तविक प्रारंभ किसके कविताओं से हुआ ?

(A) नलिन विलोचन के कविता से 
(B) बद्रीनारायण के कविता से 
(C) रामधारी सिंह के कविता से 
(D) सुमित्रानंद पंत के कविता से 

उत्तर 

(A) नलिन विलोचन के कविता से


15. नलिन विलोचन शर्मा के कहानियों में किसके तत्व समग्रता से उभरकर आए ?

(A) राजनितिकता का 
(B) सामाजिकता का 
(C) मनोवैज्ञानिकता का 
(D) इनमे से सभी 

उत्तर 

(C) मनोवैज्ञानिकता का


16. विष के दांत कहानी किस वर्ग के अंतविर्रोधो को उजागर करती है ?

(A) निम्न वर्ग का 
(B) मध्यम वर्ग का 
(C) उच्च वर्ग का 
(D) व्यापारी वर्ग का 

उत्तर

(B) मध्यम वर्ग का 


17. खोखा - खोखी किस भाषा का शब्द है ?

(A) तमिल का 
(B) भोजपुरी का 
(C) बांगला का 
(D) हिंदी का 

उत्तर

(C) बांगला का 


18. सेन साहब की कितनी लडकियाँ थी ?

(A) तिन 
(B) पाँच 
(C) छह 
(D) चार

उत्तर

(B) पाँच 


19. शोफर शब्द का अर्थ है ?

(A) सभ्यता 
(B) संबंध 
(C) निर्ममता 
(D) ड्राइवर 

उत्तर

(D) ड्राइवर 


20. ऐसे ही लडके आगे चलकर गुंडे , चोर , डाकू बनते है ? यह पंक्ति कहानी के किस पात्र ने कही है ?

(A) सेन साहब की धर्मपत्नी 
(B) सेन साहब 
(C) गिरधर 
(D) शोफर 

उत्तर

(B) सेन साहब 


21. नलिन विलोचन शर्मा की मृत्यु कब हुई ?

(A) 12 सितम्बर 1961
(B) 16 सितम्बर 1961
(C) 14 सितम्बर 1961
(D) 14 सितम्बर 1961

उत्तर

(A) 12 सितम्बर 1961 


22. मदन अक्सर किसके हाथो से पिटता था ?

(A) माता 
(B) खोखा 
(C) पिता 
(D) सेन साहब 

उत्तर

(C) पिता 

23. गिरधरलाल कौन है ?

(A) काशु के पिता 
(B) रजनी का पिता 
(C) मदन का पिता 
(D) शेफाली का पिता 

उत्तर

(C) मदन का पिता 


24. खोखा का क्या नाम है ?

(A) किशु 
(B) कुशु 
(C) काशु 
(D) केशु 

उत्तर

(C) काशु 


25. सेन साहब अपने पुत्र खोखा को क्या बनाना चाहते थे ?

(A) बिजनेसमैन या इंजिनियर 
(B) वकील 
(C) प्रोफ़ेसर 
(D) डॉकटर 

उत्तर

(A) बिजनेसमैन या इंजिनियर 


26. मदन की उम्र क्या थी ?

(A) पांच - छह साल 
(B) सात - आठ साल 
(C) तीन - चार साल 
(D) दस - ग्यारह साल 

उत्तर

(A) पांच - छह साल


27. काशु मदन के साथ किस खेल में शरीक होना चाहता था ?

(A) फुटबॉल के खेल में 
(B) हौकी के खेल में 
(C) बैडमिन्टन के खेल में 
(D) लट्टू के खेल में 

उत्तर

(D) लट्टू के खेल में 


28. मदन ने काशु के कितने दांत तोड़ डाले ?

(A) तीन 
(B) एक 
(C) दो 
(D) चार 

उत्तर

(C) दो 


29. गिरधरलाल किसकी फैक्ट्री में किरानी था ?

(A) मुखर्जी साहब की फैक्ट्री में 
(B) सिंह साहब की फैक्ट्री में 
(C) सेन साहब की फैक्ट्री में 
(D) पत्रकार महोदय की फैक्ट्री में 

उत्तर

(C) सेन साहब की फैक्ट्री में 


30. सेन साहब किसके व्यंग्य से ऐंठकर रह गए ?

