NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aaroh Chapter 5 सहर्ष स्वीकारा है

Chapter 5 सहर्ष स्वीकारा है NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aaroh is very useful that help in revising the chapter properly and prepare yourself well before examinations. These NCERT Solutions are helpful resources that can help you not only cover the entire syllabus and getting command over the subject. सहर्ष स्वीकारा है is written by गजानन माधव मुक्तिबोध that can be used to enrich knowledge.

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aaroh Chapter 5 सहर्ष स्वीकारा है

Chapter 5 सहर्ष स्वीकारा है Class 12 Hindi Aaroh NCERT Solutions


कविता के साथ

1. टिप्पणी कीजिए; गरबीली गरीबी, भीतर की सरिता, बहलाती सहलाती आत्मीयता, ममता के बादल।

उत्तर

गरबीली गरीबी - गरबीली गरीबी का अर्थ है गर्वीली गरीबी अर्थात गर्वयुक्त दरिद्रता । यहाँ कवि ने ऐसी गरीबी का चित्रण किया है जिससे वह हताश, निराश और दुखी नहीं होता बल्कि धैर्य, साहस और स्वाभिमान से उसका मुकाबला करता है। यह उसके व्यक्तित्व कोऔर निखारता है|

भीतर की सरिता - सरिता का अर्थ है नदी का प्रवाह। जिस प्रकार नदी प्रवाहित होती उसी प्रकार मनुष्य के हृदय में विचार को प्रवाह होता रहता है| इससे हमारे मन में नवीन विचार जागृत होते रहते हैं जिसे रोक पाना अत्यंत कठिन है।

बहलाती सहलाती - बहलाती, सहलाती आत्मीयता का अर्थ है बहलाने, सहलानेवाला अपनापन। मनुष्य समाज में रहता है|  हर मनुष्य की किसी न किसी के साथ अटूट संबंध होता है कि हर स्थिति में वे एक-दूसरे का साथ देने के लिए तत्पर रहते हैं। परन्तु इस कविता में कवि जीवन से इतना दुखी और निराश हो चुका है कि उसे अपनापन भी अच्छा नहीं लग रहा|

ममता के बादल - ममता के बादल का अर्थ है प्रेम के बादल। जिस प्रकार बादल अपनी वर्षा से पृथ्वी को जलमग्न और हरा-भरा कर सबको सुख प्रदान करते हैं उसी प्रकार प्रेम रूपी बादल अपने भावों से  अपने लोगों को आनंद प्रदान करते हैं। लेकिन यहाँ कवि को प्रेम, आनंद अच्छी नहीं लगता|

2. इस कविता में और भी टिप्पणी-योग्य पद-प्रयोग हैं। ऐसे किसी एक प्रयोग का अपनी ओर से उल्लेख कर उस पर टिप्पणी करें।

उत्तर

मीठे पानी का सोता है - जिस प्रकार झरने में चारों ओर की पहाड़ियों से पानी एकत्रित हो जाता है और वह मीठा होता है उसी प्रकार कवि के हृदय में मृदु-कोमल-प्रेम भावनाओं का झरना बहता रहता है और वे बार-बार व्यक्त करने पर भी वे पुनः जन्म लेते रहते हैं।

3. व्याख्या कीजिए :
जाने क्या रिश्ता है, जाने क्या नाता है
जितना भी उँडेलता हूँ, भर-भर फिर आता है
दिल में क्या झरना है?
मीठे पानी का सोता है
भीतर वह, ऊपर तुम
मुसकाता चाँद ज्यों धरती पर रात-भर
मुझ पर त्यों तुम्हारा ही खिलता वह चेहरा है!
उपर्युक्त पंक्तियों की व्याख्या करते हुए यह बताइए कि यहाँ चाँद की तरह आत्मा पर झुका चेहरा भूलकर अंधकार-अमावस्या में नहाने की बात क्यों की गई है?

