NCERT Solutions for Class 11th: पाठ 5 - खनिज एवं शैल

NCERT Solutions for Class 11th: पाठ 5 - खनिज एवं शैल भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत (Khanij avm Shail) Bhautik Bhugol ke Mool Siddhant

अभ्यास

पृष्ठ संख्या: 46

1. बहुवैकल्पिक प्रश्न

(i) निम्न में से कौन ग्रेनाइट के दो प्रमुख घटक हैं?
(क) लौह एवं निकेल
(ख) सिलिका एवं एलुमिनियम
(ग) लौह एवं चाँदी
(घ) लौह ऑक्साइड एवं पोटेशियम
► (ख) सिलिका एवं एलुमिनियम

(ii) निम्न में कौन सा कायांतरित शैलों का प्रमुख लक्षण है?
(क) परिवर्तनीय
(ख) क्रिस्टलीय
(ग) शांत
(घ) पत्रण
► (क) परिवर्तनीय

(iii) निम्न में से कौन सा एकमात्र तत्व वाला खनिज नहीं है?
(क) स्वर्ण
(ख) माइका
(ग) चाँदी
(घ) ग्रेफाईट
► (ख) माइका

(iv) निम्न में कौन सा कठोरतम खनिज है?
(क) टोपाज
(ख) क्वार्ट्ज
(ग) हीरा
(घ) फेल्डस्पर
► (ग) हीरा

(v) निम्न में से कौन सी शैल अवसादी नहीं है?
(क) टायलाइट
(ख) ब्रेशिया
(ग) बोरैक्स
(घ) संगमरमर
► (घ) संगमरमर

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए:

(i) शैल से आप क्या समझते हैं? शैल के तीन प्रमुख वर्गों के नाम बताएँ|

उत्तर

शैल का निर्माण एक या एक से अधिक खनिजों से मिलकर होता है| पृथ्वी की पर्पटी शैलों से बनी है| शैल के तीन प्रमुख वर्ग हैं:
• आग्नेय शैल
• अवसादी शैल
• कायांतरित शैल

(ii) आग्नेय शैल क्या है? आग्नेय शैल के निर्माण की पद्धति एवं उनके लक्षण बताएँ|

उत्तर

मैग्मा के ठंडे होकर घनीभूत हो जाने पर आग्नेय शैलों का निर्माण होता है| जब अपनी ऊपरगामी गति में मैग्मा ठंडा होकर ठोस बन जाता है, तो ये आग्नेय शैल कहलाता है| ठंडा तथा ठोस बनने की यह प्रक्रिया पृथ्वी की पर्पटी या पृथ्वी की सतह पर हो सकती है|
आग्नेय शैलों के लक्षण:
• इन शैलों में क्रिस्टल पाया जाता है|
• इनकी प्रकृति अधिक कठोर होती हैं|
• इन शैलों में जीवाश्म मौजूद नहीं होता है|

(iii) अवसादी शैल का क्या अर्थ है? अवसादी शैल के निर्माण की पद्धति बताएँ|

उत्तर

अपक्षयकारी कारकों जैसे- वायु, नदी तथा समुद्री तरंगों द्वारा अनुकूल स्थानों पर निक्षेपण द्वारा निर्मित शैल को अवसादी शैल कहते हैं| ये संचित पदार्थ धीरे-धीरे शैलों में परिवर्तित हो जाते हैं|

पृथ्वी की सतह की शैलें अपक्षयकारी कारकों के प्रति अनावृत् होती हैं, जो विभिन्न आकार के विखंडों में विभाजित होती हैं| ऐसे उपखंडों का का विभिन्न बहिर्जनित कारकों के द्वारा संवहन एवं निक्षेप होता है| सघनता के द्वारा ये संचित पदार्थ शैलों में परिणत हो जाते हैं| यह प्रक्रिया शिलीभवन कहलाती है|

(iv) शैली चक्र के अनुसार प्रमुख प्रकार की शैलों के मध्य क्या संबंध होता है?

