NCERT Solutions for Class 11th: पाठ 4 - महासागरों और महाद्वीपों का वितरण

NCERT Solutions for Class 11th: पाठ 4 - महासागरों और महाद्वीपों का वितरण भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत (Mahasagron aur Mahadweepon ka Vitran) Bhautik Bhugol ke Mool Siddhant

अभ्यास

पृष्ठ संख्या 39

1. बहुवैकल्पिक प्रश्न

(i) निम्न में से किसने सर्वप्रथम यूरोप, अफ्रीका व अमेरिका के साथ स्थित होने की संभावना व्यक्त की?
(क) अल्फ्रेड वेगनर
(ख) अब्राहम आरटेलियस
(ग) एनटोनियो पेलेग्रिनी
(घ) एडमंड हैस
► (ख) अब्राहम आरटेलियस

(ii) पोलर फ्लीइंग बल (Polar fleeing force) निम्नलिखित में से किससे संबंधित है?
(क) पृथ्वी का परिक्रमण
(ख) पृथ्वी का घूर्णन
(ग) गुरूत्वाकर्षण
(घ) ज्वारीय बल
► (ख) पृथ्वी का घूर्णन

(iii) इनमें से कौन सी लघु (Minor) प्लेट नहीं है?
(क) नजका
(ख) फिलिपीन
(ग) अरब
(घ) अंटार्कटिक
► (घ) अंटार्कटिक

(iv) सागरीय अधस्थल विस्तार सिद्धांत की व्याख्या करते हुए हेस ने निम्न में से किस अवधारणा पर विचार नहीं किया?
(क) मध्य-महासागरीय कटकों के साथ ज्वालामुखी क्रियाएँ|
(ख) महासागरीय नितल की चट्टानों में सामान्य व उत्क्रमण चुंबकत्व क्षेत्र की पट्टियों का होना|
(ग) विभिन्न महाद्वीपों में जीवाश्मों का वितरण|
(घ) महासागरीय तल की चट्टानों की आयु|
► (ग) विभिन्न महाद्वीपों में जीवाश्मों का वितरण|

(v) हिमालय पर्वतों के साथ भारतीय प्लेट की सीमा किस तरह की प्लेट सीमा है?
(क) महासागरीय-महाद्वीपीय अभिसरण
(ख) अपसारी सीमा
(ग) रूपांतर सीमा
(घ) महाद्वीपीय-महाद्वीपीय अभिसरण
► (घ) महाद्वीपीय-महाद्वीपीय अभिसरण

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए:

(i) महाद्वीपों के प्रवाह के लिए वेगनर ने निम्नलिखित में से किन बलों का उल्लेख किया?

उत्तर

वेगनर के अनुसार महाद्वीपीय विस्थापन के दो कारण थे: (i) पोलर या ध्रुवीय फ्लीइंग बल और (ii) ज्वारीय बल| ध्रुवीय फ्लीइंग बल पृथ्वी के घूर्णन से संबंधित है| आप जानते हैं कि पृथ्वी की आकृति एक संपूर्ण गोले जैसी नहीं है; वरन् यह भूमध्यरेखा पर उभरी हुई है| यह उभार पृथ्वी के घूर्णन के कारण है| दूसरा बल, जो वेगनर महोदय ने सुझाया - वह ज्वारीय बल है, जो सूर्य व चंद्रमा के आकर्षण से संबद्ध है, जिससे महासागरों में ज्वार पैदा होते हैं| वेगनर का मानना था कि करोड़ों वर्षो के दौरान ये बल प्रभावशाली होकर विस्थापन के लिए सक्षम हो गए|

(ii) मैंटल में संवहन धाराओं के आरंभ होने और बने रहने के क्या कारण हैं?

