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MCQ and Summary for माँ (Maa) Class 10 Hindi Varnika Part 2 Bihar Board

माँ - ईश्वर पेटलीकर MCQ and सारांश

Multiple Choice Question Solutions (बहुविकल्पी प्रश्न)

1. माँ कहानी है?
(A) राजस्थानी
(B) गुजराती
(C) तमिल
(D) उडिया
उत्तर
(B) गुजराती

2. माँ कहानी के रचनाकार कौन है ?
(A) साँवर दइया
(B) श्रीनिवास
(C) ईश्वर पेटलीकर
(D) सुजाता
उत्तर
(C) ईश्वर पेटलीकर


3. मंगु जन्म से ही कैसी है?
(A) अंधी
(B) बहरी
(C) पागल
(D) गूंगी
उत्तर
(C) पागल

4. माँ की कितनी संतानें थी?
(A) तीन
(B) दो
(C) पाँच
(D) चार
उत्तर
(D) चार

5. मंगु को अस्पताल ले जाते समय माँ कैसी थी ?
(A) प्रसन्न
(B) उदास
(C) पागल
(D) उद्विग्न
उत्तर
(D) उद्विग्न

6. माँ कहानी की नायिका कैसी नारी है ?
(A) सहनशील
(B) झगड़ालू
(C) पागल
(D) सभी सत्य है
उत्तर
(A) सहनशील

7. मंगु की माँ की कितनी संतानें थीं?
(A) 1
(B) 2
(C) 3
(D) 4
उत्तर
(D) 4

8. मंगु जिस अस्पताल में भर्ती की जाती है, उसके कर्मचारी कैसे थे ?
(A) लापरवाह
(B) कर्त्तव्य-परायण
(C) घूसखोर
(D) वाकपटु
उत्तर
(B) कर्त्तव्य-परायण

9. मंगु की देखभाल कौन करती थी?
(A) उसकी बहनें
B) उसके भाई
(C) उसके चाचा
(D) उसकी माँ
उत्तर
(D) उसकी माँ

10. मंगु की माँ अस्पताल में उसे भरती क्यों नहीं करना चाहती थी?
(A) अस्पताल में उसकी देखभाल ठीक से न हो पाती
(B) डॉक्टर जल्लाद की तरह थे
(C) अस्पताल में गंदगी का अम्बार था
(D) वहाँ की नर्से झगड़ालू थीं
उत्तर
(A) अस्पताल में उसकी देखभाल ठीक से न हो पाती

11. भूतनी कहने पर परिचारिका _____
(A) उत्तेजित नहीं होती
(B) दुःखी हो जाती
(C) रोने लगती
(D) उत्तेजित हो जाती
उत्तर
(A) उत्तेजित नहीं होती

12. कुसुम कौन थी?
(A) गाँव की लड़की
(B) गाँव की पागल लड़की
(C) दोनों सत्य है
(D) सभी असत्य हैं
उत्तर
(C) दोनों सत्य है

13. ईश्वर पेटलीकर किस भाषा के बहुप्रशंसित रचनाकार हैं ?
(A) गुजराती
(B) असमिया
(C) तमिलनाडु
(D) कन्नड़
उत्तर
(A) गुजराती

14. मंगु के अलावा उसकी माँ की कितनी संतानें थीं?
(A) दो
(B) तीन
(C) चार
(D) एक
उत्तर
(B) तीन


माँ लेखक परिचय

ईश्वर पेटलीकर गुजराती के लोकप्रिय कथाकार हैं । इनके कथा साहित्य में गुजरात का समय और समाज, नये-पुराने मूल्य, दर्शन और कला आदि रच-पककर एक नई आस्वादकता के साथ उपस्थित होते हैं । ‘खून की सगाई’ इनकी प्रसिद्ध कहानी है और ‘काला पानी’ इनका लोकप्रिय उपन्यास है । साहित्य के अलावा श्री पेटलीकर सामाजिक-राजनीतिक जीवन में भी सक्रिय रहे हैं। इनकी दर्जनों पुस्तकें पुरस्कृत और बहुप्रशंसित हो चुकी हैं । यह कहानी गोपालदास नागर द्वारा संपादित एवं अनूदित कहानी संग्रह ‘माँ’ से साभार संकलित है।


माँ का सारांश (Summary)