उत्तर

शैली चक्र एक सतत् प्रक्रिया होती है, जिसमें पुरानी शैलें परिवर्तित होकर नवीन रूप लेती हैं|
• आग्नेय शैलें प्राथमिक शैलें हैं तथा अन्य (अवसादी एवं कायांतरित) शैलें इन प्राथमिक शैलों से निर्मित होती है|
• आग्नेय शैलों को कायांतरित शैलों में परिवर्तित किया जा सकता है|
• आग्नेय एवं कायांतरित शैलों से प्राप्त अंशों से अवसादी शैलों का निर्माण होता है|
• अवसादी शैलें अपखंडों में परिवर्तित हो सकती हैं|
• कायांतरित शैलों को अवसादी या आग्नेय शैलों में परिवर्तित किया जा सकता है|

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए:

(i) ‘खनिज’ शब्द को परिभाषित करें, एवं प्रमुख प्रकार के खनिजों के नाम लिखें|

उत्तर

खनिज एक ऐसा प्राकृतिक, कार्बनिक एवं अकार्बनिक तत्व है, जिसमें एक क्रमबद्ध परमाणविक संरचना, निश्चित रासायनिक संघटन तथा भौतिक गुणधर्म होते हैं| खनिज का निर्माण दो या दो से अधिक तत्वों से मिलकर होता है| लेकिन, कभी-कभी सल्फर, ताँबा, चाँदी, स्वर्ण, ग्रेफाइट जैसे एक तत्वीय खनिज भी पाए जाते हैं|

कुछ प्रमुख खनिज तथा उनकी भौतिक विशेषताएँ:

• फेल्डस्पर: इसका रंग हल्का क्रीम से हल्का गुलाबी तक होता है| चीनी मिट्टी के बर्तन तथा काँच बनाने में इसका उपयोग होता है| पृथ्वी की पर्पटी का आधा भाग फेल्डस्पर से बना है|

• क्वार्ट्ज: इसमें सिलिका होता है| यह एक कठोर खनिज है तथा पानी में सर्वथा अघुलनशील होता है| यह श्वेत अथवा रंगहीन होता है तथा इसका उपयोग रेडियो एवं रडार में होता है|

• पाइरॉक्सिन: कैल्शियम, एलूमिनियम, मैग्नेशियम, आयरन तथा सिलिका इसमें शामिल हैं| पृथ्वी की भूपृष्ठ का 10 प्रतिशत हिस्सा पाइरॉक्सिन से बना है| सामान्यतः यह उल्कापिंड में पाया जाता है|

• एम्फीबोल: इसके प्रमुख तत्व एलूमिनियम, कैल्शियम, सिलिका, लौह, मैग्नेशियम हैं| इनसे पृथ्वी के भूपृष्ठ का 7 प्रतिशत भाग निर्मित है| ये हरे एवं काले रंग का होता है तथा इसका उपयोग एस्बेस्टस के उद्योग में होता है|

• माइका: इसमें पोटैशियम, एलूमिनियम, मैग्नेशियम, लौह, सिलिका आदि निहित होते हैं| पृथ्वी की पर्पटी में इसका 4 प्रतिशत अंश होता है| विद्युत् उपकरणों में इनका उपयोग होता है|

• ऑलिवीन: मैग्नेशियम, लौह तथा सिलिका ऑलिवीन के प्रमुख तत्त्व होते हैं| इनका उपयोग आभूषणों में होता है| यह सामान्यतः हरे रंग के क्रिस्टल होते हैं जो प्रायः बैसाल्टिक शैलों में पाए जाते हैं|

(ii) भूपृष्ठीय शैलों में प्रमुख प्रकार की शैलों की प्रकृति एवं उसकी उत्पत्ति की पद्धति का वर्णन करे| आप उनमें अंतर कैसे स्थापित करेंगे?