उत्तर

1930 के दशक में आर्थर होम्स ने मैंटल भाग में संवहन-धाराओं के प्रभाव को संभावना व्यक्त की| ये धाराएँ रेडियोएक्टिव तत्वों से उत्पन्न ताप भिन्नता से मैंटल भाग में उत्पन्न होती हैं| उष्ण पदार्थ धरातल पर पहुँचता है, फैलता है और धीरे-धीरे ठंडा होता है| यह प्रक्रिया संवहन प्रवाह कहलाता है| होम्स ने तर्क दिया कि पूरे मैंटल भाग में इस प्रसार की धाराओं का तंत्र विद्यमान है|

(iii) प्लेट की रूपांतर सीमा, अभिसरण सीमा और अपसारी सीमा में मुख्य अंतर क्या है?

उत्तर

रूपांतर सीमा
अभिसरण सीमा
अपसारी सीमा
जहाँ न तो नई पर्पटी का निर्माण होता है और न ही पर्पटी का विनाश होता है, उन्हें रूपान्तर सीमा कहते हैं| जब एक प्लेट दूसरी प्लेट के नीचे धंसती है और जहाँ भूपर्पटी नष्ट होती है, वह अभिसरण सीमा है| जब दो प्लेट एक दूसरे से विपरीत दिशा में अलग हट्टी है और नई पर्पटी का निर्माण होता है, वह अभिसरण सीमा है|

(iv) दक्कन ट्रेप के निर्माण के दौरान भारतीय स्थलखंड की स्थिति क्या थी?

उत्तर

भारतीय प्लेट के एशियाई प्लेट की तरफ प्रवाह के दौरान एक प्रमुख घटना थी- वह थी लावा प्रवाह से दक्कन प्लेट का निर्माण होना| ऐसा लगभग 6 करोड़ वर्ष पहले आरंभ हुआ और एक लंबे समय तक यह जारी रहा| इस दौरान भारतीय स्थलखंड भूमध्यरेखा के निकट स्थित था|

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए:

(i) महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत के पक्ष में दिए गए प्रमाणों का वर्णन करें|

उत्तर

महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत के पक्ष में दिए गए प्रमाण हैं:

• महाद्वीपों में साम्य: दक्षिण अमेरिका व अफ्रीका के आमने-सामने की तटरेखाएँ अद्भुत व त्रुटिरहित साम्य दिखाती हैं|

• महासागरों के पार चट्टानों की आयु में समानता: 200 करोड़ वर्ष प्राचीन शैल समूहों की एक पट्टी ब्राजील तट और पश्चिमी अफ्रीका के तट पर मिलती हैं, जो आपस में मेल खाती है| दक्षिण अमेरिका व अफ्रीका की तटरेखा के साथ पाए जाने वाले आरंभिक समुद्री निक्षेप जुरेसिक काल के हैं| इससे यह पता चलता है कि इस समय से पहले महासागर की उपस्थिति वहाँ नहीं थीं|

• टिलाइट (Tillite): टिलाइट वे अवसादी चट्टानें हैं, जो हिमानी निक्षेपण से निर्मित होती हैं| भारत में पाए जाने वाले गोंडवाना श्रेणी के तलछटों के प्रतिरूप दक्षिण गोलार्ध के छः विभिन्न स्थलखंडों में मिलते हैं| हिमानी निर्मित टिलाइट चट्टानें पुरातन जलवायु और महाद्वीपों के विस्थापन के स्पष्ट प्रमाण प्रस्तुत करते हैं|

• प्लेसर निक्षेप: घाना तट पर सोने के बड़े निक्षेपों की उपस्थिति व उद्गम चट्टानों की अनुपस्थिति एक आश्चर्यजनक तथ्य है| सोनायुक्त शिराएँ ब्राजील में पाई जाती हैं| अतः यज स्पष्ट है कि घाना में मिलने वाले सोने के निक्षेप ब्राजील पठार से उस समय निकले होंगे, जब ये दोनों महाद्वीप एक दूसरे से जुड़े थे|

• जीवाश्मों का वितरण: यदि समुद्री अवरोधक के दोनों विपरीत किनारों पर जल व स्थल में पाए जाने वाले पौधों व जन्तुओं की समान प्रजातियाँ पाई जाए, तो उनके वितरण की व्याख्या में समस्याएँ उत्पन्न होती हैं| इस प्रेक्षण से कि ‘लैमूर’ भारत, मैडागास्कर व अफ्रीका में मिलते हैं, कुछ वैज्ञानिकों ने इन तीनों स्थलखंडों को जोड़कर एक सतत् स्थलखंड ‘लेमूरिया’ की उपस्थिति को स्वीकारा|

