Notes of Class 9th: Ch 4 परमाणु की संरचना विज्ञान

Notes of Science in Hindi for Class 9th: Ch 4 परमाणु की संरचना विज्ञान 

विषय-वस्तु
  • पदार्थों में आवेशित कण
  • इलेक्ट्रॉन की खोज- कैथोड किरणें
  • प्रोटॉन की खोज- केनाल किरणें
  • न्यूट्रॉन की खोज
  • परमाणु की संरचना
  • टॉमसन का परमाणु मॉडल
  • रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल
  • बोर का परमाण्विक मॉडल
  • विभिन्न कक्षाओं में इलेक्ट्रॉन का वितरण
  • संयोजकता
  • परमाणु संख्या तथा द्रव्यमान संख्या
  • समस्थानिक
  • समभारिक

इलेक्ट्रॉन की खोज

• कैथोड किरणें: जे. जे. टॉमसन ने कैथोड किरणों की मदद से परमाणु में इलेक्ट्रॉन की उपस्थिति के बारे में बताया| 

इलेक्ट्रॉन के बारे में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

इलेक्ट्रॉन पर आवेश = -1.6 ×10-19 C (C = कूलाम)
इलेक्ट्रॉन पर द्रव्यमान = 9.1 × 10-31 kg

प्रोटॉन की खोज

• केनाल किरणें: ई. गोल्डस्टीन ने उनके द्वारा प्रसिद्ध एनोड किरणों या केनाल किरणों के  प्रयोग द्वारा परमाणु में धनावेशित कण यानि प्रोटॉन की खोज की|

प्रोटॉन के बारे में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

प्रोटॉन पर आवेश = +1.6 ×10-19 C
प्रोटॉन का द्रव्यमान = 1.673 × 10-24 kg

न्यूट्रॉन की खोज

• 1932 में जे. चैडविक ने एक और अवपरमाणुक कण को खोज निकाला, जो अनावेशित और द्रव्यमान में प्रोटॉन के बराबर था| अंतत इसका नाम न्यूट्रॉन पड़ा|

• परमाणु का द्रव्यमान नाभिक में उपस्थित प्रोटॉन और न्यूट्रॉन के द्रव्यमान के योग के द्वारा प्रकट किया जाता है|

परमाणु की संरचना

परमाणु के भीतर इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन की व्यवस्था को समझने के लिए बहुत-से वैज्ञानिकों ने भिन्न-भिन्न प्रकार के मॉडलों को प्रस्तुत किया|

टॉमसन का परमाणु मॉडल

• टॉमसन ने परमाणुओं की संरचना से संबंधित एक मॉडल प्रस्तुत किया, जो क्रिसमस केक की तरह था| 

• इनके अनुसार परमाणु एक धनावेशित गोला था, जिसमें इलेक्ट्रॉन क्रिसमस केक में लगे सूखे मेवों की तरह थे| तरबूज का उदाहरण भी ले सकते हैं, जिसके अनुसार परमाणु में धन आवेश तरबूज के खाने वाले लाल भाग की तरह बिखरा है, जबकि इलेक्ट्रॉन धनावेशित गोले में तरबूज के बीज की भाँति धँसे हैं|


टॉमसन का परमाणु मॉडल के परिणाम

• परमाणु धनावेशित गोले का बना होता है और इलेक्ट्रॉन उसमें धँसे होते हैं|

• ऋणात्मक और धनात्मक आवेश परिमाण में समान होते हैं| इसलिए परमाणु वैद्युतीय रूप से उदासीन होते हैं| 

रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल

• रदरफोर्ड ने अपने प्रयोग से, तेज से चल रहे अल्फ़ा कणों को सोने की पन्नी से टक्कर कराई| 

रदरफोर्ड के प्रयोग के परिणाम

• अधिकतर अल्फ़ा कण बिना मुड़े सोने की पन्नी से सीधे निकल गए|

• कुछ अल्फ़ा कण पन्नी के द्वारा बहुत छोटे कोण से विक्षेपित हुए| 

• प्रत्येक 12000 कणों में से एक कण वापस आ गया|

 प्रयोग के आधार पर रदरफोर्ड ने निम्नलिखित निष्कर्ष निकाले

• परमाणु के भीतर का अधिकतर भाग खाली है क्योंकि अधिकतर अल्फ़ा कण बिना विक्षेपित हुए सोने की पन्नी से बाहर निकल जाते हैं|

• बहुत कम कण अपने मार्ग से विक्षेपित होते हैं जिससे यह ज्ञात होता है कि परमाणु में धनावेशित भाग बहुत कम है|

