NCERT Solutions for Class 12th: Ch 6 वंशागति का आणविक आधार जीव विज्ञान

NCERT Solutions of Jeev Vigyan for Class 12th: Ch 6 वंशागति का आणविक आधार जीव विज्ञान  

प्रश्न 

पृष्ठ संख्या 134

1. निम्न को नाइट्रोजनीकृत क्षार व न्यूक्लियोटाइड के रूप में वर्गीकृत कीजिए-
एडेनीन, साइटीडीन, थाइमिन, ग्वानोसीन, यूरेसील व साइटोसीन

उत्तर

नाइट्रोजनीकृत क्षार- एडेनीन, थाइमिन तथा यूरेसील
न्यूक्लियोटाइड- साइटीडीन, ग्वानोसीन तथा साइटोसीन

2. यदि एक द्विरज्जुक डीएनए में 20 प्रतिशत साइटोसीन है तो डीएनए में मिलने वाले एडेनीन के प्रतिशत की गणना कीजिए|

उत्तर

साइटोसीन का प्रतिशत= 20 (दिया गया है)
% of C = % of G
इसलिए ग्वानिन का प्रतिशत= 20
थाइमिन का प्रतिशत + एडेनीन का प्रतिशत= 100 - (20 + 20) = 60 होगा|
इस प्रकार एडेनीन का प्रतिशत = 60/2 = 30 होगा|

3. यदि डीएनए के एक रज्जुक के अनुक्रम निम्नवत लिखें हैं-
5’ ATGCATGCATGCATGCATGCATGC- 3’
तो पूरा रज्जुक के अनुक्रम को 5’→3’ दिशा में लिखें|

उत्तर

पूरा रज्जुक के अनुक्रम को 5’→3’ दिशा में लिखने पर-
5'-TACGTACGTACGTACGTACGTACGTACG-3' होगा|

4. यदि अनुलेखन ईकाई में कूटलेखन रज्जुक के अनुक्रम को निम्नवत लिखा गया है-
5'-ATGCATGCATGCATGCATGCATGCATGC-3'
तो दूत आरएनए के अनुक्रम को लिखें|

उत्तर

टेम्पलेट रज्जुक का अनुक्रम होगा-
3'-TACGTACGTACGTACGTACGTACGTACG-5'
इस प्रकार, दूत आरएनए का अनुक्रम होगा-
5'-AUGCAUGCAUGCAUGCAUGCAUGCAUGC-3'

5. डीएनए द्विकुंडली की कौन सी विशेषता वाटसन व क्रिक को डीएनए प्रतिकृति के सेमी-कंजर्वेटिव रूप को कल्पित करने में सहयोग किया इसकी व्याख्या कीजिए|

उत्तर

वाटसन व क्रिक का सहयोग करने वाली डीएनए द्विकुंडली की विशेषता :

दोनों रज्जुकों के क्षार आपस में हाइड्रोजन बंध द्वारा युग्मित होकर क्षार युग्मक बनाते हैं, जबकि एडेनिन व थाइमिन जो विपरीत रज्जुकों में होते हैं, आपस में दो हाइड्रोजन बंध बनाते हैं|
• दो रज्जुक एक दूसरे के विपरीत होती हैं जिसमें क्षार हमेशा अपने समकक्ष A के साथ T तथा G के साथ C युग्म बनाते हैं|

6. टेंपलेट (डीएनए या आरएनए) के रासायनिक प्रकृति व इससे (डीएनए या आरएनए) संश्लेषित न्यूक्लिक अम्लों की प्रकृति के आधार पर न्यूक्लिक अम्ल पालीमरेज के विभिन्न प्रकार की सूची बनाइए|

