NCERT Solutions for Psychology in Hindi for Class 11th: Ch 7 मानव स्मृति

NCERT Solutions of Psychology in Hindi for Class 11th: Ch 7 मानव स्मृति मनोविज्ञान 

समीक्षात्मक प्रश्न

पृष्ठ संख्या 154

1. कूट संकेतन, भण्डारण और पुनरूद्धार का क्या तात्पर्य है?

उत्तर

कूट संकेतन- कूट संकेतन पहली अवस्था है जिसका तात्पर्य उस प्रक्रिया से है जिसके द्वारा सूचना स्मृति तंत्र में पहली बार पंजीकृत की जाती है, ताकि इसका पुनः उपयोग किया जा सकता है|

भण्डारण- यह स्मृति की द्वितीय अवस्था है| सूचना, जिसका कूट संकेतन किया गया, उसका भण्डारण भी आवश्यक है जिससे उस सूचना का बाद में उपयोग किया जा सके| अत: भंडारण उस प्रक्रिया को कहते हैं जिसके द्वारा सूचना कुछ समय सीमा तक धारण की जाती है|

पुनरूद्धार- यह स्मृति की तीसरी अवस्था है| सूचना का उपयोग तभी किया जा सकता है जब कोई व्यक्ति अपनी स्मृति से उसे वापस प्राप्त करने में समर्थ हो| विभिन्न प्रकार के संज्ञानात्मक कार्यों; जैसे- समस्या समाधान, निर्णयन इत्यादि के करने के लिए जब संचित खुलना को पुन: चेतना में लाया जाता है तो इस प्रक्रिया को पुनरुद्धार कहा जाता है|

2. संवेदी, अल्पकालिक तथा दीर्घकालिक स्मृति तंत्र से सूचना का प्रक्रमण किस प्रकार होता है?

उत्तर

अवस्था मॉडल के अनुसार स्मृति तंत्र तीन प्रकार के होते हैं:
संवेदी स्मृति, अल्पकालिक स्मृति तथा दीर्घकालिक स्मृति|

संवेदी स्मृति: कोई भी नयी सूचना पहले संवेदी स्मृति में आती है| संवेदी स्मृति को संचयी क्षमता तो बहुत होती है किंतु इसकी अवधि वहुत कम होती है, एक सेकण्ड से भी कम| यह एक ऐसा स्मृति तंत्र है जो प्रत्येक संवेदना को परिशुद्धता से ग्रहण करता है| अक्सर इस तंत्र को संवेदी स्मृति या संवेदी पंजिका कहते है, क्योंकि समस्त संवेदनाएँ यहाँ उद्दीपक की प्रतिकृति के रूप में ही संग्रहित की जाती हैं|

अल्पकालिक स्मृति- जिन सूचनाओं पर हम ध्यान देते हैँ वे हमारी द्वितीय स्मृति भंडार में प्रवेश करती हैं जिसे अल्पकालिक स्मृति कहा जाता है| जो थोड़ी सूचना को थोड़े समय तक (मान्यता 30 सेकण्ड या उससे कम) ही रख पाती हैं| एटकिंसन एवं शिफ्रिन के अनुसार अल्पकालिक स्मृति में सूचना का कूट संकेतन मुख्य रूप से ध्वन्यात्मक होता हैं| यदि इसका निरंतर अभ्यास न किया जाए तो 30 सेकण्ड से कम समय में ही अल्पकालिक स्मृति से बाहर चली जाती है| ध्यान दीजिए कि अल्पकालिक स्मृति कमजोर तो होती है लेकिन संवेदी पंजिका की भाँति नहीं, जहाँ एक सेकण्ड से भी कम समय में सूचना का क्षय हो जाता हैं|

