पठन सामग्री, अतिरिक्त प्रश्न और उत्तर और सार - अग्नि पथ स्पर्श भाग - 1

पाठ का सार

प्रस्तुत कविता में कवि ने संघर्षमय जीवन को 'अग्नि पथ' कहते हुए मनुष्य को यह संदेश दिया है कि राह में सुख रूपी छाँह की चाह न कर अपनी मंजिल की ओर कर्मठतापूर्वक बिना थकान महसूस किए बढते ही जाना चाहिए। कवि कहते हैं कि जीवन संघर्षपूर्ण है। जीवन का रास्ता कठिनाइयों से भरा हुआ है। परन्तु हमें अपना रास्ता खुद तय करना है। किसी भी परिस्थिति में हमें दूसरों का सहारा नही लेना है। हमें कष्ट-मुसीबतों पर जीत पाकर अपने लक्ष्य को प्राप्त करना है।

कवि परिचय

हरिवंश राय बच्चन

इनका जन्म उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद शहर में 27 नवंबर 1907 को हुआ। बच्चन कुछ समय तक विश्वविधालय में प्राध्यापक रहने के बाद भारतीय विदेश सेवा में चले गए थे। इस दौरान इन्होने कई देशों का भम्रण किया और मंच पर ओजस्वी वाणी में काव्यपाठ के लिए विख्यात हुए। बच्चन की कविताएँ सहज और संवेदनशील हैं। इनकी रचनाओं में व्यक्ति-वेदना, राष्ट्र-चेतना और जीवन दर्शन के स्वर मिलते हैं।

प्रमुख कार्य

कविता संग्रह - मधुशाला, निशा-निमंत्रण, एकांत संगीत, मिलन यामिनी, आरती और अंगारे, टूटती चटानें, रूप तरंगिणी।
आत्मकथा के चार खंड - क्या भूलूँ क्या याद करूँ, नीड़ का निर्माण फिर, बसेरे से दूर और दशद्वार से सोपान तक।

कठिन शब्दों के अर्थ

अग्निपथ - कठिनाइयों से भरा हुआ मार्ग।
पत्र - पत्ता
शपथ - कसम
अश्रु - आंसू
स्वेद - पसीना
 रक्त - खून
लथपथ - सना हुआ।

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