उत्तर

डीएनए पॉलीमरेज पर निर्भर डीएनए, डीऑक्सीन्यूक्लियोराइड के बहुकलन को उत्प्रेरित करने के लिए डीएनए टेंपलेट का उपयोग करता है|
आरएनए पॉलीमरेज पर निर्भर डीएनए सभी प्रकार के आरएनए (सभी जीवाणुओं में) के अनुलेखन को उत्प्रेरित करता है|
आरएनए पॉलीमरेज-I पर निर्भर डीएनए आर आरएनए का अनुलेखन करते हैं|
आरएनए पॉलीमरेज-II पर निर्भर डीएनए दूत आरएनए (mRNA) के पूर्ववर्ती रूप का अनुलेखन करते हैं|
आरएनए पॉलीमरेज-III पर निर्भर डीएनए अंतरण आरएनए (tRNA) का अनुलेखन करते हैं|

7. डीएनए आनुवंशिक पदार्थ है, इसे सिद्ध करने हेतु अपने प्रयोग के दौरान हर्षे व चेस ने डीएनए ए प्रोटीन के बीच कैसे अंतर स्थापित किया?

उत्तर

हर्षे व चेस के प्रयोग के अनुसार :

उन्होंने एक माध्यम पर जीवाणुभोजी पैदा किया जिसमें एक को विकिरण सक्रिय फ़ॉस्फोरस तथा दूसरे को विकिरण सक्रिय सल्फ़र पर वृद्धि किया था|  

जिन विषाणुओं को विकिरण सक्रिय फ़ॉस्फोरस की उपस्थिति में पैदा किया, उसमें विकिरण सक्रिय डीएनए पाया गया जबकि विकिरण सक्रिय प्रोटीन नहीं था|

जिन विषाणुओं को विकिरण सक्रिय सल्फ़र की उपस्थिति में पैदा किया गया उसमें विकिरण सक्रिय प्रोटीन पाई गई, डीएनए विकिरण सक्रिय नहीं था; क्योंकि डीएनए में सल्फर नहीं मिलता है|  

जो जीवाणु विकिरण सक्रिय रखने वाले जीवाणुभोजी से संक्रमित हुए थे, वे विकिरण सक्रिय रहे| इससे यह स्पष्ट है कि जो पदार्थ विषाणु से जीवाणु में प्रवेश करता है, वह डीएनए है|

जो जीवाणु उन विषाणुओं से संक्रमित थे जिनमें विकिरण सक्रिय प्रोटीन था, वे विकिरण सक्रिय नहीं हुए| इससे संकेत मिलता है कि प्रोटीन विषाणु से जीवाणु में प्रवेश नहीं करता है|

इससे यह सिद्ध होता है कि आनुवांशिक पदार्थ डीएनए ही है जो विषाणु से जीवाणु में जाता है|

8. निम्न के अंतर बताइए-
(क) पुनावृत्ति डीएनए एवं अनुषंगी डीएनए
(ख) एमआरएनए और टीआरएनए
(ग) टेम्पलेट रज्जु और कोडिंग रज्जु 

उत्तर

(क) पुनावृत्ति डीएनए एवं अनुषंगी डीएनए

पुनरावृत्ति डीएनए
अनुषंगी डीएनए
डीएनए अंगुलिछापी में डीएनए अनुक्रम में स्थित कुछ विशिष्ट जगहों के बीच विभिन्नता का पता लगाते हैं, जिसे पुनरावृत्ति डीएनए कहते हैं| अनुक्रमों में डीएनए का छोटा भाग कई बार पुनरावृत होता है|पुनरावृत्ति डीएनए को जीनोमिक डीएनए के ढेर से अलग करने के लिए जो विभिन्न शिखर बनाते हैं घनत्व प्रवणता अपकेंद्रीकरण द्वारा अलग करते हैं| डीएनए ढेर एक बहुत बड़ा शिखर बनाता है जबकि साथ में अन्य छोटे शिखर बनते हैं जिसे अनुषंगी डीएनए कहते हैं| 