दीर्घकालिक स्मृति: ऐसी सामग्री, जो अल्पकालिक स्मृति की क्षमता एवं धारण अवधि की सीमाओँ को पार कर जाती है, यह दीर्घकालिक स्मृति में प्रवेश करती है जिसकी क्षमता व्यापक है| यह स्मृति का ऐसा स्थायी भडार है जहाँ सूचनाएँ, चाहे वह कितनी भी नयी क्यों न हों. जैसे आपने कल क्या नास्ता किया था? से लेकर इतनी पुरानी, जैसे आपने अपना छठा जन्मदिन केसे मनाया था? सभी संचित होती हैं। यह प्रदर्शित किया गया है कि कोई बना एक बार दीर्घकालिक स्मृति के भंडार में चली जाती है तो उसे हम कभी नहीं भूलते क्योंकि यह शब्दार्थ कूट संकेतन में अर्थात् किसी सूचना का क्या अर्थ है? द्वारा संग्रहित की जाती है|

3. अनुरक्षण एवं विस्तृत पूर्वाभ्यास में क्या अंतर है?

उत्तर

अनुरक्षण पूर्वाभ्यास

अल्पकालिक स्मृति फिर दूसरी नियंत्रण प्रक्रिया अनुरक्षण पूर्वाभ्यास को सक्रिय करती है जिससे सूचना को वांछित समय तक धारित किया जा सके| यह पूर्वाभ्यास सूचना को दुहरा कर अनुरक्षित करता है तथा जब पूर्वाभ्यास रुक जाता है तब सूचना की क्षति ही जाती है| इसे मूक या वाचिक रूप से दोहराया जाता है|

विस्तृत पूर्वाभ्यास

इसमें धारित की जाने वाली सूचना को दीर्घकालिक स्मृति में पूर्व निहित सूचना के साथ जोड़ने का प्रयास किया जाता है| उदाहरण के लिए, 'मानवता' शब्द का अर्थ याद करना सरल होगा, यदि पहले से हम 'करुणा' ' सत्य' और ' सदभावना' के संप्रत्ययों का तात्पर्य जानते हों| नयी सूचना के साथ आप कितना साहचर्य उत्पन्न कर सकते हैँ, यह उसके स्थायित्व को निर्धारित करेगा| विस्तारपरक पूर्वाभ्यास में व्यक्ति एक सूचना को उससे उद्वेलित विभिन्न साहचर्यों के आधार पर विश्लेषित करता है। इसमें सूचना को विभिन्न संभावित तरीकों से संगठित किया जाता है|

4. घोषणात्मक एवं प्रक्रियामूलक स्मृतियों में क्या अंतर है?

उत्तर

घोषणात्मक स्मृतियाँ

समी सूचनाएँ जिनमें तथ्य, नाम, निधि हैं जैसे- रिक्शा के तीन पहिए होते हैं, भारत 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हुआ, मेंढ़क उभयचर प्राणी है, तथा आप और आपके मित्र का एक ही नाम है, घोषणात्मक स्मृति के अंग है| घोषणात्मक स्मृति से संबंधित तथ्यों का शाब्दिक वर्णन किया जा सकता है|

प्रक्रियामूलक स्मृतियाँ

दूसरी ओर, प्रक्रियामूलक स्मृति उन स्मृतियों से संबंधित है जिनमें किसी कार्य को घूरा करने के लिए कुछ कौशल की आवश्यकता होती हैं; जैसे- साइकिल चलाना. बास्केटबॉल खेलना, चाय बनाना इत्यादि| प्रक्रियामूलक स्मृति को सहजता से वर्णित नहीं किया जा सकता|

5. दीर्घकालिक स्मृति में श्रेणीबद्ध संगठन क्या है?

