NCERT Solutions for Class 12th: Ch 1 जीवों में जनन प्रश्नोत्तर जीव विज्ञान

NCERT Solutions of Jeev Vigyan for Class 12th: Ch 1 जीवों में जनन प्रश्नोत्तर जीव विज्ञान  

प्रश्न 


पृष्ठ संख्या 18

1. जीवों के लिए जनन क्यों अनिवार्य है?

उत्तर

प्रजातियों के निरंतरता के लिए जीवों में प्रजनन आवश्यक होता है| प्रत्येक जीवों की एक निश्चित जीवन अवधि होती है| यदि जीवों में जनन प्रक्रिया रूक जाती है तो प्रजातियों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा तथा वे विलुप्त हो जाएँगे|

2. जनन की अच्छी विधि कौन-सी है और क्यों?

उत्तर

लैंगिक जनन की क्रियाविधि जनन की अच्छी विधि है क्योंकि लैंगिक जनन में नर और मादा युग्मक में युग्मन होता है जिससे जीवों में अनुवांशिक विविधताओं का विकास होता है, जिससे तनावपूर्ण पर्यावरणीय परिस्थितियों में भी उत्तरजीविता का लाभ प्राप्त होता है| यह क्रमागत विकास में भी योगदान मिलता है|

3. अलैंगिक जनन द्वारा उत्पन्न हुए संतति को क्लोन क्यों कहा गया है?

उत्तर

अलैंगिक जनन द्वारा उत्पन्न हुए संतति को क्लोन कहा गया है क्योंकि वे अकारिकीय तथा अनुवांशिक रूप से एक-दूसरे के तथा जनक के समान होते हैं|

4. लैंगिक जनन के परिणामस्वरूप बने संतति को जीवित रहने के अच्छे अवसर होते हैं| क्यों? क्या यह कथन हर समय सही होता है?

उत्तर

लैंगिक जनन में नर और मादा युग्मक में युग्मन होता है, जिसमें दो अलग डीएनए के सम्मिश्रण से विविधता का जन्म होता है| यह विविधता जीवों को उत्तरजीविता के बेहतर संभावनाओं के लिए विभिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियों में अनुकूल बनाती है|
नहीं, यह कथन हर समय सही नहीं होता है क्योंकि संतति जनक से कमतर हो सकता है|

5. अलैंगिक जनन द्वारा बनी संतति लैंगिक जनन द्वारा बनी संतति से किस प्रकार से भिन्न है?

उत्तर

अलैंगिक जनन द्वारा बनी संतति
लैंगिक जनन द्वारा बनी संतति
इसमें युग्मकों का युग्मन नहीं होता है, इसलिए संतति अकारिकीय तथा अनुवांशिक रूप से एकल जनक के समान होती है|  इसमें युग्मकों का युग्मन होता है, इसलिए संतति जनक के समान नहीं होती है|
विविधताएँ अनुपस्थित होती हैं| विविधताएँ पाई जाती हैं|
संतति पर्यावरण में हो रहे परिवर्तन के कम अनुकूल होते हैं|  संतति पर्यावरण में हो रहे परिवर्तन के अधिक अनुकूल होते हैं|

6. अलैंगिक तथा लैंगिक जनन के मध्य विभेद स्थापित करो| कायिक जनन को प्रारूपिक अलैंगिक जनन क्यों माना गया है?

उत्तर

अलैंगिक जनन 
लैंगिक जनन
इसमें नर और मादा युग्मक में युग्मन नहीं होता है|  युग्मकों का युग्मन होता है, इसलिए संतति जनकों के समरूप नहीं होते|
एकल जनक होते हैं| आमतौर पर दो जनक होते हैं|
संतति जनक के समरूप होते हैं तथा क्लोन कहलाते हैं| संतति जनक के समरूप नहीं होते हैं तथा वे एक-दूसरे से और जनक से विविधताएँ प्रदर्शित करते हैं|
यह विकास प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका नहीं निभाता है| यह विकास प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है|
यह सामान्य रूप से एकल कोशिकीय या सरल संरचना वाले जीवों में पाया जाता है| यह सामान्य रूप से उच्च स्तरीय जीवों में पाया जाता है, जिनकी जटिल संरचना होती है|
कोशिकाओं का केवल समसूत्रण कोशिका विभाजन होता है| इसमें कोशिकाओं का अर्धसूत्री तथा समसूत्रण विभाजन दोनों होता है| 
जनन की दर तीव्र होती है| जनन की दर कम होती है|

कायिक जनन को प्रारूपिक अलैंगिक जनन माना गया है क्योंकि :
• एकल जनक होते हैं|
• नर और मादा युग्मकों का युग्मन नहीं होता है|
• सामान्यतः संतति एक-दूसरे के समरूप होते हैं|