(ख) एमआरएनए और टीआरएनए

एमआरएनए
टीआरएनए
एमआरएनए टेम्पलेट प्रदान करता है|टीआरएनए एमीनो अम्लों को लाने व आनुवांशिक कूट को पढ़ने का काम करता है|
यह एक रैखिक अणु है|इसका आकार तिपतिया (क्लोवर) की पत्ती जैसा होता है| 
यह आरएनए पॉलीमरेज-II द्वारा संश्लेषित होता है|यह आरएनए पॉलीमरेज-III द्वारा संश्लेषित होता है|

(ग) टेम्पलेट रज्जु और कोडिंग रज्जु

टेम्पलेट रज्जु
कोडिंग रज्जु
टेम्पलेट रज्जु में आरएनए अणुओं का अनुलेखन होता है|इसका अनुक्रम एमआरएनए के समान होता है|| 
इसमें ध्रुवत्व 3’→5’ होता है|इसमें ध्रुवत्व 5’→3’ होता है|

9. स्थानांतरण के दौरान राइबोसोम की दो मुख्य भूमिकाओं की सूची बनाइए|

उत्तर

स्थानांतरण के दौरान राइबोसोम की दो मुख्य भूमिकाएँ हैं :

• राइबोसोम दूत आरएनए के प्रारंभक प्रकूट से बंधता है तथा एमीनो अम्ल से जुड़ने के लिए एक जटिल रचना का निर्माण करते हैं|
• राइबोसोम पेप्टाइड बंध के निर्माण में उत्प्रेरक (23 राइबोसोमल आरएनए जीवाणु में एंजाइम – राइबोसोम) का काम करता है|

10. उस संवर्धन में जहाँ ई.कोलाई वृद्धि कर रहा हो लैक्टोज डालने पर लैक-ओपेरान उत्प्रेरित होता है| तब कभी संवर्धन में लैक्टोज डालने पर लैक ओपेरान कार्य करना क्यों बंद कर देता है?

उत्तर

लैक्टोज लैक ओपेरान की सक्रियता के आरंभ (आन) या निष्क्रियता समाप्ति (ऑफ) को नियमित करता है| यदि जीवाणु के संवर्धन माध्यम में लैक्टोज दाल दिया जाता है तब पारमिएड की क्रिया द्वारा लैक्टोज कोशिका के अंदर अभिगमन करता है|

ओपेरान का दमनकारी आई (i) जीन द्वारा संश्लेषित होता है| दमनकारी प्रोटीन ओपेरान के प्रचालक स्थल से बंधकर आरएनए पॉलीमरेज को निष्क्रिय कर देता है जिससे ओपेरान अनुलेखित नहीं हो पाता है| प्रेरक जैसे लैक्टोज की उपस्थिति में दमनकारी प्रेरक से क्रियाकर निष्क्रियित हो जाता है| इसके फलस्वरूप आरएनए पॉलीमरेज उन्नायक से बँध कर अनुलेखन की शुरुआत करता है| 

11. निम्न के कार्यों का वर्णन (एक या दो पंक्तियों से) करो-
(क) उन्नायक (प्रोमोटर)
(ख) अंतरण आरएनए (tRNA)
(ग) एक्जान

उत्तर

(क) उन्नायक (प्रोमोटर)- यह डीएनए का एक भाग है जो अनुलेखन की प्रक्रिया के प्रारंभन में मदद करता है| यह डीएनए अनुक्रम है जिससे आरएनए पॉलीमरेज जुड़ता है|

(ख) अंतरण आरएनए (tRNA)- अंतरण आरएनए एक छोटा आरएनए है, जो एमीनो अम्लों के लाने व आनुवांशिक कूट को पढ़ने का काम करता है| यह आरएनए के स्थानांतरण के दौरान संरचनात्मक व उत्प्रेरक की भूमिका निभाता है|

(ग) एक्जान- कूटलेखन अनुक्रम या अभिव्यक्त अनुक्रमों को एक्जान कहते हैं|

12. मानव जीनोम परियोजना को महापरियोजना क्यों कहा गया?