(ii) महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत व प्लेट विवर्तनिक सिद्धांत में मूलभूत अंतर बताइए|

उत्तर

महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत
प्लेट विवर्तनिक सिद्धांत
इस सिद्धांत की आधारभूत संकल्पना यह थी कि प्राचीन में बड़ा महाद्वीप ‘पैंजिया’ था, जो कुछ समय बाद भूखंडों में विभक्त हो गए जो आज के सात महादीप के रूप हैं| प्लेट विवर्तनिक सिद्धांत के अनुसार पृथ्वी का स्थलमंडल सात मुख्य प्लेटों व कुछ छोटी प्लेटों में विभक्त है| प्लेट विवर्तनिक सिद्धांत के अनुसार पृथ्वी का स्थलमंडल सात मुख्य प्लेटों व कुछ छोटी प्लेटों में विभक्त है|
यह सिद्धांत केवल महाद्वीपों के विस्थापन का अध्ययन करता है| यह महासागरों तथा महाद्वीपों दोनों के विस्थापन का अध्ययन करता है| यह महासागरों तथा महाद्वीपों दोनों के विस्थापन का अध्ययन करता है|
महाद्वीपीय विस्थापन के सिद्धांत के पक्ष में, महाद्वीपों में साम्य, प्लेसर निक्षेप, जीवाश्मों का वितरण हैं| यह पृथ्वी के धरातल के अंदर की प्रक्रियाओं के वैज्ञानिक विश्लेषण पर आधारित है| यह पृथ्वी के धरातल के अंदर की प्रक्रियाओं के वैज्ञानिक विश्लेषण पर आधारित है|
यह सिद्धांत भविष्य की घटनाओं के बारे में जानकारी नहीं देता है| इस सिद्धांत के अनुसार सभी प्लेटें भविष्य में भी गतिमान रहेंगी| इस सिद्धांत के अनुसार सभी प्लेटें भविष्य में भी गतिमान रहेंगी|

(iii) महाद्वीपीय प्रवाह सिद्धांत के उपरांत की प्रमुख खोज क्या है, जिससे वैज्ञानिकों ने महासागर व महाद्वीपीय वितरण के अध्ययन में पुनः रुचि ली?

उत्तर

युद्धोत्तर काल के दौरान बहुत से महाद्वीपीय प्रवाह सिद्धांत के उपरांत की खोजों ने भूवैज्ञानिक साहित्य को नई जानकारी प्रदान की| विशेष रूप से, समुद्र तल मानचित्रण से एकत्रित जानकारी महासागरों और महाद्वीपों के वितरण के अध्ययन के लिए नए आयाम प्रदान करती है|

• मध्य महासागरीय कटकों के साथ-साथ ज्वालामुखी उद्गार सामान्य क्रिया है और ये उद्गार इस क्षेत्र में बड़ी मात्रा में लावा बाहर निकलते हैं|

• महासागरीय कटक के मध्य भाग के दोनों तरफ समान दूरी पर पाई जाने वाली चट्टानों के निर्माण का समय, संरचना, संघटन और चुंबकीय गुणों में समानता पाई जाती है| महासागरीय काटकों के समीप की चट्टानों में सामान्य चुंबकत्व ध्रुवण पाई जाती है तथा ये चट्टानें नवीनतम है| कटकों के शीर्ष से दूर चट्टानों की आयु भी अधिक है|

• महासागरीय पर्पटी की चट्टानें महाद्वीपीय पर्पटी की चट्टानों की अपेक्षा अधिक नई हैं| महासागरीय पर्पटी की चट्टानें कहीं भी 20 करोड़ वर्ष से अधिक पुरानी नहीं हैं|

• गहरी खाइयों में भूकंप उद्गम अधिक गहराई पर हैं| जबकि मध्य-महासागरीय कटकों के क्षेत्र में भूकंप उद्गम केंद्र कम गहराई पर विद्यमान है|

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