(A) पत्रकार महोदय के व्यंग्य से 
(B) मुखर्जी साहब के व्यंग्य से 
(C) गिरधरलाल के व्यंग्य से 
(D) सिंह साहब के व्यंग्य से 

उत्तर

(A) पत्रकार महोदय के व्यंग्य से 


31. मदन किसका पुत्र था ?

(A) सेन साहब 
(B) गिरधर 
(C) शोफर 
(D) सिंह साहब 

उत्तर

(B) गिरधर 


32. सेन साहब की कार की कीमत है ?

(A) साढ़े सात हजार 
(B) साढ़े आठ हजार 
(C) साढ़े दस हजार 
(D) साढ़े सात लाख 

उत्तर

(A) साढ़े सात हजार 


33. नलिन विलोचन शर्मा के पिता का नाम क्या था ?

(A) पंडित रामावतार शर्मा 
(B) पंडित मृत्युंजय शर्मा 
(C) पंडित कृष्णावतार शर्मा 
(D) पंडित दशावतार शर्मा 

उत्तर

(A) पंडित रामावतार शर्मा 


34. नलिन विलोचन शर्मा के माताजी का क्या नाम था ?

(A) पधमावती शर्मा 
(B) रत्नावती शर्मा 
(C) कलावती शर्मा 
(D) इन्द्रावती शर्मा 

उत्तर

(B) रत्नावती शर्मा 


35. लडकियाँ क्या है , कठपुतलियाँ है , किसे इस बात पट गर्व है ?

(A) भाई - बहन को 
(B) माता - पिता को 
(C) चाचा - चाची को 
(D) मामा - मामी को 

उत्तर

(B) माता - पिता को


36. सेन साहब की आँखों का तार है ?

(A) कार 
(B) खोखी 
(C) खोखा 
(D) उपर्युक्त सभी 

उत्तर

(C) खोखा 


37. खोखा के किसने तोडा ?

(A) मदन ने 
(B) मदन के दोस्त ने 
(C) सेन साहब ने 
(D) गिरधर ने 

उत्तर

(A) मदन ने 


38. सीमा , रजनी , आलो, शेफाली , आरती पांचो किसकी बहने थी ?

(A) मदन की 
(B) खोखा की 
(C) लेखक की 
(D) सेन साहब की 

उत्तर – खोखा की


विष के दाँत प्रथा लेखक परिचय

नलिन विलोचन शर्मा का जन्म 18 फरवरी 1916 ई० में पटना के बदरघाट में हुआ । वे जन्मना भोजपुरी भाषी थे। वे दर्शन और संस्कृत के प्रख्यात विद्वान महामहोपाध्याय पं० रामावतार शर्मा के ज्येष्ठ पुत्र थे । माता का नाम रत्नावती शर्मा था। उनके व्यक्तित्व-निर्माण में पिता के पांडित्य के साथ उनकी प्रगतिशील दृष्टि की भी बड़ी भूमिका थी। उनकी स्कूल की पढ़ाई पटना कॉलेजिएट स्कूल से हुई और पटना विश्वविद्यालय से उन्होंने संस्कृत और हिंदी में एम० ए० किया। वे हरप्रसाद दास जैन कॉलेज, आरा, राँची विश्वविद्यालय और अंत में पटना विश्वविद्यालय में प्राध्यापक रहे । सन् 1959 में वे पटना विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष हुए और मृत्युपर्यंत (12 सितंबर 1961 ई०) इस पद पर बने रहे।

हिंदी कविता में प्रपद्यवाद के प्रवर्तक और नई शैली के आलोचक नलिन जी की रचनाएँ इस प्रकार हैं – ‘दृष्टिकोण’, ‘साहित्य का इतिहास दर्शन’, ‘मानदंड’, ‘हिंदी उपन्यास – विशेषतः प्रेमचंद’, ‘साहित्य तत्त्व और आलोचना’ – आलोचनात्मक ग्रंथ; ‘विष के दाँत’ और सत्रह असंगृहीत पूर्व छोटी कहानियाँ — कहानी संग्रह; केसरी कुमार तथा नरेश के साथ काव्य संग्रह – ‘नकेन के प्रपद्य’ और ‘नकेन- दो’, ‘सदल मिश्र ग्रंथावली’, ‘अयोध्या प्रसाद खत्री स्मारक ग्रंथ’, ‘संत परंपरा और साहित्य’ आदि संपादित ग्रंथ हैं।