उत्तर

इन पंक्तियों में कवि अपनी प्रेयसी को याद करते हुए कहता है कि उसके साथ न जाने उसका कैसा संबंध है कि जितना वह अपने भीतर समाए हुए प्रेयसी के प्रेम रूपी जल को बाहर निकालता है वह फिर से चारों ओर से सिमटकर उसके पास वापस चला आता है। कवि को यह देखकर ऐसे लग रहा कि कहीं मेरे हृदय में प्रेम का कोई झरना तो नहीं बह रहा है जिसका जल समाप्त होने को ही नहीं आता। कवि के मन में प्रेम है और ऊपर से प्रेयसी का चाँद जैसा मुस्कराता हुआ सुंदर चेहरा रात भर अपने अद्भुत सौंदर्य के प्रकाश से कवि को नहलाता रहता है।

कवि चाँद की तरह आत्मा पर झुका चेहरा भूलकर अंधकार-अमावस्या में इसलिए नहाना चाहता है क्योंकि उससे प्रेयसी की यादें अब सहन नहींहोतीं। ममता रूपी बादलों की मँडराती कोमलता भी उसके हृदय को पीड़ादायक लगती है। उसकी आत्मा कमज़ोर और शक्तिहीन हो गई है|

4. तुम्हें भूल जाने की
दक्षिण ध्रुवि अंधकार-अमावस्या
शरीर पर, चेहरे पर, अंतर में पा लूँ मैं
झेलूँ मैं, उसी में नहा लूँ मैं
इसलिए कि तुमसे ही परिवेष्टित आच्छादित
रहने का रमणीय उजेला अब
सहा नहीं जाता है

(क) यहाँ अंधकार-अमावस्या के लिए क्या विशेषण इस्तेमाल किया गया है और उससे विशेष्य में क्या अर्थ जुड़ता है?
(ख) कवि ने व्यक्तिगत संदर्भ में किस स्थिति को अमावस्या कहा है?
(ग) इस स्थिति से ठीक विपरीत ठहरने वाली कौन-सी स्थिति कविता में व्यक्त हुई है? इस वैपरीत्य को व्यक्त करने वाले शब्द का व्याख्यापूर्वक उल्लेख करें।
(घ) कवि अपने संबोध्य (जिसको कविता संबोधित है कविता का 'तुम') को पूरी तरह भूल जाना चाहता है, इस बात को प्रभावी तरीके से व्यक्त करने के लिए क्या युक्ति अपनाई है? रेखांकित अंशों को ध्यान में रखकर उत्तर दें।

उत्तर

(क) यहाँ 'अंधकार-अमावस्या के लिए ‘दक्षिण ध्रुवी' विशेषण का इस्तेमाल किया है। इसके प्रयोग से अंधकार का घनत्व और अधिक बढ़ जाता है। कवि उसे अपने जीवन में धारण करके अपनी प्रेयसी के प्यार को बिल्कुल भूल जाना चाहता है।

(ख) कवि ने व्यक्तिगत संदर्भ में अपने जीवन के दुखों को अमावस्या कहा है, जिससे वह चाहकर भी अपना पीछा नहीं छुड़ा पाता।

(ग) इस स्थिति से ठीक विपरीत ठहरने वाली स्थिति इस प्रकार है-'तुमसे ही परिवेष्टित आच्छादित रहने का रमणीय यह उजेला कवि ने प्रियतम की आभा से सदैव घिरे रहने की स्थिति को उजाले के रूप में व्यक्त किया है। उजाला मनुष्य को रास्ता दिखाता है। इसी प्रकार प्रेयसी का प्रेम-उजाला उसे जीवन पथ पर चलने के लिए प्रोत्साहित करता है।

(घ) कवि ने अपने संबोधन को पूरी तरह भूलकर कार्य में लीन हो जाने की बात की है। कोई भी व्यक्ति अपने काम में लीन होकर ही अपने कष्टों को विस्मृत कर सकता है।

5. बहलाती सहलाती आत्मीयता बरदाश्त नहीं होती है- और कविता के शीर्षक सहर्ष स्वीकारा है में आप कैसे अंतर्विरोध पाते हैं। चर्चा कीजिए।

उत्तर

इन दोनों वाक्यांशों में गहरा अंतर्विरोध है। एक ओर कविता के प्रारंभ में कवि ने सब कुछ सहर्ष स्वीकारा है क्योंकि वह सब उसकी प्रिया को प्यारा है वहीं दूसरी ओर अपनी प्रेयसी का असीम प्यार आत्मीयता उसका बहलाना व सहलाना उससे बर्दाश्त नहीं हो पा रहा है।

कविता के आस-पास

1. अतिशय मोह भी क्या त्रास का कारक है? माँ का दूध छूटने का कष्ट जैसे एक जरूरी कष्ट है, वैसे ही कुछ और जरूरी कष्टों की सूची बनाएँ।

उत्तर

(i) माँ-पिता के बिछड़ने का डर
(ii) बेटी की विदाई
(iii) घुटनों के बल चलना
(iv) प्रिय व्यक्ति का साथ छूटना

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