उत्तर

भूपृष्ठीय शैलों में तीन प्रमुख प्रकार की शैलें हैं:

• आग्नेय शैलें: मैग्मा के ठंडे होकर घनीभूत हो जाने पर आग्नेय शैलों का निर्माण होता है| ठंडा तथ ठोस बनने की यह प्रक्रिया पृथ्वी की पर्पटी या पृथ्वी की सतह पर हो सकती है|

• इनका स्वभाव काफी कठोर होता है|

• इसकी बनावट इसके कणों के आकार एवं व्यवस्था अथवा पदार्थ की भौतिक अवस्था पर निर्भर करती है| यदि पिघले हुए पदार्थ धीरे-धीरे गहराई तक ठंडे होते हैं, तो खनिज के कण पर्याप्त बड़े हो सकते हैं| सतह पर आकस्मिक शीतलता के कारण छोटे एवं चिकने कण बनते हैं|

• अवसादी शैलें: पृथ्वी की सतह की शैलें (आग्नेय, अवसादी एवं कायांतरित) अपक्षयकारी कारकों के प्रति अनावृत्त होती हैं, जो विभिन्न आकार के विखंडों में विभाजित होती हैं| ऐसे उपखंडों का विभिन्न बहिर्जनित कारकों के द्वारा संवहन एवं निक्षेप होता है| सघनता के द्वारा ये संचित पदार्थ शैलों में परिणत हो जाते हैं| ये संचित पदार्थ अवसाद कहलाते हैं तथा निर्मित शैल अवसादी शैल कहलाते है|

• ये स्वभाव में नरम होते हैं|

• इन शैलों में विभिन्न सांद्रता वाली अनेक सतहें होती हैं|

• कायांतरित शैलें: ये शैलें दाब, आयतन तथा तापमान (पी.वी.टी.) में परिवर्तन के द्वारा निर्मित होती हैं| कायांतरण वह प्रक्रिया है, जिसमें समेकित शैलों में पुनः क्रिस्टलीकरण होता है तथा वास्तविक शैलों में पदार्थ पुनः संगठित हो जाते हैं|

• इन शैलों का स्वभाव क्रिस्टलीय होता है|

• उष्मीय कायांतरण के कारण शैलों के पदार्थों में रासायनिक परिवर्तन एवं पुनः क्रिस्टलीकरण होता है|

(iii) कायांतरित शैल क्या है? इनके प्रकार एवं निर्माण की पद्धति का वर्णन करें|

उत्तर

ताप, दाब और रासायनिक क्रियाओं के कारण आग्नेय और अवसादी चट्टानों से कायान्तरित चट्टान का निर्माण होता है| जब विवर्तनिक प्रक्रिया के कारण शैलें निचले स्तर की ओर बलपूर्वक खिसक जाती हैं, या जब भूपृष्ठ से उठता, पिघला हुआ मैग्मा भूपृष्ठीय शैलों के संपर्क में आता है, या जब ऊपरी शैलों के कारण निचली शैलों पर अत्यधिक दाब पड़ता है, तब कायांतरण होता है| कायांतरण वह प्रक्रिया है, जिसमें समेकित शैलों में पुनः क्रिस्टलीकरण होता है तथा वास्तविक शैलों में पदार्थ पुनः संगठित हो जाते हैं|

कायांतरित शैल के प्रकार:

• पत्रित शैल: इन शैलों का निर्माण पृथ्वी के भीतर के अत्यधिक उच्च दबावों के कारण होता है, जो असमान होते हैं तथा अन्य दिशा की तुलना में एक दिशा में अधिक होता है| इन शैलों की संरचना प्लेट अथवा शीट की तरह होती है, जैसे- स्लेट, शिस्ट|

• अपत्रित शैल: इन शैलों का निर्माण आग्नेय शैलों के संपर्क में आने के कारण होता है जहाँ तापमान उच्च होता है लेकिन सभी दिशाओं में अपेक्षाकृत दबाव कम होता है| ये समतल और लंबे नहीं होते हैं| जैसे- संगमरमर तथा क्वार्ट्ज|

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