आलोचकों के अनुसार, प्रयोगवाद का वास्तविक प्रारंभ नलिन विलोचन शर्मा की कविताओं से हुआ और उनकी कहानियों में मनोवैज्ञानिकता के तत्त्व समग्रता से उभरकर आए। आलोचना में वे आधुनिक शैली के समर्थक थे । वे कथ्य, शिल्प, भाषा आदि सभी स्तरों पर नवीनता के आग्रही लेखक थे। उनमें प्रायः परंपरागत दृष्टि एवं शैली का निषेध तथा आधुनिक दृष्टि का समर्थन है । आलोचना की उनकी भाषा गठी हुई और संकेतात्मक है । उन्होंने अनेक पुराने शब्दों को नया जीवन दिया, जो आधुनिक साहित्य में पुनः प्रतिष्ठित हुए ।

यह कहानी ‘विष के दाँत तथा अन्य कहानियाँ’ नामक कहानी संग्रह से ली गई है। यह कहानी मध्यवर्ग के अनेक अंतर्विरोधों को उजागर करती है। कहानी का जैसा ठोस सामाजिक संदर्भ है, वैसा ही स्पष्ट मनोवैज्ञानिक आशय भी । आर्थिक कारणों से मध्यवर्ग के भीतर ही एक ओर सेन साहब जैसों की एक श्रेणी उभरती है जो अपनी महत्वाकांक्षा और सफेदपोशी के भीतर लिंग-भेद जैसे कुसंस्कार छिपाये हुए हैं तो दूसरी ओर गिरधर जैसे नौकरीपेशा निम्न मध्यवर्गीय व्यक्ति की श्रेणी है जो अनेक तरह की थोपी गयी बंदिशों के बीच भी अपने अस्तित्व को बहादुरी एवं साहस के साथ बचाये रखने के लिए संघर्षरत है । यह कहानी सामाजिक भेद-भाव, लिंग-भेद, आक्रामक स्वार्थ की छाया में पलते हुए प्यार-दुलार के कुपरिणामों को उभारती हुई सामाजिक समानता एवं मानवाधिकार की महत्त्वपूर्ण बानगी पेश करती है ।


विष के दाँत पाठ परिचय

प्रस्तुत कहानी ‘विष के दाँत’ में मध्यमवर्गीय अन्तर्विरोधों को उजागर किया गया है। आर्थिक कारणों से मध्यवर्ग के भीतर ही एक ओर सेन साहब जैसे महत्वाकांक्षी तथा सफेदपोशी अपने भीतर लिंग-भेद जैसे कुसंस्कार छिपाए हुए हैं तो दूसरी ओर गिरधर जैसे नौकरीपेशा निम्न मध्यवर्गीय है जो अनेक तरह के थोपी गई बंदिशों के बीच भी अपने अस्तित्व को बहादुरी एवं साहस के साथ बचाए रखने के लिए संघर्षरत है।
यह कहानी समाजिक भेदभाव, लिंग-भेद, आक्रामक स्वार्थ की छाया में पलते हुए प्यार दुलार के कुपरिणामों को उभरती हुई सामाजिक समानता एवं मानवाधिकार की महत्वपूर्ण नमूना पेश करती है।


विष के दाँत का सारांश (Summary)