• बहुत कम अल्फ़ा कण 180० पर विक्षेपित हुए थे, जिससे यह संकेत मिलता है कि सोने के परमाणु का पूर्ण धनावेशित भाग और द्रव्यमान, परमाणु के भीतर बहुत कम आयतन में सीमित हैं|

बोर का परमाण्विक मॉडल

बोर के परमाण्विक मॉडल की निम्नलिखित अवधारणाएँ थीं

• इलेक्ट्रॉन केवल कुछ निश्चित कक्षाओं में ही चक्कर लगा सकते हैं, जिन्हें इलेक्ट्रॉन की विविक्त कक्षा कहते हैं|

• जब इलेक्ट्रॉन इस विविक्त कक्षा में चक्कर लगाते हैं, तो उनकी ऊर्जा का विकिरण नहीं होता| इन कक्षाओं (या कोशों) को ऊर्जा-स्तर कहते हैं|

विभिन्न कक्षाओं में इलेक्ट्रॉन का वितरण

विभिन्न कक्षाओं में इलेक्ट्रॉन का वितरण “बोरेबरी” नियम के अनुसार किया जाता है|

• इन नियमों में अनुसार किसी कक्षा में उपस्थित अधिकतम इलेक्ट्रॉनों की संख्या को सूत्र 2n2 से दर्शाया जाता है, जहाँ n कक्षा की संख्या या ऊर्जा स्तर है|

• इसलिए इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या:
पहले कक्ष या K कोश में होगी = 2 × 12 = 2, 
दूसरे कक्ष या L कोश में होगी = 2 × 22 = 8, 
तीसरे कक्ष या M कोश में होगी = 2 × 32 = 18, 
चौथे कक्ष या N कोश में होगी = 2 × 42 = 32.

• सबसे बाहरी कोश में इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या 8 हो सकती है|

• किसी परमाणु के दिए गए कोश में इलेक्ट्रॉन तब तक स्थान नहीं लेते हैं जब तक कि उससे पहले वाले भीतरी कक्ष पूर्ण रूप से भर नहीं जाते| इससे स्पष्ट होता है कि कक्षाएँ क्रमानुसार भरती हैं|

संयोजकता

• किसी परमाणु की सबसे बाहरी कक्षा में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों को संयोजकता- इलेक्ट्रॉन कहा जाता है|

• बोरबेरी के नियम के अनुसार, किसी परमाणु का बाह्यतम कक्ष अधिकतम 8 इलेक्ट्रॉन रख सकता है| आठ इलेक्ट्रॉन वाले सबसे बाहरी कक्ष को अष्टक माना जाता है| 

• परमाणु अपने अंतिम कक्ष में अष्टक प्राप्त करने के लिए क्रिया करते हैं| यह आपस में इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी करने, उनको ग्रहण करने या उनका त्याग करने से होता है|

• परमाणु के बाह्यतम कक्ष में इलेक्ट्रॉनों के अष्टक बनाने के लिए जितनी संख्या में इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी या स्थानांतरण होता है, वही उस तत्व की संयोजकता-शक्ति अर्थात संयोजकता होती है| 

परमाणु–संख्या तथा द्रव्यमान संख्या

• एक परमाणु में उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या उसकी परमाणु संख्या को बताती है| इसे Z के द्वारा दर्शाया जाता है| किसी तत्व के सभी अणुओं की परमाणु संख्या (Z) समान होती है| इस प्रकार, एक परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की कुल संख्या को परमाणु संख्या कहते हैं|

• एक परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों की कुल संख्या के योग को द्रव्यमान संख्या कहा जाता है|

समस्थानिक

• एक ही तत्व के परमाणु जिनकी परमाणु संख्या समान लेकिन द्रव्यमान संख्या भिन्न होते हैं, समस्थानिक कहलाते हैं| समस्थानिकों के रासायनिक गुण समान लेकिन भौतिक गुण अलग-अलग होते हैं| 

• उदाहरण- प्रकृति में क्लोरीन दो समस्थानिकों रूपों में पाया जाता है, जिसका द्रव्यमान 35u और 37u, जो 3:1 के अनुपात में होते हैं|

समस्थानिकों के अनुप्रयोग

• यूरेनियम के एक समस्थानिक का उपयोग परमाणु भट्टी में ईंधन के रूप में होता है|

• कैंसर के उपचार में कोबाल्ट के समस्थानिक का उपयोग होता है|

• घेंघा रोग के इलाज में आयोडीन के समस्थानिक का उपयोग होता है| 

समभारिक

अलग-अलग परमाणु संख्या वाले तत्वों को जिनकी द्रव्यमान संख्या समान होती है, समभारिक कहा जाता है|

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