7. कायिक प्रवर्धन से क्या समझते हैं? कोई दो उपयुक्त उदाहरण दो|

उत्तर

अनेक पुष्पीय पादपों की स्थलीय प्रजातियों की संरचनाएँ जैसे उपरिभूस्तारी, प्रक्न्दों, अंतःभूस्तारी कंदों, एवं भूस्तारिका आदि में उनके बीज या बीजाणुओं को शामिल किए बिना पौधे या वनस्पति के किसी भाग से ही प्रजनन करने की प्रक्रिया कायिक प्रवर्धन कहलाती है|

कायिक प्रवर्धन के दो उदाहरण :
• आलू के कंद पर स्थित कलिका|
• पत्थरचटा (ब्रायोफिलम) की पत्तियों में कटे किनारों से अपस्थानिक (एडवेंटिसियस) कलिकाओं का उत्पन्न होना|

8. व्याख्या करें:
(क) किशोर चरण 
(ख) प्रजनक चरण 
(ग) जीर्णता चरण या जीर्णावस्था

उत्तर

(क) सभी जीव अपने जीवन में वृद्धि की एक निश्चित अवस्था एवं परिपक्वता तक पहुँचने के बाद ही लैंगिक जनन कर सकते हैं| वृद्धि का यह काल किशोर चरण कहलाता है|

(ख) वह अवधि जिसके दौरान एक जीव लैंगिक रूप से परिपक्व होता है तथा ऐसे युग्मक उत्पन्न कर सकता है जो नए जीवों को जन्म दे सकता है, प्रजनक चरण कहलाता है|

(ग) यह प्रजनक चरण के अंत से मृत्यु तक की अवधि होती है| इस अवधि में, जंतुओं में सहवर्ती परिवर्तन- उपपचयों का मंद गति से होना, प्रोटीन का टूटना आदि जैसे लक्षण दिखाई देते हैं जबकि पौधों की पत्तियाँ पीली होकर गिर जाती हैं|

9. अपनी जटिलता के बावजूद बड़े जीवों ने लैंगिक प्रजनन को पाया है; क्यों?

उत्तर

अपनी जटिलता के बावजूद बड़े जीवों ने लैंगिक प्रजनन को पाया है क्योंकि यह युग्मकों में अलग-अलग आनुवांशिक के सम्मिश्रण के माध्यम से आनुवंशिक विविधताएँ लाता है तथा संतति में आनुवंशिक संरचना को बेहतर बनाता है| ये कारक प्रजातियों के अस्तित्व के लाभ दे सकते हैं और विकास में योगदान दे सकते हैं|

10. व्याख्या करके बताएँ कि अर्धसूत्री विभाजन तथा युग्मकजनन सदैव अंतरसंबंधित (अंतर्बद्ध) होते हैं|

उत्तर

अगुणित युग्मक हमेशा अर्धसूत्री विभाजन द्वारा उत्पन्न होते हैं तथा युग्मकजनन युग्मक निर्माण की प्रक्रिया है| युग्मकजनन द्वारा उत्पन्न युग्मक हमेशा अगुणित होते हैं जबकि जीवों का शरीर द्विगुणित होता है| इसलिए यह आवश्यक है कि अर्धसूत्रीविभाजन अगुणित युग्मक के गठन के लिए हो सकता है, जो विकसित हो रहे युग्मकों में में क्रोमोसोम के आधे से अधिक संख्या को सुनिश्चित करता है|

11. प्रत्येक पुष्पिय पादप के भाग को पहचानें तथा लिखें कि वह अगुणित (n) है या द्विगुणित (2n)|
(क) अंडाशय  __________
(ख) परागकोश  _________
(ग) अंडा (या डिंब) ___________
(घ) पराग ________
(ङ) नर युग्मक _______
(च) युग्मनज ___________

उत्तर

(क) अंडाशय: द्विगुणित
(ख) परागकोश: द्विगुणित
(ग) अंडा (या डिंब): अगुणित
(घ) पराग:अगुणित
(ङ) नर युग्मक:अगुणित
(च) युग्मनज: द्विगुणित

12. बाह्य निषेचन की व्याख्या करें| इसके नुकसान बताएँ|

उत्तर

अधिकतर जलीय जीवों में युग्मक-संलयन बाहरी माध्यम (जल) में अर्थात् जीव के शरीर के बाहर संपन्न होता है| इस प्रकार के युग्मक-संलयन को बाह्य निषेचन कहा जाता है|

बाह्य निषेचन के नुकसान हैं :
• नर तथा मादा युग्मकों के युग्मन की कम संभावना|
• माता-पिता के देखभाल के अभाव में संतति को शिकारियों से खतरा|