सेन साहब एक अमीर आदमी थे। उनकी पाँच लड़कियाँ थी, एक लड़का था। लड़कियाँ क्या थी कठपुतलियाँ। वे किसी चीझ को ताड़ती-फोड़ती न थी। दौड़ती और खेलती भी थी, तो केवल शाम के वक्त। सेन साहब नयी मोटरकार ली थी- स्ट्रीमलैण्ड। काली चमकती हुई, खुबसूरत गाड़ी थी। सेन साहब को उस पर नाज था। एक धब्बा भी न लगने पाये- क्लिनर और शोफर को सेन साहब की सख्त ताकीद थी। चूँकि खोखा सबसे छोटा और सेन साहब के नाउम्मीद बुढ़ापे की आँखों का तारा था इसलिए मोटर को कोई खतरा था तो खोखा से ही।
एक दिन की बात है कि सेन साहब का शोफर एक औरत से उलझ पड़ा बात यह थी कि उसका पाँच-छः साल का बच्चा मदन गाड़ी को छुकर गंदा कर रहा था और शोफर ने जब मना किया तो वह उल्टे शोफर से ही उलझ पड़ी।
वह मामला अभी सिमटा ही था कि इस बीच खोखे ने मोटर की पिछली बती का लाल शीशा चकनाचुर कर दिया। लकिन सेन साहब ने इसका बुरा नहीं माना और अपने मित्राें से कहा- ‘देखा, आपलोगों ने ? बड़ा शरारती हो गया है काशु। मोटर के पिछे हरदम पड़ा रहता है। ‘ काशु ने मिस्टर सिंह साहब के अगले तथा पिछले पहीयां के हवा निकाल दी थी। जब मिस्टर सिंह विदा हो गये तो सेन साहब ने मदन के पिता गिरधर लाल को जो उनके फैक्ट्री में किरानी था। उसे सेन साहब ने खुब खरी-खोटी सुनाई और कहा कि बच्चों को सम्भाल कर रखो। उस रात गिरधारी लाल ने अपने बेटे मदन की खुब पिटाई की।
दूसरे दिन शाम को मदन, कुछ लड़कों के साथ लट्टू नचा रहा था। खोखा ने भी लट्टू नचाने के लिए, माँगा लेकिन मदन ने उसे फटकार दिया- ‘अबे, भाग जा यहाँ से ! बड़ा आया है लट्टू नचाने, जा अपने बाबा की मोटर पर बैठ।’
काशु को गुस्सा आ गया, वह इसी उम्र में अपनी बहनों पर, नौकरों पर हाथ चला देता था और क्या मजाल उसे कोई कुछ कह दे। उसने न आव देखा न ताव, मदन को एक घुस्सा कस दिया। मदन ने काशु पर टूट पड़ा। उसकी मरम्मत जमकर कर दी। काशु रोता हुआ घर चला गया। लेकिन मदन घर नहीं लौटा। आठ-नौ बजे रात को मदन इधर-उधर घूमते हुए गली के दरवाजे से घर में घुसा। डर तो यही है कि आज अन्य दिनों की अपेक्षा मार अधिक लगेगी। रसोई घर में घुसा। भरपेट खाना खाया। फिर बगल वाले कमरे के दरवाजे पर जाकर अन्दर की बात सुनने लगा।
उसे इस बात का ताज्जुब हो रहा था कि उसके पिता क्यों गरज-तरज नहीं रहे हैं, जबकि उसने काशु के दो-दो दाँत तोड़ डाले थे। इसका कारण यह था कि उसके पिता को नौकरी से हटा दिया गया था और मकान खाली करने का आदेश दिया जा चूका था। वह दबे पाँव बरामदे पर रखी चरपाई की तरफ सोने के लिए चला कि अँधेरे में उसका पैर लोटे पर लग गया, ठन्-ठन् की आवाज सुनकर गिरधर बाहर निकला।
और मदन की ओर बढ़ा, उसके चेहरे से नाराजगी के बादल छँट गए। उसने मदन को अपनी गोद में उठाकर बेपरवाही, उल्लास और गर्व के साथ बोल उठा, जो किसी के लिए भी नौकरी से निकाले जाने पर ही मुमकिन हो सकता है, शाबाश बेटा ! एक तेरा बाप है, और तु ने तो, खोखा के दो-दो दाँत तोड़ डाले। लेखक के कहने का तात्पर्य है कि कोई व्यक्ति स्वार्थवश ही किसी का अपमान सहन करता है, स्वार्थरहित ईंट का जवाब पत्थर से देता है। इसी मजबुरी के कारण गिरधर अपने पुत्र को निर्दोष होते हुए भी पीटता था, क्योंकि विष के दाँत लगे हुए थे, इसे टूटते ही दुत्कार प्यार में बदल जाता है।

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