उत्तर

मानव जीनोम परियोजना को महापरियोजना कहा गया, क्योंकि-

• इसका उद्देश्य संपूर्ण मानव जीनोम में स्थित न्यूक्लियोराइड्स क्रमों का निर्धारण था जो कि बड़ी संख्या में इस योजना का लक्ष्य था|
• मानव जीनोम में लगभग 3×109 क्षार युग्म मिलते हैं तथा पूरी योजना पर खर्च होने वाली लागत लगभग 9 बिलियन अमेरिकी डॉलर थी|
• सूचनाओं के संग्रह, विश्लेषण व पुनः उपयोग के लिए जैव सूचना विज्ञान के आँकड़ों तथा उच्च गतिकीय संगणक साधन की आवश्यकता होती थी|
• इस समय परियोजना को पूरा करने के लिए कई देशों ने संयुक्त रूप से काम किया|  

13. डीएनए अंगुलिछापी क्या है? इसके उपयोगिता पर प्रकाश डालिए|

उत्तर

दो व्यक्तियों के डीएनए अनुक्रमों के बीच तुलना करने हेतु डीएनए अंगुलिछापी एक त्वरित विधि है| 

इसके उपयोग :
• यह संभावित अपराध संदिग्धों की पहचान करने के लिए फॉरेंसिक विज्ञान में प्रयोग किया जाता है|
• इसका उपयोग पैतृक विवादों का समाधान करने के लिए किया जाता है|
• इसका उपयोग फसलों और पशुधन की वाणिज्यिक किस्मों की पहचान और रक्षा करने के लिए किया जाता है|
• यह एक जीव के विकास के इतिहास को जानने और विभिन्न जीवों के समूहों के बीच संबंधों का पता लगाने के लिए उपयोग किया जाता है|

14. निम्न का संक्षिप्त वर्णन कीजिए-
(क) अनुलेखन
(ख) बहुरूपता
(ग) स्थानांतरण
(घ) जैव सूचना विज्ञान

उत्तर

(क) अनुलेखन- डीएनए की एक रज्जुक से आनुवांशिक सूचनाओं का आरएनए में प्रतिलिपीकरण करने की प्रक्रिया को अनुलेखन कहते हैं| पूरकता का सिद्धांत अनुलेखन प्रक्रम को नियंत्रित करता है जिसमें एडिनोसिन थाइमिन की जगह पर यूरेसील के साथ क्षारयुग्म बनाता है| केवल डीएनए का एक छोटा भाग पॉलीपेप्टाइड का कूटलेखन करता है|

(ख) बहुरूपता- अव्यक्तेक अनुक्रमों में उत्परिवर्तन के माध्यम से उत्पन्न होने वाले डीएनए में भिन्नता को बहुरूपता कहा जाता है| इस तरह की विभिन्नताएँ डीएनए की विशिष्ट स्थलों के लिए अद्वितीय हैं और निवेशन, विलोपन या प्रतिस्थापन के कारण हो सकती हैं| यह इलेक्ट्रोफोरेसिस द्वारा डीएनए खंडों द्वारा पृथक्करण करके प्राप्त किया जा सकता है| डीएनए अनुक्रम में मिलने वाली बहुरूपता डीएनए अंगुलिछापी मानव जीनोम के आनुवांशिक नक्शे तैयार करने में लाभदायक है|

(ग) स्थानांतरण- स्थानांतरण वह प्रक्रिया है जिसमें एमीनो अम्लों के बहुकलन से पॉलीपेप्टाइड का निर्माण होता है| एमीनो अम्लों के क्रम व अनुक्रम दूत आरएनए में पाए जाने वाले क्षारो के अनुक्रम पर निर्भर करता है| 

(घ) जैव सूचना विज्ञान- यह कम्प्यूटर विज्ञान और सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग होता है, जो प्रबंधन, जीनोमीक्स की बड़ी सूचनाओं को संशोधित करने, सूचना प्रसंस्करण, आँकड़ों का विश्लेषण करने और नए ज्ञान का निर्माण करने के साथ काम करता है|

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