कठपुतली वसंत भाग - 1 (Summary of Kathputli Vasant)

यह कविता भवानीप्रसाद मिश्र द्वारा लिखा गया है जिसमें कवि ने हमें अपनी स्वतंत्रता के लिए सचेत रहने को कहा है| कठपुतली जो दूसरों के इशारे पर नाचती है, एक दिन गुलामी से तंग आकर बोली - ये धागे मेरे शरीर के आगे और पीछे क्यों बाँध रखे हैं? तुम इन्हें तोड़ कर मुझे स्वतंत्र कर दो ताकि मैं अपने पैरों पर खुद चल सकूँ।

एक कठपुतली के स्वतंत्र होने की इच्छा को सुनकर अन्य कठपुतलियाँ भी कहने लगीं कि हमने बहुत दिनों से अपने मन की बात नहीं की। हमने अपने मन की इच्छाओं को दबा रखा है।

अन्य कठपुतलियों के स्वतंत्र होने की इच्छा देखकर पहली कठपुतली सोचने लगती है कि इस इच्छा का क्या परिणाम होगा? क्या वे अपनी स्वतंत्रता को सँभाल पाएँगीं? अपने पैरों पर खड़ी रह पाएँगीं ? अन्य कठपुतलियाँ आज़ादी का सही उपयोग कर सकेंगी? फलस्वरूप पहली कठपुतली सोच-समझ कर कोई कदम उठाना जरूरी समझती हैं।

कठिन शब्दों के अर्थ -

• और-और - अन्य सभी
• मन के छंद - मन के भाव

NCERT Solutions of कठपुतली
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