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तुम कब जाओगे, अतिथि - पठन सामग्री और सार NCERT Class 9th Hindi

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पठन सामग्री, अतिरिक्त प्रश्न और उत्तर और सार - तुम कब जाओगे, अतिथि स्पर्श भाग - 1

पाठ का सार

लेखक के घर पर एक अतिथि चार दिनों से रह रहा है जिसे देखते हुए वे कहते हैं कि हे अतिथि ! तुम्हें देखते ही मेरा बटुआ काँप गया था। फिर भी हमने भरसक मुस्कान के साथ तुम्हारा स्वागत किया था। रात के भोजन को मध्यम- वर्गीय डिनर जैसा भारी-भरकम बना दिया था। सोचा था कि तुम सुबह चले जाओगे। पर ऐसा नहीं हुआ। तुम यहाँ आराम से सिगरेट के छल्ले उड़ा रहे हो। उधर मैं तुम्हारे सामने कैलेण्डर की तारीखें बदल-बदलकर तुम्हें जाने का संकेत दे रहा हूँ। तीसरे दिन तुमने कपड़े धुलवाने की फ़रमाइश की। कपड़े धुलकर आ गए लेकिन तुम नहीं गए। पत्नी ने सुना तो वह भी आँखें तरेरने लगी। चौथे दिन कपड़े धुलकर आ गए , फिर भी तुम डटे हुए हो। बातचीत के सभी विषय समाप्त हो गए हैं। दोनों अपने अपने में मग्न होकर पढ़ रहे हैं, सौहार्द समाप्त हो चला है। भावनाएँ गालियाँ बनती जा रही हैं। सत्कार की ऊष्मा समाप्त हो चुकी है, अब भोजन में खिचड़ी बनने लगी है। घर को स्वीट होम कहा गया है , पर तुम्हारे होने से घर का स्वीटनेस खत्म हो गया है। अब तुम चले जाओ वर्ना मुझे ‘ गेट आउट ’ कहना पड़ेगा।यदि तुम अपने आप कल सुबह चले न गए तो मेरी सहनशीलता जवाब दे जाएगी। माना तुम देवता हो किंतु मैं तो आदमी हूँ। मनुष्य और देवता ज़्यादा देर साथ नहीं रह सकते। इसलिए अपना देवत्व सुरक्षित रखना चाहते हो तो अपने आप विदा हो जाओ। तुम कब जाओगे , अतिथि ?

लेखक परिचय

शरद जोशी

इनका जन्म मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में 21 मई 1931 को हुआ। इनका बचपन कई शहरों में बिता। कुछ समय तक यह सरकारी नौकरी में रहे फिर इन्होने लेखन को ही आजीविका के रूप में अपना लिया। इन्होंने व्यंग्य लेख , व्यंग्य उपन्यास , व्यंग्य कॉलम के अतिरिक्त हास्य-व्यंग्यपूर्ण धारावाहिकों की पटकथाएँ और संवाद भी लिखे। सन  1991 में इनका देहांत हो गया।

प्रमुख कार्य

व्यंग्य-कृतियाँ - परिक्रमा , किसी महाने , जीप पर सवार इल्लियाँ , तिलस्म , रहा किनारे बैठ , दूसरी सतह , प्रतिदिन।
व्यंग्य नाटक: अंधों का हाथी और एक था गधा।
उपन्यास - मैं,मैं,केवल मैं, उर्फ़ कमलमुख बी.ए.।

कठिन शब्दों के अर्थ

• निस्संकोच – बिना संकोच के
• सतत – लगातार
• आतिथ्य – आवभगत
• अंतरंग – घनिष्ठ या गहरा
• छोर – किनारा 
• आघात – चोट 
• मार्मिक – हृदय को छूने वाला
• भावभीनी – प्रेम से ओतप्रोत 
• अप्रत्याशित – आकस्मिक
• सामीप्य – निकटता
• कोनलों – कोनों से 
• ऊष्मा – गरमी 
• संक्रमण – एक स्थिति या अवस्था से दूसरी में प्रवेश 
• निर्मूल – मूल रहित 
• सौहार्द – मैत्री 
• गुँजायमान – गूँजता हुआ 
• एस्ट्रॉनाट्‍स – अंतरिक्ष यात्री

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