मंगु को पागलों की अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह लोग जब उसकी माँ को देते तो वह एक ही जवाब देती- माँ होकर सेवा नहीं कर सकती तो अस्पताल वाले क्या करेंगे ?
जन्मजात पागल और गूंगी मंगु को जिस तरह पालती-पोसती सेवा करती उसे देखकर सभी माँ की प्रशंसा करते। मंगु के अलावा माँ को तीन संतानें थी। दो पुत्र और एक पुत्री। बेटी ससुराल चली गई थी और पुत्र पढ़-लिखकर शहरी हो गये थे। उनके बाल-बच्चे थे। जब सभी गाँव आते तो माँ उनको भी प्यार करती किन्तु बहुओं को संतोष नहीं होता। वे जलने लगती। कहती- ‘मंगु को झुठा प्यार-दुलार कर माँ ने ही अधिक पागल बना दिया है।
आदत डाली होती तो पाखाना-पेशाब का तो ख्याल रखती। डाँट से तो पशु भी सीख लेते हैं। बेटी भी ऐसे हीं बाते सुनाती। पुत्र माँ के भाव को समझते थे इसलिए कुछ नहीं कहते थे।
इसी बीच कुसुम अस्पताल गई और दूसरे महीने ही ठीक हो गई। फिर भी डॉक्टरों के कहने पर एक महिना और रही। गाँव आई तो सभी देखने दौड़े। अब लोग कहने लगे- ‘माँ जी, एक बार अस्पताल में मंगु को भर्ती करा के देखो जरूर अच्छी हो जाएगी‘ इस बार माँ ने विरोध नहीं किया। बड़े बेटे को चिट्ठी भेजवाई। लकिन रात की नींद उड़ गई, मन का चैन छिन गया। कैसे रहेगी मंगु अस्पताल में ? कुछ भी तो सऊर नहीं इसे। चिट्ठी पाकर बड़ा बेटा आ गया। मजिस्ट्रेट से जरूरी कागज तैयार करवाये।
माँ को लगा कि बेटा भी मंगु से छुटकारा चाहता है जो जल्दी-जल्दी करवा रहा है। आखिर जाने का दिन आ गया। उस रात माँ को नींद नही आई। जब मंगु को लेकर घर से बाहर निकलने लगी तो जैसे ब्रह्माण्ड का बोझ उस पर आ गया।
माँ भारी कदमों से अस्पताल में दाखिल हुई। मुलाकात का समय था। एक पागल अपने पति से लिपट गई । बोली- ई भूतनियाँ मुझे अच्छे कपड़े नहीं देतीं उसकी परिचारिका ने हँसकर कहा- ‘खा लो, मैं सब दुँगी‘ माँ को विश्वास हो गया कि ये सब लोग दयालु हैं।
डॉक्टर और मेट्रन आ गई। मंगु का कागज देखा। बेटे ने कहा- ‘मेरी मंगु का ठीक से ख्याल रखिएगा।‘ मेट्रन ने कहा- आपको चिंता करने की जरूरत नहीं। बीच में ही माँ ने कहा- बहन ! यह एकदम पागल है, कोई न खिलाए तो खाती नहीं…..टट्टी की भी सुध नहीं……रोशनी में उसे नींद नहीं आती। कहते-कहते माँ रो पड़ी।
सभी लोग उसकी रूलाई से संजीदा हो गए। मेट्रन ने कहा- धीरज रखें। यह भी कुसुम की तरह ठीक हो जाएगी। यहाँ रात को चार-पाँच बार बिछावन की जाँच होती है। जो सोते नहीं उन्हें दवा देकर सुलाया जाता है। जो खुद नहीं खाते उन्हें मुँह में खिलाया जाता है। माँ की बेकली के आगे मेट्रन की शक्ति लुप्त हो गई।
मंगु को छोड़ माँ-बेटे जब बाहर आए तो दोनों के चेहरे पर शोक के बादल थे। रास्ते भर माँ रोती रही। रात भर माँ यही सोचती रही कि मंगु क्या कर रही होगी ? इतनी ठंड में किसी ने उसे कुछ ओढ़ाया होगा या नहीं ? मंगु के बिना आज माँ का विछावन सुना लगा। बाहर बेटे को भी नींद नहीं आ रही थी। सोच रहा था कि मैं मंगु को अच्छी तरह पालूँगा।
सुबह जब चक्की की आवाज शुरू हुआ तो एक चिख सुनाई पड़ी-‘दौड़ो रे दौड़ो ! मेरे मंगु को मार डाला।‘ बेटा चारपाई से उछल पड़ा। माँ मंगु के श्रेणी में मिल गई थी।

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