उत्तर

इस तरह के प्रश्नों का उत्तर देने में लोगों को कितना समय लगता है, इसके आधार पर दीर्घकालिक स्मृति में संगठन के स्वरूप का अनुमान लगाया गया है| दीर्घकालिक स्मृति में ज्ञान-प्रतिनिधान की सबले महत्वपूर्ण इकाई संप्रत्यय हैं| संप्रत्यय उन वस्तुओं और घटनाओं के मानसिक संवर्ग हैं जो कई प्रकार से एक दूसरे के समान हैँ| संप्रत्यय स्कीमा में भी संगठित होते हैं, जो एक मानसिक ढाँचा होता है तथा जो इस वास्तु जगत के बारे में हमारे ज्ञान एवं अभिग्रह का प्रतिनिधान करते हैं|

सन् 1969 में एलन कोलिन्स एवं रॉस क्विवुलियन ने एक ऐतिहासिक शोधपत्र प्रकाशित किया जिसमें उन्होंने बताया कि दीर्घकालिक स्मृति में सूचना श्रेणीबद्ध रूप से संगठित होती है तथा उसकी एक जालीदार संरचना होती हैं। इस संरचना के तत्वों को निष्पंद बिंदु कहा जाता हैं। निष्पंद बिंदु संप्रत्यय होते हैं किंतु इनके बीच के संबंध को नामपत्रित संबंध कहते हैं जो संप्रत्ययों के गुणधर्म या श्रेणी सदस्यता दर्शाते हैं|

6. विस्मरण क्यों होता है?

उत्तर

विस्मरण किसी समयावधि तक संचित सामग्री की हानि से संबंधित है| किसी सामग्री को सीखने के तुरंत बाद सबसे अधिक क्षति होती है, बाद में वह क्षति धीमी गति से होती है| विस्मरण चिन्हों के ह्रास तथा अवरोध के कारण होता है| पुनरुद्धार के समय पर्याप्त संकेतों के अभाव में भी विस्मरण हो सकता है|

7. अवरोध के कारण विस्मरण, पुनरुद्धार से संबंधित विस्मरण से किस प्रकार भिन्न हैं?

उत्तर

पुनरुद्भार असफलता के कारण विस्मरण

विस्मरण न केवल एक समय के बाद स्मृति चिन्हों के ह्रास के कारण होता है (जैसा अनुपयोग सिद्धांत सुझाता है) या प्रत्याह्वान के समय स्वतंत्र रूप से संचित साहचर्यों के बीच प्रतिद्वंद्विता के करण होता है (जैसा अवरोध सिद्धांत सुझाता है), बल्कि प्रत्याह्वान के समय पुनरुद्धार के संकेतों के अनुपस्थित रहने या अनुपयुक्त होने के कारण भी होता है| पुनरुद्धार के संकेत वे साधन है जो हमें स्मृति में संचित सूचनाओ को पुन: प्राप्त करने में मदद करते हैं| यह विचार टलविंग और उनके साथियों द्वारा प्रतिपादित किया गया था, जिन्होंने यह दिखाने के लिए कई प्रयोग किए कि स्मृति को सामग्री अक्सर हमें इसलिए नहीं प्राप्त होती है क्योकि पुनरुद्धार के संकेत प्रत्याह्वान के समय या तो अनुपस्थित होते है या अनुपयुक्त|

अवरोध के कारण विस्मरण

इसके अनुसार स्मृति भंडार में संचित विभिन्न सामग्री के बीच अवरोध के कारण विस्मरण होता है| इस सिद्धांत के अनुसार सीखने और याद करने में विभिन्न पदों के बीच साहचर्य स्थापित होता है और एक बार साहचर्य स्थापित हो जाने के बाद यह स्मृति में अक्षत रहता है| व्यक्ति बहुत सारे साहचर्य अर्जित करते रहते हैं और ये बिना किसी आपसी द्वंद्व के स्वतंत्र रूप से स्मृति में रहते हैं| तथापि पुनरुद्धार के समय इनमें अवरोध उत्पन्न होता है क्योकि भिन्न-भिन्न साहचर्यों में पुनरुद्धार के लिए प्रतिस्पर्धा होती है|

8. “स्मृति एक रचनात्मक प्रक्रिया है” से क्या तात्पर्य है?

