अंबा और भीष्म - पठन सामग्री और सार NCERT Class 7th Hindi बाल महाभारत कथा

सार

सत्यवती के दो पुत्र हुए - चित्रागंद और विचित्रवीर्य। चित्रागंद की मृत्यु युद्ध में हो गयी। उनकी कोई संतान नहीं थी इसलिए विचित्रवीर्य हस्तिनापुर के शासक बने। चूँकि विचित्रवीर्य छोटे थे इसलिए उनके बालिग होने तक राज-काज भीष्म ने संभाला।

विचित्रवीर्य जब विवाह योग्य हुए तो भीष्म को उनके विवाह की चिंता हुई। जब उन्हें काशिराज के कन्याओं के स्वयंवर के बारे में पता चला तो वे उसमें शामिल होने काशी चल दिए। वहाँ देश-विदेश के अनेक राजकुमार स्वयंवर में भाग लेने आये हुए थे। भीष्म ने सभी को हराकर तीनों राजकन्याओं को अपने रथ बैठा लिया और हस्तिनापुर की ओर चल दिए। सौभदेश का राजा साल्व ने भीष्म को रोकने का प्रयास किया जिस कारण दोनों में भयंकर युद्ध छिड़ गया जिसमें अंततः भीष्म की जीत हुई।

भीष्म कन्याओं को लेकर हस्तिनापुर पहुँचे जहाँ विवाह की सारी तैयारियाँ हो चुकी थी। जब कन्याओं को विवाह मण्डप में ले जाने का समय हुआ तो काशिराज की बड़ी बेटी अंबा ने बताया कि वे राजा साल्व को पहले ही अपना पति मान चुकी हैं। यह सुनकर भीष्म ने अंबा को शाल्व के पास भेज दिया। अंबा की दो बहनों का विवाह विचित्रवीर्य से हो गया।

जब अंबा साल्व के पास पहुँची तो उसने अंबा को पत्नी मानने से इनकार कर दिया क्योंकि वह भीष्म से युद्ध में हारकर अपमानित हो चूका है। उसने अंबा को भीष्म के पास लौट जाने को कहा। अंबा हस्तिनापुर लौट आई। विचित्रवीर्य अंबा से विवाह करने को तैयार नहीं हुए। अंबा ने भीष्म से कहा कि वह उनसे विवाह कर लें चूँकि वह उन्हें हर कर लायें हैं। भीष्म ने अंबा को अपने प्रतिज्ञा की याद दिलाई। भीष्म ने विचित्रवीर्य को अंबा से विवाह करने के लिए फिर मनाया परन्तु वे तैयार नहीं हुए। भीष्म ने अंबा को राजा साल्व के पास जाने को कहा परन्तु साल्व ने अंबा  को फिर अस्वीकार कर दिया। अंबा छः वर्षों तक सौभदेश और हस्तिनापुर के बीच ठोकरें खाती रहीं। इन सब का कारण अंबा  ने भीष्म को माना।

भीष्म ने बदला लेने के लिए वह कई राजाओं के पास गईं और भीष्म से युद्ध कर हारने का आग्रह किया परन्तु इसके लिए कोई तैयार नहीं हुआ। आखिर में अंबा तपस्वी ब्राह्मणों की सलाह पर अंबा परशुराम के पास गईं। अंबा की दुःखभरी कथा सुनकर परशुराम का हृदय पिघल गया और वह अंबा के प्रार्थना पर भीष्म से युद्ध के लिए तैयार हो गए। भीष्म और परशुराम,के बीच युद्ध कई दिनों तक चला परन्तु कोई नतीजा नहीं निकल सका। अंत में परशुराम ने अंबा को भीष्म के शरण में जाने को कह दिया। परन्तु अंबा हार मानने वालों में से नहीं थीं। उन्होंने वन जाकर कड़ी तपस्या की और तपोबल से स्त्रीरूप छोड़कर पुरुष में परिवर्तित हुईं और अपना नाम शिखंडी रख लिया।

जब महाभारत के युद्ध हुआ तो भीष्म से लड़ते समय अर्जुन के रथ पर आगे बैठा और अर्जुन उसके पीछे। भीष्म को अपने ज्ञान से ज्ञात हो गया कि शिखंडी अंबा ही है इसलिए उन्होंने उसपर बाण चलाना अपनी प्रतिष्ठा के विरुद्ध समझा। अर्जुन ने शिखंडी के पीछे से हमला कर भीष्म को परास्त किया और उन्हें भूमि पर गिराया तब जाकर अंबा का क्रोध शांत हुआ।

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