13. जूस्पोर (अलैंगिक जल बीजाणु) तथा युग्मनज के बीच भेद करें|

उत्तर

जूस्पोर (अलैंगिक जल बीजाणु)
युग्मनज
यह एक अलैंगिक जनन संरचना है| यह एक लैगिक जनन संरचना है|
यह एक चलनशील अलैंगिक बीजाणु है, जो गति के लिए कशाभिका का उपयोग करता है|यह एक अचलनशील कोशिका होती है|
यह अगुणित या द्विगुणित हो सकता है| यह द्विगुणित होता है|
यह प्रत्यक्ष रूप से नए पौधों को जन्म देने के लिए अंकुरित होता है|  यह एक भ्रूण में विकसित होता है जो आगे चलकर नए व्यष्टि के रूप में विभक्त हो जाता है|

14. युग्मक जनन एवं भ्रूणोद्भव के बीच अंतर स्पष्ट करें|

उत्तर

युग्मक जनन
भ्रूणोद्भव
यह अगुणित युग्मकों की पीढ़ी की प्रक्रिया है| यह भ्रूण के निर्माण की प्रक्रिया है|
इसमें अर्धसूत्रीविभाजन होता है|इसमें समसूत्रण विभाजन होता है|
नर युग्मक को चलनशील बनाने के लिए आगे परिवर्तन की आवश्यकता हो सकती है| विशेष उत्तकों तथा अंगों के निर्माण के लिए आगे चलकर कोशिका विभेदीकरण की आवश्यकता होती है|

15. एक पुष्प में निषेचन-पश्च परिवर्तनों की व्याख्या करें|

उत्तर

एक पुष्प में निषेचन-पश्च परिवर्तन हैं :
• पुष्प के बाह्य दल पंखुड़ी तथा पुंकेसर मुरझा कर झड़ जाते हैं, यद्यपि स्त्रीकेसर पादप से जुड़ा रहता है|
• युग्मनज भ्रूण में विकसित हो जाता है|
• बीजांड बीज में विकसित हो जाता है|
• अंडाशय फल के रूप में विकसित होती है|
• अंडाशय की भित्ति फल की भित्ति का निर्माण करती है जिसे फलभित्ति कहते हैं| इसका कार्य फल को सुरक्षा प्रदान करना है|

16. एक द्विलिंगी पुष्प क्या है? अपने आस-पास से पाँच द्विलिंगी पुष्पों को एकत्र करें और अपने शिक्षक की सहायता से इनके सामान्य (स्थानीय) एवं वैज्ञानिक नाम पता करें|

उत्तर

जब एक ही पुष्प में नर तथा मादा दोनों लिंग (पुंकेसर तथा स्त्रीकेसर) पाए जाते हैं, उसे द्विलिंगी पुष्प कहते हैं|
पुष्प के सामान्य (स्थानीय) एवं वैज्ञानिक नाम :
• गुलाब: रोजा हाइब्रिडा
• कुमुद- निम्फ़ेआ लोटस
• सूर्यमुखी- हेलियनथस एनस
• गुड़हल- हीबीस्कूस् रोज़ा साइनेन्सिस
• सरसों- ब्रेसिका नीग्रा

17. किसी भी कुकरबिट पादप के कुछ पुष्पों की जाँच करें और पुंकेसरी एवं स्त्रीकेसरी पुष्पों को पहचानने की कोशिश करें| क्या आप अन्य एकलिंगी पौधों के नाम जानते हैं?

उत्तर

कुकरबिट पादप में नर तथा मादा पुष्प अलग-अलग होते हैं| पुंकेसरी पुष्पों में नर जनन संरचना को निरूपित करने वाले पुंकेसर के साथ उसकी पंखुड़ियाँ चमकीली तथा पीले रंग की होती हैं| जबकि स्त्रीकेसरी पुष्पों में मादा जनन संरचनों को निरूपित करने वाला स्त्रीकेसर उपस्थित होता है|

18. अंडप्रजक प्राणियों की संतानों का उत्तर जीवन (सरवाइवल) सजीव प्रजक प्राणियों की तुलना में अधिक जोखिमयुक्त क्यों होता है? व्याख्या करें|

उत्तर

अंडप्रजक प्राणियों की संतानों का उत्तर जीवन अधिक जोखिमयुक्त होता है क्योंकि वे मादा जनक के शरीर के बाहर विकसित होते हैं तथा विभिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियों और शिकारियों के खतरे में रहते हैं| जबकि सजीव प्रजक प्राणियों की संतानें मादा शरीर के भीतर विकास करते हैं| इस प्रकार भ्रूणीय सही देखभाल तथा संरक्षण के कारण उनके उत्तर जीवित रहने के सुअवसर बढ़ जाते हैं|

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