उत्तर

बार्टलेट ने स्मृति को रचनात्मक प्रक्रिया माना है| अर्थपूर्ण सामग्री यथा, कहानियों, गद्य, दंतकथाएँ इत्यादि का उपयोग करते हुए बार्टलेट ने यह समझने का प्रयास किया कि किस प्रकार कोई विशिष्ट स्मृति व्यक्ति के ज्ञान, लक्ष्यों, अभिप्रेरणा, वरीयता तथा अन्य मनोवैज्ञानिक प्रक्रियाओं से प्रभावित होती हैँ। उन्होंने सरल प्रयोग किए जिनमें पहले उपरोक्त प्रकार की सामग्री को प्रतिभागी पढ़त्ते थे, फिर 15 मिनट के अंतराल के बाद जो पढ़ा था उसका प्रत्याह्वान करते थे । वार्टलेट ने क्रमिक पुनरुत्पादन विधि का प्रयोग किया जिसमें प्रतिभागी याद की हुई सामग्री को भिन्न-भिन्न समयांतरालों पर प्रत्याह्वान करते थे| इन क्रमिक पुनरुत्पादनों में उनके प्रतिभागियों ने कई प्रकार की ‘गलतियाँ' कीं जिसे वार्टलेट ने स्मृति की रचनात्मक प्रक्रिया को समझने के लिए उपयोगी माना| उनके प्रतिभागियों ने मूल पाठ को अपने ज्ञान के जयादा अनुकूल बनाने के लिए परिवर्तित कर दिया, अनावश्यक वर्णनों की व्याख्या की, मुख्य कथावस्तु को विस्तृत किया तथा सामग्री को पूर्ण रूप से बदल दिया ताकि वह अधिक तार्किक एवं समनुगत लगे । इस प्रकार के परिणामों की व्याख्या हेतु वार्टलेट ने स्कीमा शब्द का उपयोग किया जिसका तात्पर्य 'भूतपूर्व अनुभवों और प्रतिक्रियाओं का एक सक्रिय संगठन था’| स्कीमा भूतपूर्व अनुभवों और ज्ञान का एक संगठन है जो आने वाली नयी सूचना के विश्लेषन , भंडारण तथा पुनरुद्धार को प्रभावित करता है। अत: स्मृति एक रचनात्मक सक्रिय प्रक्रिया है जहाँ सूचनाएँ व्यक्ति के पूर्व ज्ञान हैं समझ एवं प्रत्याशाओं के अनुसार संकेतित एवं संचित की जाती हैं|

9. स्मृति-सहायक संकेत क्या है? अपनी स्मृति सुधार के लिए एक योजना के बारे में सुझाव दीजिए|

उत्तर

स्मृति-सहायक संकेत स्मृति में सुधार लाने के लिए होते हैं| स्मृति सुधार के अनेक योजनाएँ हैं|

इनमें से एक सुझाव निम्नलिखित है:

गहन स्तर का प्रक्रमण कीजिए: यदि आप किसी सूचना को अच्छी तरह से याद करना चाहते है तो गहन स्तर का प्रक्रमण कीजिए। क्रैक एवं लॉकहार्ट ने यह प्रदर्शित किया है कि सूचना के सतही गुणों पर ध्यान देने के बजाय उसके अर्थ के रूप में प्रक्रमण किया जाए तो अच्छी स्मृति होती है। गहन स्तर के प्रक्रमण में सूचना से संबंधित जितना संभव हो ऐसे प्रश्न पूछे जाएँ जो उसके अर्थ तथा संबंधों से जुड़े हों| इस प्रकार नयी सूचना आपके पूर्वस्थापित ज्ञान तथा दृष्टिकोण का एक हिस्सा बन जाएगी, और इसके याद रहने की संभाव्यता बढ़ जाएगी|

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